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आइसोलेशन वार्ड में युवक की मौत से हड़कंप
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फतेहपुर। जिला अस्पताल के कोरोना आइसोलेशन वार्ड में भर्ती 26 वर्षीय युवक की शुक्रवार की देर रात मौत हो गई। युवक को खांसी और सांस फूलने की दिक्कत थी। कोरोना की जांच के लिए सैंपल शुक्रवार को प्रयागराज भेजा गय था, जिसकी रिपोर्ट शनिवार की देर रात निगेटिव आने पर स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली है।
असोथर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी युवक दो फरवरी को मुंबई से लौटा था। परिजनों ने बताया कि युवक को खांसी, सांस फूलने और बीच-बीच में बुखार आ जाने की शिकायत थी। पहले गांव के ही झोलाछाप से इलाज चल रहा था। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर 16 अप्रैल को जिला अस्पताल के कोरोना आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया
गया। बताया गया कि इससे पहले उसे दो दिन जनरल वार्ड में भी रखा गया। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि करने से डॉक्टर बचते रहे। कोरोना जैसे मिलते-जुलते लक्षण के चलते 17 अप्रैल को जांच के लिए दिन में इसका सैंपल प्रयागराज भेजा गया और रात में लगभग ढाई बजे युवक की मौत हो गई। आननफानन में युवक के शव को सैनिटाइज कर शव वाहन से गांव भेज दिया गया।
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उधर, मृतक युवक के परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने दस मिनट में तीन इंजेक्शन लगा दिए, इससे उनके मरीज की मौत हो गई। इलाज कर रहे डॉ. आरएन गुप्ता का कहना है कि युवक टीबी से भी पीड़ित था। सांस फूलने की दिक्कत बढ़ने की वजह से इंजेक्शन लगाए गए। कोरोना टेस्ट के लिए शुक्रवार को सैंपल भेजा गया, जिसकी रिपोर्ट शनिवार की देर रात निगेटिव आई है। परिजनों का आरोप सही नहीं है। उधर, गांव में परिजनों ने शनिवार को युवक का अंतिम संस्कार कर दिया।
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असोथर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी युवक दो फरवरी को मुंबई से लौटा था। परिजनों ने बताया कि युवक को खांसी, सांस फूलने और बीच-बीच में बुखार आ जाने की शिकायत थी। पहले गांव के ही झोलाछाप से इलाज चल रहा था। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर 16 अप्रैल को जिला अस्पताल के कोरोना आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया
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गया। बताया गया कि इससे पहले उसे दो दिन जनरल वार्ड में भी रखा गया। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि करने से डॉक्टर बचते रहे। कोरोना जैसे मिलते-जुलते लक्षण के चलते 17 अप्रैल को जांच के लिए दिन में इसका सैंपल प्रयागराज भेजा गया और रात में लगभग ढाई बजे युवक की मौत हो गई। आननफानन में युवक के शव को सैनिटाइज कर शव वाहन से गांव भेज दिया गया।
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उधर, मृतक युवक के परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने दस मिनट में तीन इंजेक्शन लगा दिए, इससे उनके मरीज की मौत हो गई। इलाज कर रहे डॉ. आरएन गुप्ता का कहना है कि युवक टीबी से भी पीड़ित था। सांस फूलने की दिक्कत बढ़ने की वजह से इंजेक्शन लगाए गए। कोरोना टेस्ट के लिए शुक्रवार को सैंपल भेजा गया, जिसकी रिपोर्ट शनिवार की देर रात निगेटिव आई है। परिजनों का आरोप सही नहीं है। उधर, गांव में परिजनों ने शनिवार को युवक का अंतिम संस्कार कर दिया।