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अवैध शराब का शैतानः कार्रवाई और सच्चाई की ये खबर, अभी भी जारी मौत का व्यापार...

Sun, 10 Mar 2019 10:55 AM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 10 Mar 2019 10:55 AM IST
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illegal liquor trading continues in kanpur
फाइल फोटो
कानपुर में आबकारी विभाग के नकारेपन से मिलावटी शराब से मौत पर मौत हो रहीं हैं। पिछले साल मई में रूरा और सचेंडी में 18 लोगों की मौत और 35 लोग बीमार हुए थे। इसके बाद भी आबकारी विभाग नहीं चेता। कच्ची शराब बनाने के लिए बदनाम रहीं कुछ बस्तियों में छापे मारकर औपचारिकता होती रही। इसीलिए मिलावटखोरों के हौसले बुलंद रहे और फिर दो लोगों की मौत मिलावटी शराब पीने से मौत हो गई।
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19 मई को सचेंडी और रूरा (कानपुर देहात) में देशी शराब ठेके से ली गई शराब पीने से 18 लोग मर गए थे। इसके बाद जांच पर जांच और कार्रवाई का दौर चला था। शासन से जिला आबकारी अधिकारी समेत कई अफसरों और कर्मचारियों को निलंबित किया था। चेतावनी दी गई थी कि अब जहरीली या मिलावटी शराब से किसी की मौत हुई तो आबकारी विभाग के अफसर छोड़े नहीं जाएंगे।
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इसके बाद आबकारी विभाग कल्याणपुर की सीटीएस और अन्य जिले की कच्ची शराब के लिए बदनाम बस्तियों पर छापे मारकर कार्रवाई की औपचारिकता करता रहा। इसी का नतीजा रहा कि घाटमपुर के भीतरगांव ब्लॉक में फिर मिलावटी शराब मौतों का कारण बन गई।
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कमाई के चक्कर में जान की कीमत नहीं
शराब का कारोबार से जुड़े एक शख्स का कहना है कि आबकारी अफसर और कर्मचारियों का ध्यान काम से ज्यादा सेटिंग-गेटिंग में रहता है। आरोप लगते रहते हैं कि क्षेत्रीय से जिला अफसर तक सरकारी शराब की दुकानों व ठेकों से महीना तय है। दुकान की बिक्री के हिसाब से रकम तय है। यही वजह है कि आबकारी अफसर शराब, बीयर और देशी शराब की दुकानों में चेकिंग के नाम पर केवल औपचारिकता निभाते हैं। अफसर दुकान व ठेके का स्टॉक और रजिस्टर का मिलान भी अपने तरीके से करते हैं।

यहीं वजह है कि सचेंडी और रूरा के सरकारी ठेकों में नकली और गैर प्रांत की शराब बिक रही थी, लेकिन आबकारी अफसर इससे अनजान रहे। इसका खुलासा सचेंडी के दूल गांव के ठेके से मिली एक्सपायरी डेट और मिलावटी व नकली शराब की बरामदगी से हुआ। इसी क्षेत्र के बिनौर में महेश सिंह के ठेके से उत्तराखंड की शराब और एक्सपायरी डेट (मार्च 2018) की 30 पेटी माधुरी की 42 नंबर बैंच की शराब बरामद हुई थी। इसके अलावा माधुरी शराब के रैपर, बोतल के ढक्कन व अन्य सामान भी बरामद हुआ था। जिला आबकारी अधिकारी राजेश मिश्रा का कहना है कि समय-समय पर कच्ची और मिलावटी शराब के खिलाफ अभियान चलाया जाता है। विभाग पर सेटिंग-गेटिंग के आरोप निराधार हैं।

रेक्टीफाइड अल्कोहल मिलाने का खुलासा
यूपी एसटीएफ (स्पेशल टॉस्क फोर्स) ने खुलासा किया था कि मिलावटी शराब बनाने में एक तरह के केमिकल रेक्टीफाइड अल्कोहल मिलाया जाता है। एसटीएफ की स्थानीय इकाई ने 26 दिसंबर-2017 को सचेंडी इलाके में एक डीसीएम से सौ ड्रम रेक्टीफाइड अल्कोहल पकड़ा था। मौके से गन्नौर, सोनीपत के साहिल और इमरान को गिरफ्तार किया था। दोनों यूपी और बिहार में अवैध शराब आपूर्ति करते थे।

तब एसटीएफ ने माना था कि बरामद 55 हजार लीटर रेक्टीफाइड अल्कोहल से 16 हजार 500 लीटर शराब बनती है। फिर इसे नकली रैपर, होलोग्राम और ढक्कन लगाकर बोतल में पैक कर सरकारी दुकानों में सप्लाई किया जाएगा। बाबूपुरवा के ट्रांसपोर्टर नगर में एक ट्रांसपोर्टर के गोदाम में छापा मारकर एसटीएफ ने भारी मात्रा में अंग्रेजी, देशी शराब के रैपर, ढक्कन व नकली सामान बनाने में प्रयोग होने वाला अन्य सामान बरामद किया था। इस मामले में भी कई आरोपी फरार हैं। एसटीएफ ने नौबस्ता, चकेरी और कानपुर देहात से भी भारी मात्रा में रेक्टीफाइड अल्कोहल बरामद किया था।

शराब से मौत की मुख्य खबर के साथ

मिलावटी शराब से मौतों की जांच एडीएम स्तर के अधिकारी से कराई जाएगी। दोषी मिले आबकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। होली नजदीक है। इसलिए कच्ची और मिलावटी शराब का धंधा बढ़ने का अंदेशा है। इसके लिए आबकारी विभाग से ठोस कार्रवाई करने को कहा गया है।
- विजय विश्वास पंत, जिलाधिकारी
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