रोबोट हुआ बीमार: आईआईटी कानपुर ने गंगा प्रदूषण की जांच करने वाला रोबोट हटाया, आर्थिक तंगी से नहीं कर सकेगा काम
आईआईटी कानपुर का बनाया रोबोट गंगा स्वच्छता अभियान को सहारा देते-देते खुद बीमार हो गया है। इसको प्रदूषण की जांच करके मिनट-मिनट की रिपोर्ट सौंपने के लिए तैयार किया गया था।
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गंगा के प्रदूषण की निगरानी में लगा आईआईटी कानपुर का रोबोट अब आर्थिक तंगी का शिकार हो गया है। इसी वजह से आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने इसे अब गंगा से बाहर निकाल लिया है। फिलहाल रोबोट के दोबारा संचालन के लिए वैज्ञानिक आर्थिक मदद की बाट जोह रहे हैं। साथ ही तीन महीने पानी में रहने वाले इस रोबोट ने गंगा पर जो रिपोर्ट प्रस्तुत की है, उसको वैज्ञानिक संकलित कर रहे हैं।
आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने डिपार्टमेंट ऑफ साइंस की मदद से यह रोबोट तैयार किया था। इसको ऑपरेट करने में तीन महीने में करीब एक लाख रुपये का खर्च आता है। यह खर्च डीएसटी वहन करता है। डीएसटी की ओर से आर्थिक मदद न मिलने पर इस प्रोजेक्ट को फिलहाल के लिए रोक दिया गया है। हैरत की बात है कि करोड़ों रुपये का दान पाने वाली आईआईटी कानपुर की टीम 33 हजार रुपये महीने का खर्च उठाने में नाकाम रही।
आईआईटी कानपुर ने अपना यह रोबोट अक्तूबर अंत में बिठूर में लगाया था। जनवरी में इसे बाहर निकाल लिया गया। इसमें कई सेंसर लगे हैं, जो 7 पैरामीटर पर रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं।
रोबोट बनाने वाले संस्थान के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. बिशाख भट्टाचार्या ने दावा किया था कि पानी की जांच करने वाला रोबोट पहली बार भारत में बना है। बिठूर में मुख्य रोबोट लगाया गया था और अन्य रोबोट को जोड़ने की योजना थी, जो अभी धरातल पर आ गई है। प्रो. बिशाख ने बताया कि फिलहाल प्रोजेक्ट को रोका गया है। रोबोट को गंगा से बाहर निकाल लिया गया है।
रोबोट के कार्य
रोबोट को गंगा के पानी में विभिन्न केमिकल, बीओडी समेत अन्य कारकों की रिपोर्ट देनी होती है। साथ ही यह सौर ऊर्जा से चार्ज होता है। रोबोट में लगे सेंसर पानी में मिले बड़े मेटल व कणों को हटाकर पानी का डाटा उपलब्ध कराते हैं। ऐसे पानी का डाटा प्राप्त करना मुश्किल होता है।