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कानपुर: न्यूरॉन हॉस्पिटल पर आयकर छापा, अस्पताल-पैथोलॉजी और दो मकानों में टीम ने की जांच, एक करोड़ रुपये बरामद

Fri, 04 Mar 2022 11:33 AM IST
प्रशांत कुमार अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर। Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 04 Mar 2022 11:33 AM IST
सार

सूत्रों ने बताया कि इनके स्वरूपनगर स्थित आवास से एक करोड़ रुपये की नकदी बरामद हुई है। हालांकि, डॉ. राघवेंद्र का दावा है कि यह रकम बहीखाते में दर्ज है। इसलिए आयकर टीम ने अभी रकम सीज नहीं की है और दस्तावेजों से मिलान किया जा रहा है।

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Income tax raid on Neuron Hospital in Kanpur hospital pathology and team investigated in two houses
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala

विस्तार

आयकर विभाग की टीम ने गुरुवार को डबल पुलिया स्थित न्यूरॉन हॉस्पिटल के संचालक डॉ. राघवेंद्र गुप्ता और उनकी पत्नी डॉ. स्वप्निल गुप्ता के चार ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। इस दौरान उनके पास से एक करोड़ रुपये की नकदी बरामद की गई। जिसकी जांच की जा रही है। आयकर विभाग ने यह कार्रवाई हॉस्पिटल में मरीजों से ज्यादा वसूली के बाद भी लिखतपढ़त में बिलिंग कम दिखाने के पुख्ता सुबूत मिलने के बाद की। डॉ. राघवेंद्र जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो साइंस विभाग में सर्जन और एसोसिएट प्रोफेसर भी हैं।

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प्रधान आयकर निदेशक जांच के निर्देश पर आयकर अफसरों ने काकादेव डबल पुलिया स्थित न्यूरॉन हॉस्पिटल, हैलट के सामने स्वरूपनगर में स्थित यूनीक पैथोलॉजी, स्वरूपनगर और हरबंस मोहाल स्थित आवास पर छापा मारा। न्यूरॉन हास्पिटल में डॉ. स्वप्निल के साथ डॉ. राघवेंद्र गुप्ता भी बैठते हैं। सूत्रों के अनुसार, हॉस्पिटल पर अप्रत्यक्ष रूप से इन्हीं दोनों का मालिकाना हक है। बताया गया कि कुछ समय पहले ही हॉस्पिटल को 16 करोड़ में खरीदा गया था। डॉ. राघवेंद्र वरिष्ठ न्यूरो सर्जन हैं। मेडिकल कॉलेज के न्यूरो साइंस विभाग में विभागाध्यक्ष के बाद सबसे वरिष्ठ यही हैं।
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बहीखाते दुरुस्त नहीं, लेनदेन भी गड़बड़

आयकर अफसरों की जांच में अस्पताल के बहीखाते, इनवाइस और खाते दुरुस्त नहीं मिले हैं। नकदी कहां से आ रही है और कहां जा रही है, इसके बीच के पर्चे गायब हैं। सूत्रों ने बताया कि छापे का आधार भी यही था। लगातार जानकारी मिल रही थी कि हॉस्पिटल में बिलिंग बहुत कम की जा रही है, जबकि मरीजों से रुपये ज्यादा वसूले जा रहे हैं। बताया गया कि डॉ. स्वप्निल गुप्ता पहले हैलट में संविदा पर काम करती थीं। बाद में नियमित हो गई थीं। इनकी पैथोलॉजी में कोरोना काल में हुई कमाई का ब्योरा खंगाला गया।

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