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खाने की थाली के लिहाज से तैयार होंगे मूंग सह उत्पाद, आईआईपीआर के शोध में शुरू होगा प्रोजेक्ट
Tue, 12 Feb 2019 01:39 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 12 Feb 2019 01:39 PM IST
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आईआईपीआर के पूर्व निदेशक डॉ. मसूद अली
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर स्थित भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (आईआईपीआर) में इंटरनेशनल मूंग शोध नेटवर्क के बैनर तले आयोजित कार्यशाला में कहा गया कि आम जन की थाली के लिहाज से मूंग के सह उत्पाद तैयार किए जाएं। इनमें पापड़, मसाले, बड़ा आदि शामिल होंगे। मार्केट की मांग के अनुरूप मूंग की प्रजातियों का विकास किया जाए। इसी आधार पर दलहन अनुसंधान संस्थान के विज्ञानी शोध प्रोजेक्ट शुरू करेंगे।
कार्यशाला का आयोजन आईआईपीआर के पूर्व निदेशक डॉ. मसूद अली की अध्यक्षता में हुआ। मसाला कारोबारियों से पूछा गया कि मूंग के सह उत्पाद में उन्हें किस प्रजाति की मूंग की अधिक जरूरत है। मूंग की जिस प्रजाति का स्वाद आम लोगों को अधिक पसंद है उसी पर नए शोध शुरू होंगे। किसानों से कहा गया कि वे फसल के उत्पादन के फूड प्रोसेसिंग का कार्य शुरू करें।
किसान, फूड संस्करण कारोबारी और विज्ञानी एक श्रंखला बना लें। सारे लोग मिलकर सह उत्पादों के कारोबार के लिए काम करें। इस मौके पर आईआईपीआर के निदेशक डॉ. एनपी सिंह, प्रो. डीपी सिंह, डॉ. टीएस बेंस, डॉ. संजीव गुप्ता, किसान, दाल मिलर, मसाला कारोबारी शामिल रहे।
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कार्यशाला का आयोजन आईआईपीआर के पूर्व निदेशक डॉ. मसूद अली की अध्यक्षता में हुआ। मसाला कारोबारियों से पूछा गया कि मूंग के सह उत्पाद में उन्हें किस प्रजाति की मूंग की अधिक जरूरत है। मूंग की जिस प्रजाति का स्वाद आम लोगों को अधिक पसंद है उसी पर नए शोध शुरू होंगे। किसानों से कहा गया कि वे फसल के उत्पादन के फूड प्रोसेसिंग का कार्य शुरू करें।
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किसान, फूड संस्करण कारोबारी और विज्ञानी एक श्रंखला बना लें। सारे लोग मिलकर सह उत्पादों के कारोबार के लिए काम करें। इस मौके पर आईआईपीआर के निदेशक डॉ. एनपी सिंह, प्रो. डीपी सिंह, डॉ. टीएस बेंस, डॉ. संजीव गुप्ता, किसान, दाल मिलर, मसाला कारोबारी शामिल रहे।
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