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Kanpur News: साइबर अपराध को सुलझाने में कमिश्नरी पुलिस की मदद करेगा आईआईटी
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कानपुर। तेजी से पांव पसार रहे डिजिटल फ्राॅड को रोकने के लिए अब कानपुर पुलिस की मदद आईआईटी कानपुर करेगा। केस को तकनीक रूप से सुलझाने के लिए पुलिस संस्थान का सहयोग लेगी। साथ ही पुलिस को भी प्रशिक्षित करेगी। टीम डेटा एनालिसिस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा जैसी तकनीक की मदद से खुलासा करेगी। इसके लिए कानपुर पुलिस ने आईआईटी कानपुर की सी3आई हब के साथ एक समझौता किया है। डीसीपी श्रवण कुमार सिंह और सी3आई हब की सीओओ डॉ. तनिमा हाजरा ने समझौते पर हस्ताक्षर किया।
सी3आई हब के चीफ स्ट्रेटजी ऑफिसर डॉ. आनंद हांडा ने संस्थान कानपुर पुलिस को साइबर फ्रॉड रोकने और उससे जुड़ी जानकारी के लिए कुछ टूल, तकनीक व सिस्टम भी मुहैया कराएंगे। कानपुर पुलिस साइबर और फॉरेंसिक से जुड़े अपराध की घटनाओं को सी3आई हब के विशेषज्ञों के साथ साझा करेंगे। उन्होंने कहा कि अब मोबाइल टूट जाने या डाटा डिलीट होने पर भी इसकी रिकवरी की जाएगी। विशेषज्ञों ने बताया कि एक केस साइबर फ्रॉड का है जिसमें लेनदेन को रिकवर करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, एक केस फॉरेंसिक से जुड़ा है जिसमें मोबाइल का डेटा रिकवर करने के साथ एनालिसिस कर अपराधियों के बारे में भी जानेंगे। इस मौके पर एडीसीपी अंजलि विश्वकर्मा भी मौजूद रहीं।
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सी3आई हब के चीफ स्ट्रेटजी ऑफिसर डॉ. आनंद हांडा ने संस्थान कानपुर पुलिस को साइबर फ्रॉड रोकने और उससे जुड़ी जानकारी के लिए कुछ टूल, तकनीक व सिस्टम भी मुहैया कराएंगे। कानपुर पुलिस साइबर और फॉरेंसिक से जुड़े अपराध की घटनाओं को सी3आई हब के विशेषज्ञों के साथ साझा करेंगे। उन्होंने कहा कि अब मोबाइल टूट जाने या डाटा डिलीट होने पर भी इसकी रिकवरी की जाएगी। विशेषज्ञों ने बताया कि एक केस साइबर फ्रॉड का है जिसमें लेनदेन को रिकवर करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, एक केस फॉरेंसिक से जुड़ा है जिसमें मोबाइल का डेटा रिकवर करने के साथ एनालिसिस कर अपराधियों के बारे में भी जानेंगे। इस मौके पर एडीसीपी अंजलि विश्वकर्मा भी मौजूद रहीं।
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