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भारत-चीन तनावः चीन की कंपनी से तोड़ा नाता, रद्द किए 25 लाख के आर्डर, कभी 80 फीसदी तक था आयात
Fri, 19 Jun 2020 12:28 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 19 Jun 2020 12:28 PM IST
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भारत-चीन कारोबार
- फोटो : Amar Ujala
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भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव की वजह से आम जनता चीन के उत्पादों के बहिष्कार की पक्षधर नहीं है, बल्कि कारोबारी भी चीन से दूरी बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। कानपुर में इसकी शुरुआत हो गई। शहर की मशीन निर्माता कंपनी किरन एक्सट्रयूजन ने नजीर पेश करते हुए गुरुवार को चीन की कंपनी से कारोबारी नाता तोड़ लिया।
उन्होंने पहली तिमाही में आयात होने वाले 25 लाख रुपये के आर्डर को रद्द कर दिया। रतन लाल नगर निवासी कारोबारी नितिन रोहरा की पनकी साइट-5 में कंपनी है। इनके यहां प्लास्टिक पाइप बनाने वाली और प्लास्टिक को रिसाइकिल करने वाली मशीनें बनती हैं।
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उन्होंने पहली तिमाही में आयात होने वाले 25 लाख रुपये के आर्डर को रद्द कर दिया। रतन लाल नगर निवासी कारोबारी नितिन रोहरा की पनकी साइट-5 में कंपनी है। इनके यहां प्लास्टिक पाइप बनाने वाली और प्लास्टिक को रिसाइकिल करने वाली मशीनें बनती हैं।
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इन मशीनों में इस्तेमाल होने वाले करीब 40 फीसदी उपकरण और कलपुर्जे चीन से आते थे। हर तीन महीने में इनकी खेप आती थी। प्रत्येक खेप में 20 से 30 लाख रुपये का माल होता था। यानी सालाना करीब एक करोड़ का माल आयात करते थे। कंपनी ने अगली तिमाही के आर्डर को रद्द कर दिया।
नितिन रोहरा बताते हैं कि चीन के सैनिकों की धोखेबाजी से वे आहत हैं। देश में बन रहे माहौल का समर्थन करने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया है। नितिन ने बताया कि जिन उपकरणों और कलपुर्जों का आर्डर रद्द किया है, उनकी आपूर्ति के लिए वे अब ताइवान, थाईलैंड और आस्ट्रिया की कंपनियों से संपर्क करेंगे। लागत में थोड़ा फर्क पड़ेगा, लेकिन उसकी भरपाई के लिए और तरीके निकालेंगे। आगे चलकर सभी उपकरण और कलपुर्जे खुद ही बनाने का प्रयास करेंगे।
कभी 80 फीसदी तक था आयात
नवीन बताते हैं कि कभी उनकी कंपनी चीन से 80 फीसदी तक उपकरण आयात करती थी। धीरे-धीरे इसे कम करते हुए 40 फीसदी तक ले आए हैं। स्थानीय उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए सरकार से थोड़ी मदद मिल जाए तो कानपुर में मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की पूरी गुंजाइश है। भविष्य में वे मेक इन इंडिया की ही राह पर आगे बढ़ेंगे।
नितिन रोहरा बताते हैं कि चीन के सैनिकों की धोखेबाजी से वे आहत हैं। देश में बन रहे माहौल का समर्थन करने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया है। नितिन ने बताया कि जिन उपकरणों और कलपुर्जों का आर्डर रद्द किया है, उनकी आपूर्ति के लिए वे अब ताइवान, थाईलैंड और आस्ट्रिया की कंपनियों से संपर्क करेंगे। लागत में थोड़ा फर्क पड़ेगा, लेकिन उसकी भरपाई के लिए और तरीके निकालेंगे। आगे चलकर सभी उपकरण और कलपुर्जे खुद ही बनाने का प्रयास करेंगे।
कभी 80 फीसदी तक था आयात
नवीन बताते हैं कि कभी उनकी कंपनी चीन से 80 फीसदी तक उपकरण आयात करती थी। धीरे-धीरे इसे कम करते हुए 40 फीसदी तक ले आए हैं। स्थानीय उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए सरकार से थोड़ी मदद मिल जाए तो कानपुर में मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की पूरी गुंजाइश है। भविष्य में वे मेक इन इंडिया की ही राह पर आगे बढ़ेंगे।