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Kanpur News: हल्द्वानी को कचरा मुक्त बनाएगा आईआईटी
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कानपुर। उत्तराखंड का हल्द्वानी शहर अब आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर कचरा मुक्त बनने की दिशा में कदम उठा रहा है। इसके तहत शहर के जैविक कचरे को उपयोगी खाद में बदला जाएगा। इससे शहर साफ-सुथरा होने के साथ-साथ किसानों को सस्ती और गुणवत्तायुक्त खाद भी उपलब्ध होगी। इस कार्य की जिम्मेदारी आईआईटी के स्टार्टअप इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर (एसआईआईसी) से जुड़े स्टार्टअप एलसीबी फर्टिलाइजर को सौंपी गई है। हल्द्वानी नगर निगम ने इसके लिए 10 वर्ष का समझौता किया है और 150 टन प्रतिदिन क्षमता वाला प्लांट स्थापित किया है।
नगर निगम ने शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के उद्देश्य से एलसीबी फर्टिलाइजर और आरती ग्रुप के साथ करार किया है। स्टार्टअप के फाउंडर अक्षय श्रीवास्तव ने बताया कि शहर में निकलने वाले जैविक कचरे को आधुनिक तकनीक से प्रोसेस कर फसल-विशिष्ट उर्वरक तैयार किया जाएगा। वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से कचरे का विघटन कर उसे उपयोगी खाद में बदला जाएगा, जिससे कचरा प्रबंधन की समस्या भी सुलझेगी और किसानों को बेहतर उर्वरक मिलेगा। यह परियोजना कूड़े के ढेर और उससे होने वाले प्रदूषण को रोकने में नगर निगम की मदद करेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। यह मॉडल सफल होने पर पूरे प्रदेश में लागू किया जा सकता है।
आईआईटी की लैब में तैयार हुआ विशेष जीवाणु
फाउंडर अक्षय श्रीवास्तव ने बताया कि आईआईटी कानपुर की लैब में तीन माह तक परीक्षण कर विशेष जीवाणु विकसित किए गए। इस प्रक्रिया की जांच राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) से भी कराई गई। मोलासिस और अन्य कच्चे पदार्थों के साथ इन जीवाणुओं की मदद से जैविक खाद तैयार की जाएगी। प्लांट में किए गए ट्रायल में खाद की गुणवत्ता बेहतर पाई गई, जिसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्व 12 प्रतिशत से अधिक पाए गए।
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नगर निगम ने शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के उद्देश्य से एलसीबी फर्टिलाइजर और आरती ग्रुप के साथ करार किया है। स्टार्टअप के फाउंडर अक्षय श्रीवास्तव ने बताया कि शहर में निकलने वाले जैविक कचरे को आधुनिक तकनीक से प्रोसेस कर फसल-विशिष्ट उर्वरक तैयार किया जाएगा। वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से कचरे का विघटन कर उसे उपयोगी खाद में बदला जाएगा, जिससे कचरा प्रबंधन की समस्या भी सुलझेगी और किसानों को बेहतर उर्वरक मिलेगा। यह परियोजना कूड़े के ढेर और उससे होने वाले प्रदूषण को रोकने में नगर निगम की मदद करेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। यह मॉडल सफल होने पर पूरे प्रदेश में लागू किया जा सकता है।
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आईआईटी की लैब में तैयार हुआ विशेष जीवाणु
फाउंडर अक्षय श्रीवास्तव ने बताया कि आईआईटी कानपुर की लैब में तीन माह तक परीक्षण कर विशेष जीवाणु विकसित किए गए। इस प्रक्रिया की जांच राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) से भी कराई गई। मोलासिस और अन्य कच्चे पदार्थों के साथ इन जीवाणुओं की मदद से जैविक खाद तैयार की जाएगी। प्लांट में किए गए ट्रायल में खाद की गुणवत्ता बेहतर पाई गई, जिसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्व 12 प्रतिशत से अधिक पाए गए।
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