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जानवरों की तस्करी और बर्ताव को जानेंगे आईआईटीयंस, आईआईटी कानपुर को मिली बड़ी जिम्मेदारी
Fri, 21 Feb 2020 05:40 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 21 Feb 2020 05:40 PM IST
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आईआईटी कानपुर
- फोटो : अमर उजाला
बॉर्डर पर होने वाली जानवरों और पेड़ों की तस्करी को रोकने और जानवरों के बर्ताव को जानने के लिए आईआईटी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की तकनीक पर काम कर रहा है। प्रदेश सरकार के बजट में वन्य जीव संरक्षण के लिए नई तकनीक के प्रयोग के लिए आईआईटी कानपुर को तकनीक पार्टनर बनाया है।
साथ ही दुधवा टाइगर रिजर्व में एम स्ट्राइप्स एप के माध्यम से स्मार्ट पेट्रोलिंग की गई है। जानवरों के व्यवहार को जानने, तस्करी रोकने के लिए आईआईटी के प्रोफेसर निश्चल की पीएचडी छात्रों की टीम एआई तकनीक पर काम कर रही है।
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साथ ही दुधवा टाइगर रिजर्व में एम स्ट्राइप्स एप के माध्यम से स्मार्ट पेट्रोलिंग की गई है। जानवरों के व्यवहार को जानने, तस्करी रोकने के लिए आईआईटी के प्रोफेसर निश्चल की पीएचडी छात्रों की टीम एआई तकनीक पर काम कर रही है।
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इसे कैमरे से जोड़कर जंगल में वन्य जीवों के बर्ताव को जाना जाएगा। इस कैमरे को गैस भरे गुब्बारे में फिट किया जाएगा और जंगल की निगरानी की जाएगी। हाल ही में शहर में सीएए के विरोध में भड़की हिंसा को रोकने लिया किया गया था।
क्षेत्रों की कांबिंग में काफी मददगार भी सिद्ध हुआ। जानवरों के व्यवहार और तस्करी के अलावा पेड़ों की ट्रैफिकिंग पर भी लगाम लगाई जाएगी। बार्डर के इलाकों या घने जंगलों वाले क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल किया जाएगा। अगर इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं है तो भी डेटा स्टोर होगा।
क्षेत्रों की कांबिंग में काफी मददगार भी सिद्ध हुआ। जानवरों के व्यवहार और तस्करी के अलावा पेड़ों की ट्रैफिकिंग पर भी लगाम लगाई जाएगी। बार्डर के इलाकों या घने जंगलों वाले क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल किया जाएगा। अगर इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं है तो भी डेटा स्टोर होगा।