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भीतर-भीतर भितरघात
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 12 Mar 2017 11:10 AM IST
सार
कई सीटों पर आपसी कलह से मिली हार
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विस्तार
कानपुर नगर और देहात की 14 विधानसभा की अधिकतर सीटों पर भाजपा को जरूर बंपर जीत मिली, लेकिन कुछ सीटों पर भितरघातियों ने समीकरण बिगाड़ दिया। जिसका असर यह हुआ कि कई दिग्गज धराशायी हो गए।
आर्यनगर सीट पर सलिल विश्नोई शुरू से अपनी जीत को पक्की मानकर चल रहे थे, लेकिन उनकी पार्टी के भीतर ही पिछले करीब एक साल से विरोध चल रहा था। जिसमें कुछ सभासदों की सक्रिय भूमिका बताई जा रही है। कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं को बड़े पदाधिकारियों ने समय से मना तो लिया लेकिन अंदर ही अंदर चिंगारी सुलग रही थी। इसी तरह सीसामऊ सीट से भाजपा प्रत्याशी सुरेश अवस्थी आखिरी समय तक अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे।
परिणाम आने के बाद पता चला कि जिन क्षेत्रों से वह जीत की उम्मीद लगाए बैठे थे, वहां का वोट उनके विपरीत गया। सीसामऊ में भाजपा से टिकट के दावेदारों की संख्या कई थी। जिसमें एक पूर्व विधायक, एक पूर्व प्रत्याशी और एक वर्तमान पार्षद की सक्रियता अधिक बतायी जा रही थी। अब कहा जा रहा है कि जिन लोगों को टिकट नहीं मिला उन्होंने खेल कर दिया। यही वजह है कि जीती हुई सीट भाजपा हार गई।
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इसी तरह सपा और कांग्रेस गठबंधन के बीच जहां भी प्रत्याशी उतारे गए,उन सीटों पर भी आखिर वक्त पर दोनों पार्टियों के बीच ही खेल हो गया। महाराजपुर में सपा से अरुणा तोमर और कांग्रेस के राजाराम पाल मैदान में डटे रहे। नतीजा यह रहा कि दोनों ही धराशायी हो गए। यह हाल भोगनीपुर में भी हुआ। यहां भी कांग्रेेस और सपा के प्रत्याशी एक साथ उतारे गए, दोनों हार गए।
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आर्यनगर सीट पर सलिल विश्नोई शुरू से अपनी जीत को पक्की मानकर चल रहे थे, लेकिन उनकी पार्टी के भीतर ही पिछले करीब एक साल से विरोध चल रहा था। जिसमें कुछ सभासदों की सक्रिय भूमिका बताई जा रही है। कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं को बड़े पदाधिकारियों ने समय से मना तो लिया लेकिन अंदर ही अंदर चिंगारी सुलग रही थी। इसी तरह सीसामऊ सीट से भाजपा प्रत्याशी सुरेश अवस्थी आखिरी समय तक अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे।
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परिणाम आने के बाद पता चला कि जिन क्षेत्रों से वह जीत की उम्मीद लगाए बैठे थे, वहां का वोट उनके विपरीत गया। सीसामऊ में भाजपा से टिकट के दावेदारों की संख्या कई थी। जिसमें एक पूर्व विधायक, एक पूर्व प्रत्याशी और एक वर्तमान पार्षद की सक्रियता अधिक बतायी जा रही थी। अब कहा जा रहा है कि जिन लोगों को टिकट नहीं मिला उन्होंने खेल कर दिया। यही वजह है कि जीती हुई सीट भाजपा हार गई।
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इसी तरह सपा और कांग्रेस गठबंधन के बीच जहां भी प्रत्याशी उतारे गए,उन सीटों पर भी आखिर वक्त पर दोनों पार्टियों के बीच ही खेल हो गया। महाराजपुर में सपा से अरुणा तोमर और कांग्रेस के राजाराम पाल मैदान में डटे रहे। नतीजा यह रहा कि दोनों ही धराशायी हो गए। यह हाल भोगनीपुर में भी हुआ। यहां भी कांग्रेेस और सपा के प्रत्याशी एक साथ उतारे गए, दोनों हार गए।