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आयकर अधिकारी के शव का मामला: ममीफाइड हो गई थी बॉडी, परिजन गंगाजल से पोछते थे, जानिए क्यों नहीं आ रही थी बदबू

Sat, 24 Sep 2022 08:44 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sat, 24 Sep 2022 08:44 AM IST
सार

रावतपुर थाना क्षेत्र के कृष्णापुरी रोशन नगर में डेढ़ साल से आयकर अधिकारी की लाश घर पर रखने के मामले ने सबको हैरान कर दिया है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच में कई खुलासे हुए हैं।

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Income Tax Officer's dead body case, The body was mummified
आयकर अधिकारी के शव का मामला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में रोशन नगर निवासी विमलेश सोनकर का शव डेढ़ साल में ममीफाइड हो गया था। वहीं, परिजन उनकी धड़कन चलने का दावा करते हुए गंगाजल से पोछते रहे। मांस सूख गया था और हड्डियां अकड़ गई थीं। यह खुलासा शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की जांच में हुआ। जांच कमेटी ने ईसीजी जांच के बाद शव पुलिस को सौंप दिया। जल्द से जल्द निस्तारित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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ऐसे हुआ मामले का खुलासा
विमलेश सोनकर इनकम टैक्स विभाग में एओ के पद पर कार्यरत थे। पिछले साल अप्रैल से ड्यूटी पर न जाने की वजह से विभाग के अधिकारियों ने परिजनों से उनके बीमार होने का प्रमाणपत्र मांगा। पत्नी ने उन्हें जवाब दिया कि घर में ही उनका इलाज चल रहा है। उनका मेडिकल सार्टिफिकेट नहीं बन पा रहा है।
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इस पर इनकम टैक्स विभाग ने सीएमओ को पत्र लिखा। सीएमओ ने इसकी जांच के लिए डिप्टी सीएमओ डॉ. ओपी गौतम के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की। कमेटी में कल्याणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. अविनाश यादव, डॉ. आसिफ आदि को शामिल कया।

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यह कमेटी शुक्रवार को रोशन नगर स्थित विमलेश के मकान में जांच करने पहुंची। तब उनका शव कमरे में एक पलंग में पड़ा था। ममीफाइड (ममी जैसा) हो गया था, जबकि परिजनों का कहना था कि डेढ़ साल वह इसी हालत में हैं। दावा किया कि उनकी धड़कन चल रही है।

परिजनों ने उनके शरीर पर कोई भी केमिकल लगाने से इनकार कर दिया। बताया कि शरीर में कहीं से पानी निकलने लगता था या गंदगी नजर आती थी तो गंगाजल से साफ कर देते थे। शुरुआत में कुछ महीने बदबू आई, लेकिन कुछ महीने बाद बदबू आना बंद हो गया था।

परिजनों ने जांच कमेटी से पोस्टमार्टम के लिए ले जाने के बजाय उनकी धड़कन चलने की जांच कराने का आग्रह किया। 108 नंबर एम्बुलेंस से उन्हें हैलट भेजा गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसकी ईसीजी कराने के बाद मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

आयकर विभाग ने सीएमओ को पत्र भेजा कि विमलेश की पत्नी लिखकर भेजती है कि उनका मेडिकल सार्टिफिकेट नहीं बन रहा। इस पर सीएमओ ने जांच कमेटी गठित की थी। जांच में पता चला कि विमलेश को पिछले साल अप्रैल में डबल निमोनिया होने के बाद शहर के कई अस्पतालों, लखनऊ के अस्पताल और बाद में बिरहाना रोड स्थित मोती हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां उनकी मृत्यु हो गई थी। अस्पताल ने मृत्यु प्रमाणपत्र भी दिया था। शव पुलिस को सौंप दिया है। एटॉप्सी जांच (मृत्यु का कारण जानने के लिए शव का परीक्षण) कराने, शव निस्तारित करने के लिए कहा है।  -डॉ. ओपी गौतम, जांच अधिकारी, डिप्टी सीएमओ

शव ममीफाइड हो गया था। दूर से बदबू महसूस नहीं हो रही थी। अस्पताल से शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।  -डॉ. आरके मौर्या, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, हैलट

 

मृत्यु के बाद शव से कुछ दिन सड़न होती है। बदबू भी आई होगी। शव की सफाई करते रहने से बैक्टीरिया, वायरस हटते रहे होंगे। कुछ दिन बाद मांस सूख जाता है, तब बदबू नहीं आती।  -डॉ. सुनिति पांडेय, विभागाध्यक्ष, एनाटॉमी विभाग, जीएसवीएम मेडिकल काॅलेज

 

कभी-कभी लोग मौत स्वीकार नहीं कर पाते, ऐसा अत्यधिक लगाव की वजह से होता है। परिजन व्यक्ति की मौत को मानसिक रूप से स्वीकार नहीं कर पाते। इसे असामान्य शोक की स्थिति कहते हैं। अमूमन ऐसी स्थिति छह माह रहती है, लेकिन यह अवधि ज्यादा भी हो सकती है।  -डॉ. धनंजय चौधरी, विभागाध्यक्ष, मानसिक रोग विभाग, जीएसवीएम मेडिकल कालेज

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