{"_id":"ab2162dd2b97d20e0820624c839021d6","slug":"in-b-ed-with-50-percent-will-also-m-ed-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीएड में 50 प्रतिशत अंक वाले भी कर सकेंगे एमएड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीएड में 50 प्रतिशत अंक वाले भी कर सकेंगे एमएड
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sat, 03 Jan 2015 02:14 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजूकेशन (एनसीटीई) ने एमएड में एडमिशन की अर्हता बदल दी है। साथ ही बीटीसी और बीएलएड करने वालों को भी एमएड की पढ़ाई का विकल्प दे दिया है। अभी तक बीएड करने वाले ही एमएड की पढ़ाई कर पाते थे।
नई व्यवस्था शैक्षिक सत्र 2015-16 से लागू हो जाएगी। दूसरी तरफ बीएड कॉलेजों में पढ़ाने के लिए शिक्षकों की अर्हता भी कम कर दी गई है। अब एमए एजूकेशन के साथ बीएड करने वाला कोई भी व्यक्ति बीएड कॉलेजों में पढ़ा सकता है।
इसके लिए पीएचडी, नेट या एमएड होने की अनिवार्यता नहीं रह गई है। बीएड, बीटीसी और बीएलएड में 50 फीसदी मार्क्स पाने वाले स्टूडेंट्स अब एमएड में एडमिशन ले सकेंगे। शैक्षिक सत्र 2014-15 में यही अर्हता 55 फीसदी थी।
विज्ञापन
यानी शैक्षिक अर्हता में इस बार 5 फीसदी मार्क्स की छूट दे दी गई है। एससी, एसटी स्टूडेंट्स को मार्क्स की न्यूनतम अर्हता में पांच फीसदी की छूट मिलेगी। ग्रेजुएशन के बाद बीएड, बीटीसी में एडमिशन मिलता है।
बीएलएड में एडमिशन की अर्हता इंटरमीडिएट निर्धारित है। एनसीटीई ने कहा है कि बीएड, बीटीसी, बीएलएड सहित टीचर्स एजूकेशन के अन्य कोर्स पर यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) का नियम नहीं लागू होगा। सभी कोर्स का संचालन एनसीटीई की नियमावली से होगा।
इस संबंध में एनसीटीई ने नोटिस भी जारी किया है। क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी डॉ. इंदु सक्सेना ने बताया कि एनसीटीई की नई नियमावली आ गई है। शासन स्तर से इसपर काम चल रहा है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद नई नियमावली से मान्यता, संबद्धता, एडमिशन और पठन-पाठन का काम शुरू करा दिया जाएगा।
बीएड की फीस पांच फीसदी बढ़ी
शासन की फीस निर्धारण कमेटी और उच्च शिक्षा विभाग ने बीएड की सालाना फीस में पांच फीसदी (2562 रुपये) की बढ़ोत्तरी पर मुहर लगा दी है। बढ़ी हुई फीस सत्र 2015-16 से लागू होगी। इस आशय का औपचारिक आदेश जल्द ही जारी किया जाएगा।
बढ़ी फीस से बीएड 2015-16 में प्रवेश लेने वाले 1.31 लाख स्टूडेंट्स प्रभावित होंगे। बीएड की फीस तीन साल बाद बढ़ाई जाती है। इसके तहत ही फीस निर्धारण कमेटी ने प्रदेश के 1000 से ज्यादा बीएड कॉलेजों के सुविधा-संसाधन, खर्च का अध्ययन किया। अब पांच फीसदी फीस बढ़ाने का फैसला कर लिया गया है।
क्षेत्रीय उच्च शिक्षा विभाग के सूत्रों ने बताया कि बीएड की सालाना फीस 51250 रुपये निर्धारित थी। यह फीस सालाना बढ़ाकर 53812 रुपये कर दी गई है। इस हिसाब से देखा जाए तो प्रति स्टूडेंट पर सालाना 2562 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
यूनिवर्सिटी का दायरा प्रदेश के 15 जिलों में फैला है। बीएड के 170 कॉलेजों में करीब 20 हजार स्टूडेंट्स पढ़ते हैं।
विज्ञापन
नई व्यवस्था शैक्षिक सत्र 2015-16 से लागू हो जाएगी। दूसरी तरफ बीएड कॉलेजों में पढ़ाने के लिए शिक्षकों की अर्हता भी कम कर दी गई है। अब एमए एजूकेशन के साथ बीएड करने वाला कोई भी व्यक्ति बीएड कॉलेजों में पढ़ा सकता है।
विज्ञापन
इसके लिए पीएचडी, नेट या एमएड होने की अनिवार्यता नहीं रह गई है। बीएड, बीटीसी और बीएलएड में 50 फीसदी मार्क्स पाने वाले स्टूडेंट्स अब एमएड में एडमिशन ले सकेंगे। शैक्षिक सत्र 2014-15 में यही अर्हता 55 फीसदी थी।
विज्ञापन
यानी शैक्षिक अर्हता में इस बार 5 फीसदी मार्क्स की छूट दे दी गई है। एससी, एसटी स्टूडेंट्स को मार्क्स की न्यूनतम अर्हता में पांच फीसदी की छूट मिलेगी। ग्रेजुएशन के बाद बीएड, बीटीसी में एडमिशन मिलता है।
बीएलएड में एडमिशन की अर्हता इंटरमीडिएट निर्धारित है। एनसीटीई ने कहा है कि बीएड, बीटीसी, बीएलएड सहित टीचर्स एजूकेशन के अन्य कोर्स पर यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) का नियम नहीं लागू होगा। सभी कोर्स का संचालन एनसीटीई की नियमावली से होगा।
इस संबंध में एनसीटीई ने नोटिस भी जारी किया है। क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी डॉ. इंदु सक्सेना ने बताया कि एनसीटीई की नई नियमावली आ गई है। शासन स्तर से इसपर काम चल रहा है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद नई नियमावली से मान्यता, संबद्धता, एडमिशन और पठन-पाठन का काम शुरू करा दिया जाएगा।
बीएड की फीस पांच फीसदी बढ़ी
शासन की फीस निर्धारण कमेटी और उच्च शिक्षा विभाग ने बीएड की सालाना फीस में पांच फीसदी (2562 रुपये) की बढ़ोत्तरी पर मुहर लगा दी है। बढ़ी हुई फीस सत्र 2015-16 से लागू होगी। इस आशय का औपचारिक आदेश जल्द ही जारी किया जाएगा।
बढ़ी फीस से बीएड 2015-16 में प्रवेश लेने वाले 1.31 लाख स्टूडेंट्स प्रभावित होंगे। बीएड की फीस तीन साल बाद बढ़ाई जाती है। इसके तहत ही फीस निर्धारण कमेटी ने प्रदेश के 1000 से ज्यादा बीएड कॉलेजों के सुविधा-संसाधन, खर्च का अध्ययन किया। अब पांच फीसदी फीस बढ़ाने का फैसला कर लिया गया है।
क्षेत्रीय उच्च शिक्षा विभाग के सूत्रों ने बताया कि बीएड की सालाना फीस 51250 रुपये निर्धारित थी। यह फीस सालाना बढ़ाकर 53812 रुपये कर दी गई है। इस हिसाब से देखा जाए तो प्रति स्टूडेंट पर सालाना 2562 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
यूनिवर्सिटी का दायरा प्रदेश के 15 जिलों में फैला है। बीएड के 170 कॉलेजों में करीब 20 हजार स्टूडेंट्स पढ़ते हैं।