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आईआईटी कानपुर में होगा एटॉमिक एनर्जी पर काम

Thu, 25 Feb 2016 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर Updated Thu, 25 Feb 2016 01:26 AM IST
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IIT Kanpur will work on atomic energy

आईआईटी कानपुर में बन रहे नेशनल एयरोसेल फैसिलिटी सेंटर में अप्रैल 2017 से एटॉमिक एनर्जी प्लांट की सेफ्टी और कंप्यूटर कोड डेवलपमेंट सिस्टम को और बेहतर बनाने का काम शुरू होगा।

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सेंटर में एक छोटा रियेक्टर लगाया जाएगा जिसमें आईआईटी के सिविल और न्यूक्लियर विभाग भाभा रिसर्च सेंटर के साथ मिल कर तकनीक पर काम करेंगे। इसके लिए फ्रांस आईआईटी कानपुर को एक ऐसी
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सिस्टम तकनीकी भी दे रहा है जिससे रियेक्टर एक्सीडेंट कम से कम करने के लिए बेहतर सेफ्टी सिस्टम तैयार किया जा सकेगा। यह जानकारी भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर से आईं प्रिंसिपल को-आर्डिनेटर डॉ. बीके शप्रा और मनीष जोशी ने दी।
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भाभा सेंटर की ओर से आईआईटी के इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही डॉ. शप्रा और सहयोगी सुनील गंजू आईआईटी कानपुर में डिपार्टमेंट आफ एटॉमिक एनर्जी और आईआईटी सिविल डिपार्टमेंट की ओर से चल रही तीन दिवसीय कार्यशाला में हिस्सा लेने आए हैं।

कार्यशाला के दूसरे दिन बुधवार को स्पेन से आए वैज्ञानिक लुइस हेरांस, जर्मनी के संजीव गुप्ता और गुटेन वेबर, फ्रांस से डिडियर जैकमिन और जापान से अकीहिडे हिडाका ने अपने-अपने देशों में एटॉमिक एनर्जी प्लांट की सेफ्टी के लिए तैयार की जा रही तकनीक और कंप्यूटर कोड सिस्टम पर चर्चा की।

फैसिलिटी सेंटर को 10 करोड़, छह करेंगे पीएचडी
फैसिलिटी सेंटर के लिए बोर्ड ऑफ रिसर्च इन न्यूक्लियर साइंस और भाभा ने लगभग 10 करोड़ की फंडिंग की है। इससे मशीनरी और संसाधनों की खरीददारी की जा रही है। बिल्डिंग भी एक साल में बन कर तैयार हो जाएगी।


सेंटर में आईआईटी के छह पीएचडी स्टूडेंटों को शोध कराने की तैयारी भी की जा रही है। सेंटर पर सिविल डिपार्टमेंट के डॉ. एसएन त्रिपाठी और न्यूक्लियर डिपार्टमेंट की डॉ. शिखा प्रसाद काम करेंगे।

बन रहीं कैंसर की दवाइयां
डॉ. शप्रा ने बताया कि एटॉमिक एनर्जी प्लांट देश में बिजली उत्पादन में भी सहयोग कर रहे हैं। देश को कुल बिजली की डिमांड का 3 फीसदी हिस्सा इससे मिल रहा है। इसे क्लीन एनर्जी-ग्रीन एनर्जी कहा जाता है।


छह नए प्लांट बनने से व्यवस्था और बेहतर होगी। उन्होंने बताया कि मुंबई में लगे रिसर्च रियेक्टर की रेडियो फ्रिक्वेंसी से कैंसर की और कई दवाइयां बन रही हैं।

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