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IIT कानपुर का शोध: हवा के दबाव में खुद घूमता है बैडमिंटन शटल, एयरोडायनामिक्स से खुला राज, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

Fri, 02 Oct 2026 08:57 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Fri, 02 Oct 2026 08:57 AM IST
सार

Kanpur News: आईआईटी कानपुर के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग ने बैडमिंटन शटलकॉक की उड़ान पर एक महत्वपूर्ण एयरोडायनामिक रिसर्च किया है। प्रोफेसर संजय मित्तल और छात्र मुकुल कुमार कंसारा के इस अध्ययन में सामने आया है कि शटलकॉक हवा के दबाव में खुद घूमती है, जिससे उसकी स्थिरता और दिशा बनी रहती है।

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IIT Kanpur Research Badminton shuttle spins on its own due to air pressure aerodynamics reveal the secret
आईआईटी कानपुर - फोटो : amar ujala

विस्तार

बैडमिंटन कोर्ट पर तेजी से उड़ने वाला शटल कॉक हवा में अपनी दिशा और स्थिरता कैसे बनाए रखता है। इसका जवाब अब एयरोडायनामिक्स अध्ययन के जरिये सामने आया है। आईआईटी कानपुर के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. संजय मित्तल और बीटेक-एमटेक छात्र मुकुल कुमार कंसारा ने बैडमिंटन शटल कॉक में होने वाले ऑटोरेशन (हवा में खुद घूमना) और उसके एयरोडायनामिक प्रभावों का अध्ययन किया है।

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शोध में सामने आया कि शटल का हवा में खुद घूमना (ऑटोरोटेशन) उसकी उड़ान को स्थिर रखने के साथ ही उस पर पड़ने वाले वायुदाब और उसकी संरचना में होने वाले बदलाव को प्रभावित करता है। अब इस अध्ययन की मदद से भविष्य में ऐसी शटल कॉक तैयार होगी, जो अधिक प्रहार और हवा के दबाव में अपनी स्थिरता बनाए रखे। इससे खेल के रोमांच को और बढ़ाया जा सकेगा।

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फेदर और सिंथेटिक शटक कॉक पर शोध
संस्थान के विंड टनल में टीम ने फेदर और सिंथेटिक नायलॉन के शटल कॉक पर नियंत्रित परिस्थितियों में शटल पर हवा का दबाव डाला। शोधकर्ताओं ने यह समझने का प्रयास किया कि अलग-अलग गति से बहने वाली हवा में शटल की संरचना किस तरह व्यवहार करती है। उसके खुद घूमने से उड़ान पर क्या प्रभाव पड़ता है। अध्ययन में पाया गया है कि शटल कॉक के स्कर्ट (कॉक का घेरा) का हवा के दबाव में मुड़ना और उसका घूमना एक-दूसरे से जुड़े हैं।

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वायुगतिकीय व्यवहार में आता है बदलाव
हवा की गति बढ़ने पर स्कर्ट के आकार और क्रॉस सेक्शन में बदलाव आता है। इसका सीधा असर शटल पर लगने वाले एयरोडायनामिक बल और ड्रैग पर पड़ता है। प्रो. मित्तल ने बताया कि शोध में शटल के ऑटोरोटेशन यानी हवा के प्रभाव से खुद घूमने की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया गया। शटल की बनावट ऐसी होती है कि हवा के संपर्क में आने पर वह घूमने लगती है। इस दौरान उसकी सतह पर हवा का दबाव और प्रतिरोध बदलता रहता है। शोध के अनुसार, शटल के घूमने और उसकी संरचना के लचीलेपन का उसकी उड़ान पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

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बिना ऑटोरेशन के अलग-अलग वायु गति पर जांचा
हवा की गति बढ़ने पर शटल की घूर्णन गति भी बढ़ सकती है, जिससे उसके वायुगतिकीय व्यवहार में बदलाव आता है। ऑटोरेशन के साथ और बिना ऑटोरेशन के अलग-अलग वायु गति पर जांचा गया। प्रयोगों में पाया गया कि सिंथेटिक शटल में अधिक संरचनात्मक विकृति होती है और एक निश्चित गति के बाद उसके स्कर्ट में बकलिंग (सिकुड़ना या मुड़ना) की स्थिति भी बन सकती है। वैज्ञानिकों ने कहा कि यह अध्ययन सिर्फ बैडमिंटन तक सीमित नहीं है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि हवा के दबाव में हल्की और लचीली संरचनाएं किस तरह व्यवहार करती हैं।

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