फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   illegal construction Ahead of the mariyampur square

मरियमपुर चौराहे के आगे कई निर्माण अवैध

Mon, 25 Jan 2016 01:56 AM IST
मनोज चौरसिया, कानपुर
मनोज चौरसिया, कानपुर Updated Mon, 25 Jan 2016 01:56 AM IST
विज्ञापन
illegal construction Ahead of the mariyampur square
केडीए और पुलिस की मिलीभगत से दो भूमाफिया ने मरियमपुर चौराहे से लेकर गुरुनानक कालेज रोड के दोनों तरफ मलिन बस्तियों की बेशकीमती जमीनें (लक्ष्मी रतन लैण्ड-ए और लक्ष्मी रतन लैंड-बी) अवैध रूप से बेच डालीं।
विज्ञापन


अरबों रुपये की इन जमीनों पर अवैध रूप से आलीशान शोरूम, रेस्टोरेंट, गेस्ट हाउस, माडल शॉप तक बन गए हैं। कमिश्नर के आदेश पर जिला प्रशासन ने जांच कराई तो यह खुलासा हुआ है। नियमानुसार घोषित मलिन बस्ती की जमीन बेची नहीं सकती और न ही वहां कारोबार हो सकता है। जिला प्रशासन ने कई अवैध दुकानदारों को पाबंद कर सीलिंग की कार्रवाई शुरू कर दी है।
विज्ञापन


कमिश्नर से किसी ने शिकायत की थी कि मरियमपुर चौराहे से लेकर गुरुनानक कालेज रोड के दोनों तरफ मलिन बस्ती लक्ष्मी रतन लैण्ड-ए और लक्ष्मी रतन लैण्ड-बी की अरबों रुपये की जमीन पर अवैध रूप से कब्जे करके शोरूम, रेस्टोरेंट, शराब की दुकानें, गेस्ट हाउस तक बन गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


कमिश्नर  ने डीएम को जांच के आदेश दिए। डीएम ने अपर नगर मजिस्ट्रेट (एसीएम) डीडी वर्मा से नवंबर में जांच कराई तो पता चला कि शिकायत सही है। मलिन बस्ती की जमीन पर काबिज बंसल हार्डवेयर, स्पाइसी चिकन कार्नर, चिकन एक्सप्रेस, टुंडे कबाब, मसन बिरयानी, गगन फास्टफूड के मालिकों से कब्जेदारी के बारे में पूछताछ की तो पता चला कि उन्होंने ये जमीन नीटू अरोड़ा उर्फ राकेश से किराए पर ली है, जिसका वे किराया देते हैं, पर किराए की रसीद नहीं मिलती। नीटू कबाड़ी मार्केट में रहता है।

एसीएम ने नीटू से पूछा तो उसने जमीन का मालिक होने का दावा किया पर मालिकाना हक के कोई कागज नहीं दिखा सका। न केडीए की रजिस्ट्री दिखाई और न ही लक्ष्मी रतन की तरफ से इस जमीन को बेचने का कोई प्रमाणपत्र दिखा सका।

प्लाट भी काटकर बेचे
एसीएम की जांच रिपोर्ट के अनुसार नीटू अरोड़ा और कबाड़ी मार्केट में रहने वाले उसके सहयोगी मुकेश भाटिया गैरकानूनी तरीके से उक्त जमीन को बेच रहे हैं। इन दोनों ने बिना किसी अधिकार के लक्ष्मी रतन लैंड-ए में गुरु तेग बहादुर हास्पिटल के बगल की गली में एक हजार वर्ग मीटर खाली जमीन पर 200 वर्ग गज के प्लाट काट कर बेचे, जिन पर तीन लोग निर्माण करा रहे थे, इन्हें रुकवाया गया।

लक्ष्मी रतन लैंड-बी में लिबर्टी शोरूम के सामने 400 वर्ग गज के प्लाट पर हो रहे निर्माण को रुकवाया गया। वहां लोगों ने बताया कि यह प्लाट नीटू अरोड़ा और मुकेश भाटिया ने बेचा है। कार्नर में स्थित लक्ष्मी रतन लैंड-बी का प्लाट 90 लाख रुपये में सुरजीत कपूर को बेचा गया, पर मौके पर सुरजीत नहीं मिले।


संपत्ति केडीए व मलिन बस्ती की
जांच रिपोर्ट के अनुसार ये सभी संपत्तियां केडीए की घोषित व अधिगृहित मलिन बस्ती की हैं। सिंह गार्डेन के नाम से जाने जाने वाले 900 वर्गगज के प्लाट और दिल्ली दरबार के बीच में कई शोरूम, गेस्ट हाउस बने हैं, जबकि ये दोनों केडीए के सक्षम प्राधिकारी की तरफ से उत्तर प्रदेश मलिन बस्ती (उन्नयन एवं निपातन) अधिनियम-1962 के तहत अधिगृहित एवं घोषित मलिन बस्ती हैं। केडीए के अलावा अन्य किसी को बेचने या कब्जा देने का अधिकार नहीं है। वहां अवैध रूप से बने होटल, गेस्ट हाउस, शोरूम, दुकानों आदि के मालिकों के पास भू-स्वामित्व नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed