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Kanpur News: 2029 में चंद्रमा पर पानी के लिए करेंगे खोदाई, 2040 में भेजे जाएंगे भारतीय

Wed, 10 Dec 2025 02:02 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 10 Dec 2025 02:02 AM IST
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In 2029, we will dig for water on the Moon, and Indians will be sent there in 2040.
इसरो के पूर्व अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश सरकार के मुख्य अंतरिक्ष सलाहकार डॉ. एस सोमनाथ। - फोटो : संवाद
कानपुर। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भेजे गए चंद्रयान-3 की रिपोर्ट के आधार पर 2029 में चंद्रयान-5 को भेजने की तैयारी है। जापान के साथ मिलकर होने वाले इस मिशन में चांद पर खोदाई की जाएगी जिससे पता चलेगा कि पानी कितनी गहराई पर है। चंद्रयान-5 को उसी जगह भेजा जाएगा जहां चंद्रयान-3 गया था। यहीं नहीं 2035 तक भारत के पास अपना स्पेस स्टेशन और 2040 तक चंद्रमा पर पहला भारतीय कदम रखेगा। यह बात इसरो के पूर्व अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश सरकार के मुख्य अंतरिक्ष सलाहकार डॉ. एस सोमनाथ ने कही।
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वह मर्चेंट चैंबर में आयोजित यदुपति सिंहानिया मेमोरियल लेक्चर के दूसरे संस्करण में स्पेस टेक्नोलॉजी, एप्लीकेशन और बिजनेस अपॉर्चुनिटीज पर अपना वक्तव्य दे रहे थे। डॉ. सोमनाथ ने कहा कि इसरो ने अपनी पॉलिसी में बदलाव किया है। अब कोई भी निजी कंपनी स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में स्टार्टअप या उद्यम कर सकती है। इस दौरान उन्होंने इसरो के कई प्रोजेक्ट्स के बारे में जानकारी दी। डॉ. सोमनाथ ने कहा कि चंद्रयान तीन से मिले सैंपल के आधार पर पानी, जियोलॉजी, बदले वातावरण को लेकर कई रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए गए हैं।
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बताया कि 2028 में चंद्रयान-4 को भेजने की तैयारी है ताकि कुछ और सैंपल को एकत्र किया जा सके। नासा और इसरो साथ मिलकर निसार मिशन पर काम करेंगे। निसार पृथ्वी की सतह, बर्फीले हिस्सों, महासागर की ग्लोबल मैपिंग करेगा। एस बैंड और एल बैंड रडार की मदद से पृथ्वी की सतह में छोटे छोटे बदलाव, समुद्र में होने वाली हलचल, खेती, जंगल, जमीन की दरारों के बारे में जानकारी देगा। इसके अलावा फ्रांस और भारत ने मिलकर तृष्णा प्रोजेक्ट को लांच किया है।
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देश से भी निकल सकती है एलन मस्क जैसी शख्सियत, आइडिया की जरूरत
डॉ. सोमनाथ ने कहा कि एलन मस्क भी हमारी तरह ही इंसान हैं। केवल एक आइडिया, इनोवेशन ही आपको ऊंचाइयों पर ले जा सकता है। केवल पैसे से कुछ नहीं होता। देश से भी एलन मस्क जैसी शख्सियत निकल सकती है। अब तो इसरो ने भी अपने दरवाजे निजी कंपनियों, स्टार्टअप के लिए खोल दिए हैं। लोग आएं और स्पेस से जुड़े क्षेत्र में काम करें। चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग के बाद काफी बदलाव आया है। चंद्रयान तीन की मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, एल्गोरिदम सब कुछ स्वदेशी था।

इससे पहले यदुपति सिंहानिया मेमोरियल लेक्चर के दूसरे संस्करण का शुभारंभ डॉ. एस सोमनाथ, जीएचआईएमआर व मर्चेंट चेंबर ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अभिषेक सिंहानिया, जेके इंटरप्राइजेज के संयुक्त प्रबंध निदेशक पार्थो पी. कर ने की। डॉ. सोमनाथ के वक्तव्य से पहले यदुपति सिंहानिया के जीवन पर आधारित वृत्तचित्र का चित्रण किया गया। उन्होंने लोगों से कहा कि घूमने के प्लान में रॉकेट लांचिंग को देखना भी शामिल करें। आपको गर्व की अनुभूति होगी। उन्होंने कहा कि ग्लोबल स्पेस मार्केट में भारत का योगदान केवल दो फीसदी ही है। इसे बढ़ाने की जरूरत है।


स्पेस टेक्नोलॉजी में काफी काम की जरूरत है। लोग नए आइडिया के साथ आ रहे हैं। उदाहरण दिया कि कैसे एक युवा ने नौकरी छोड़कर स्पेस को क्लीन करने का स्टार्टअप शुरू किया जो अपने आप में अनूठा है। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने अंतरिक्ष अभियान में एक हजार से 12 हजार किलोग्राम तक वजन भेजने की स्वदेशी तकनीक विकसित की है। इसरो ने अभी तक 432 सैटेलाइट लांच किए हैं जो अन्य देशों की अपेक्षा काफी कम है। इस दौरान कई लोगों ने सवाल भी पूछे। कार्यक्रम का समापन जेके सीमेंट के उप प्रबंध निदेशक एके सरावगी ने किया।
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