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सुनामी जैसे बड़े खतरे के आने से पहले ही आईआईटी कर देगा अलर्ट, 8000 वर्षों के सुनामी डाटा पर किया शोध
Sat, 21 Mar 2020 06:33 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 21 Mar 2020 06:33 PM IST
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आईआईटी कानपुर
- फोटो : अमर उजाला
सुनामी जैसे बड़े खतरे के आने से पहले ही आईआईटी अलर्ट कर देगा। आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक डॉ. जावेद मलिक ने शोध कर डाटा रिपोर्ट तैयार की है। इससे सुनामी से होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं। डॉ. जावेद भारत सरकार के अर्थ साइंस मंत्रालय के साथ काम कर रहे हैं।
आईआईटी के वैज्ञानिक प्रो. जावेद मलिक और उनकी टीम ने पिछले 8000 वर्षों के सुनामी रिकॉर्ड और बड़े भूकंप के पुनरावृत्ति को देखते हुए शोध किया है। उन्होंने बताया कि 26 दिसंबर 2004 को सुमात्रा-अंडमान में 9.3 तीव्रता का भूकंप आया और एक विशाल सुनामी आई, जिसने 2.5 लाख लोगों की जान ले ली।
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आईआईटी के वैज्ञानिक प्रो. जावेद मलिक और उनकी टीम ने पिछले 8000 वर्षों के सुनामी रिकॉर्ड और बड़े भूकंप के पुनरावृत्ति को देखते हुए शोध किया है। उन्होंने बताया कि 26 दिसंबर 2004 को सुमात्रा-अंडमान में 9.3 तीव्रता का भूकंप आया और एक विशाल सुनामी आई, जिसने 2.5 लाख लोगों की जान ले ली।
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उन्होंने वर्ष 1679, 1762, 1881 1941 में भूकंप और सुनामी के साक्ष्य मिले। इन तथ्यों का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट तैयार की है। वर्ष 2005 से अंडमान द्वीप समूह में प्राचीन सुनामी के लिए खोज करना शुरू किया। जिसमें अंडमान द्वीप के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित बडबालु समुद्र तट से पिछले 8000 वर्षों में कम से कम सात सुनामी के सबूतों का पता लगाया।
हिंद महासागर से सटे समुद्र तटों को प्रभावित किया है। शोधकर्ताओं को इस तरह के सबूत मिले जिनसे पता चलता है कि इन सुनामी को सुमात्रा-अंडमान क्षेत्र में होने वाले बड़े भूकंपों द्वारा ट्रिगर किया गया था।
स्थानिक संरचनाओं के आधार पर, अनाज के आकार, विभिन्न तलछट इकाइयों के बीच संपर्क, तलछट कोर और उथले गड्ढों में देखे गए सूक्ष्म जीवाश्म सामग्री, 19 तलछट इकाइयों की पहचान की गई थी। आईआईटी कानपुर के इस शोध में सुनामी में डाटा एकत्र करने से भारत को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
हिंद महासागर से सटे समुद्र तटों को प्रभावित किया है। शोधकर्ताओं को इस तरह के सबूत मिले जिनसे पता चलता है कि इन सुनामी को सुमात्रा-अंडमान क्षेत्र में होने वाले बड़े भूकंपों द्वारा ट्रिगर किया गया था।
स्थानिक संरचनाओं के आधार पर, अनाज के आकार, विभिन्न तलछट इकाइयों के बीच संपर्क, तलछट कोर और उथले गड्ढों में देखे गए सूक्ष्म जीवाश्म सामग्री, 19 तलछट इकाइयों की पहचान की गई थी। आईआईटी कानपुर के इस शोध में सुनामी में डाटा एकत्र करने से भारत को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।