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Indian Railway: चार माह बाद मुंबई रूट पर दौड़ेंगी सेमी हाई स्पीड ट्रेन, 2239.96 करोड़ रुपये से पूरा होगा दोहरीकरण का काम

Sat, 16 Jul 2022 09:22 PM IST
हिमांशु अवस्थी सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sat, 16 Jul 2022 09:22 PM IST
सार

भीमसेन से झांसी तक 206 किमी ट्रैक के दोहरीकरण और विद्युतीकरण का काम नवंबर तक पूरा हो जाएगा। इससे मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के लिए ट्रेनों की संख्या भी बढ़ेगी। अभी सिंगल रूट की वजह से ट्रेनें नहीं बढ़ाई जा रहीं हैं। 

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Indian Railway,Semi-high speed train will run on Mumbai route after four months, doubling work will be completed with Rs 2239.96 crore
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

चार महीने बाद दिसंबर से मुंबई रूट पर सेमी हाई स्पीड ट्रेनें दौड़ने लगेंगी। दरअसल, नवंबर तक कानपुर के भीमसेन से झांसी तक रेलवे लाइन के दोहरीकरण और विद्युतीकरण का काम पूरा हो जाएगा। झांसी के आगे पहले से ही लाइन इलेक्ट्रिक और दोहरी है। इससे 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनों को दौड़ाया जा सकेगा। 

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भीमसेन से झांसी की दूरी 206 किमी है। 173.44 किमी पर काम पूरा कर लिया गया है। बचा 31.95 किमी का काम नवंबर अंत तक पूरा हो जाएगा। इसके पूरा होते ही कानपुर से झांसी होते हुए मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की ट्रेनों को बढ़ाया जाएगा। कानपुर से मुंबई रूट के लिए यात्रियों की मांग अधिक होने के बाद भी सिंगल लाइन होने की वजह से ट्रेन नहीं बढ़ाई जाती हैं। एक ही लाइन पर अप-डाउन की ट्रेनों के चलने से औसत अधिकतम स्पीड 90-100 किमी प्रति घंटा ही रहती है। 

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2239.96 करोड़ रुपये से पूरा होगा काम
कानपुर से भीमसेन तक डबल रेलवे लाइन है। भीमसेन से झांसी तक सिंगल लाइन है। ऐसे में भीमसेन तक ट्रेनें आसानी से आती जाती हैं, लेकिन इसके आगे ट्रेनें फंसने लगती हैं। गुरुवार को भीमसेन से पामा स्टेशन तक 17.24 किमी के दोहरीकरण और विद्युतीकरण के रेल संरक्षा आयुक्त मोहम्मद लतीफ खान ने ट्रायल के बाद 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन को चलाने की अनुमति दे दी है। ऐसे में कानपुर सेंट्रल से पामा तक आने जाने में ट्रेनें नहीं फंसेंगी। 156.20 किमी का रेलवे ट्रैक पहले ही तैयार हो चुका था। यह पूरा काम 2239.96 करोड़ रुपये में हो कराया जा रहा है। 

अभी चल रही हैं 40 जोड़ी ट्रेनें
कानपुर से झांसी होते हुए मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के लिए 40 जोड़ी ट्रेनें चलती हैं। सिंगल रूट होने की वजह से इस रूट पर ट्रेेनों को नहीं बढ़ाया जा पा रहा है। इससे ट्रेनों की लेटलतीफी बढ़ेगी। हालांकि इस रूट पर ट्रेनों की मांग बहुत है। दक्षिण भारत की ट्रेनें भी झांसी होकर कानपुर सेंट्रल से जाती हैं। इस ट्रैक के दोहरीकरण का काम पूरा होने पर इन सभी शहरों के लिए ट्रेनें बढ़ा दी जाएंगी। अभी प्रयागराज से रीवा-सतना होकर महाराष्ट्र की ट्रेनें कानपुर-झांसी की अपेक्षा ज्यादा हैं। 

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कानपुर के भीमसेन से झांसी तक सिंगल ट्रैक होने से ट्रेनें लेट भी होती हैं और संख्या भी कम है। नवंबर के अंत या दिसंबर की शुरुआत में दोहरीकरण व विद्युतीकरण का काम पूरा हो जाएगा। इसके पूरा होने पर एमपी और महाराष्ट्र के शहरों के लिए ट्रेनें बढ़ेंगी। कानपुर से मुंबई के लिए यात्रियों का लोड अधिक है।  - मनोज कुमार, पीआरओ, झांसी मंडल

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