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Kanpur News: व्हाट्सएप या फोन के बजाय सट्टे की वेबसाइट से भेज रहे मैसेज
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कानपुर। आईपीएल सीजन शुरू होते ही सट्टा बाजार में लाखों रुपये के दांव रोज लग रहे हैं। पुलिस इन सटोरियों पर लगाम नहीं लगा पा रही है। सूत्रों के मुताबिक, सटोरियों ने इस बार अपने ठिकाने और मोबाइल नंबरों के साथ ही बुकिंग का तरीका भी बदल दिया है। अब व्हाट्सएप पर मैसेज या फोन करने के बजाय सीधे सट्टे की वेबसाइट से मैसेजों का आदान-प्रदान हो रहा है।
पिछले वर्ष आईपीएल सीजन के दौरान और उसके बाद पुलिस ने सटोरियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। क्राइम ब्रांच की टीम ने पिछले साल 13 अप्रैल को माल रोड स्थित माई फेयर इन होटल में बैठकर सट्टा खिला रहे तीन सटोरियों को गिरफ्तार किया था। सटोरियों के पास से 19 लाख रुपये बरामद किए थे। साथ ही विदेश से भी आठ लाख रुपये खाते में ट्रांजेक्शन का साक्ष्य मिला था। पुलिस की पूछताछ में सटोरियों ने अपने नाम राहुल उर्फ मुदित, सुमित गुप्ता व सुमित आनंद उर्फ सूमो बताया था। पुलिस ने आरोपियों को जेल भेजा था। हालांकि वर्तमान में वह क्या कर रहे हैं। इसका पता पुलिस को नहीं है। इससे पहले पुलिस ने सट्टा किंग सोनू सरदार व राजा यादव पर गैंगस्टर एक्ट में भी कार्रवाई की थी। उनके पास भी लाखों रुपये बरामद हुए थे। इन ताबड़तोड़ कार्रवाई के बावजूद सट्टेबाजी पर लगाम नहीं लग सकी है।
सूत्रों के मुताबिक, अब सट्टेबाजी के एप व वेबसाइट तमाम छोटे सटोरियों तक पहुंच गए हैं। वह भी कम पैसे पर आईडी व पासवर्ड खरीद रहे हैं और गली मोहल्लों में सट्टे का दांव लगवा रहे हैं। खास बात यह है कि दांव लगाने के दौरान न तो व्हाट्सएप का इस्तेमाल होता है और न ही फोन कॉल का। सट्टे के एप पर ही कॉलिंग व मैसेज की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। पुलिस अब तक इन सटोरियों पर शिकंजा नहीं कस पाई है।
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हवाला, नकली करेंसी का भी खेल
नेपाल और दुबई के गिरोह से भी सटोरियों के संपर्क हैं। वहां के कसीनो में यहां के सटोरियों की गहरी पैठ है। करोड़ों रुपयों का सट्टा ऑनलाइन वहां हो रहा है। सट्टे की रकम हवाला के जरिये दी जाती है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरोह का नकली करेंसी से भी नाम जुड़ रहा है। पुलिस अब इन सभी की ट्रैवल हिस्ट्री खंगाल रही है। मोबाइल लोकेशन के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। मुंबई, राजस्थान, नेपाल, श्रीलंका आदि जगहों के बड़े सटोरिये सोनू सरदार व कानपुर में पकड़े गए सटोरियों के संपर्क में हैं।
सटोरिये हर महीने बदल देते हैं सिम
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सटोरिये कई मोबाइल नंबर इस्तेमाल करते हैं। पकड़ा न जाए इसलिए वो नंबर लगभग हर महीने बदल देते हैं। ये नंबर भी प्री एक्टिवेटेड लेते है और फर्जी आईडी पर होते हैं। लोकेशन भी बदलते रहते है। इस बार पुलिस के पास पुख्ता साक्ष्य व जानकारी है।
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पिछले वर्ष आईपीएल सीजन के दौरान और उसके बाद पुलिस ने सटोरियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। क्राइम ब्रांच की टीम ने पिछले साल 13 अप्रैल को माल रोड स्थित माई फेयर इन होटल में बैठकर सट्टा खिला रहे तीन सटोरियों को गिरफ्तार किया था। सटोरियों के पास से 19 लाख रुपये बरामद किए थे। साथ ही विदेश से भी आठ लाख रुपये खाते में ट्रांजेक्शन का साक्ष्य मिला था। पुलिस की पूछताछ में सटोरियों ने अपने नाम राहुल उर्फ मुदित, सुमित गुप्ता व सुमित आनंद उर्फ सूमो बताया था। पुलिस ने आरोपियों को जेल भेजा था। हालांकि वर्तमान में वह क्या कर रहे हैं। इसका पता पुलिस को नहीं है। इससे पहले पुलिस ने सट्टा किंग सोनू सरदार व राजा यादव पर गैंगस्टर एक्ट में भी कार्रवाई की थी। उनके पास भी लाखों रुपये बरामद हुए थे। इन ताबड़तोड़ कार्रवाई के बावजूद सट्टेबाजी पर लगाम नहीं लग सकी है।
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सूत्रों के मुताबिक, अब सट्टेबाजी के एप व वेबसाइट तमाम छोटे सटोरियों तक पहुंच गए हैं। वह भी कम पैसे पर आईडी व पासवर्ड खरीद रहे हैं और गली मोहल्लों में सट्टे का दांव लगवा रहे हैं। खास बात यह है कि दांव लगाने के दौरान न तो व्हाट्सएप का इस्तेमाल होता है और न ही फोन कॉल का। सट्टे के एप पर ही कॉलिंग व मैसेज की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। पुलिस अब तक इन सटोरियों पर शिकंजा नहीं कस पाई है।
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हवाला, नकली करेंसी का भी खेल
नेपाल और दुबई के गिरोह से भी सटोरियों के संपर्क हैं। वहां के कसीनो में यहां के सटोरियों की गहरी पैठ है। करोड़ों रुपयों का सट्टा ऑनलाइन वहां हो रहा है। सट्टे की रकम हवाला के जरिये दी जाती है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरोह का नकली करेंसी से भी नाम जुड़ रहा है। पुलिस अब इन सभी की ट्रैवल हिस्ट्री खंगाल रही है। मोबाइल लोकेशन के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। मुंबई, राजस्थान, नेपाल, श्रीलंका आदि जगहों के बड़े सटोरिये सोनू सरदार व कानपुर में पकड़े गए सटोरियों के संपर्क में हैं।
सटोरिये हर महीने बदल देते हैं सिम
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सटोरिये कई मोबाइल नंबर इस्तेमाल करते हैं। पकड़ा न जाए इसलिए वो नंबर लगभग हर महीने बदल देते हैं। ये नंबर भी प्री एक्टिवेटेड लेते है और फर्जी आईडी पर होते हैं। लोकेशन भी बदलते रहते है। इस बार पुलिस के पास पुख्ता साक्ष्य व जानकारी है।