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IIT Kanpur: कृत्रिम हाथ बना पिच बैटल का विजेता बना लाइफ एंड लिंब, मिला 50 हजार रुपये का पुरस्कार
Sat, 16 Mar 2024 09:04 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 16 Mar 2024 09:04 PM IST
सार
आईआईटी में अभिव्यक्ति 2024 के स्टार्टअप शोकेस कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम के दौरान तीन स्टार्टअप कंपनी के प्रोडक्ट को मंच से लांच किया गया।
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अभिव्यक्ति 2024 का समापन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आईआईटी कानपुर के स्टार्टअप इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेल (एसआईआईसी) की ओर से आयोजित दो दिवसीय अभिव्यक्ति 2024 का समापन शनिवार को हो गया। इस दौरान तीन स्टार्टअप कंपनी के प्रोडक्ट को मंच से लांच किया गया। लाइफ एंड लिंब प्राइवेट लिमिटेड का आर्टिफिशियल हैंड, मेदांत्रिक मेडटेक का ऑक्सीसेंस और नाड़ी पल्स की एन पल्स को लांच किया गया है। ये तीनों ही आईआईटी कानपुर से इंक्यूबेटेड हैं।
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अभिव्यक्ति में स्टार्टअप कंपनी के लिए आयोजित पिच बैटल में लाइफ एंड लिंब को पहला पुरस्कार मिला। कृत्रिम हाथ बनाने वाले इस स्टार्टअप के फाउंडर को 50 हजार रुपये की धनराशि दी गई। एआईपीएल ने दूसरा और नाड़ी पल्स ने तीसरा पुरस्कार जीता। स्टार्टअप शोकेस कार्यक्रम में डिफेंस, सीएस या फिनटेक, क्लीनटेक, एआई, बायोटेक या एग्रीटेक, ड्रोन सीओई, आईओटी और सोशल इनोवेशन से जुड़े 70 से ज्यादा स्टार्टअप ने स्टॉल लगाए गए। इस मौके पर प्रो. अंकुश शर्मा और प्रो. अमिताभ बंदोपाध्याय आदि मौजूद रहे।
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मसल्स सेंसर से सिग्नल लेकर चलता है आर्टिफिशियल हैंड
आईआईटी कानपुर से 2018 में एमएस करने वाले निशांत अग्रवाल की कंपनी लाइफ एंड लिंब के आर्टिफिशियल हैंड बाॅयो क्लैप्स बनाया है। दुर्घटना में हाथ गंवाने वाले व्यक्तियों के लिए यह वरदान है। यह हैंड मायोइलेक्ट्रिक टेक पर काम करता है जो कि मसल्स सेंसर से सिग्नल लेकर हाथ और अंगुलियों का मूवमेंट कराता है। यह मशीन लर्निंग एल्गोरिदम के तहत सेंसर पर काम करता है। इसकी कीमत एक लाख से लेकर पांच लाख तक की है।
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सेकेंडों में पता चलेगी ऑक्सीजन की शुद्धता
आईआईटी के एसआईआईसी से इंक्यूबेटेड मेदांत्रिक मेडटेक ने ऑक्सीसेंस को लांच किया है। कंपनी के फाउंडर परीक्षित हुड्डा और बलिया के प्रियरंजन आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र भी रहे हैं। 25 हजार कीमत की इस डिवाइस को ऑक्सीजन सिलिंडर, लाइन या प्लांट में ऑक्सीजन फ्लो के पास लगाने पर ऑक्सीजन की शुद्धता का पता लगाया जा सकता है।
60 सेकेंड में पता चल जाएगी आपकी सेहत
काजल श्रीवास्तव की कंपनी नाड़ी प्लस प्राइवेट लिमिटेड ने एन पल्स को लांच किया है। यह एक ऐसा रिस्ड बैंड है जो कि हाथ में बांधने पर 60 सेकेंड में शरीर के अनुसार वात, पित्त और कफ की मात्रा बता देता है। यह सारा डाटा मोबाइल एप पर आएगा। बीमारी के अलावा आपकी सेहत के लिए सही डाइट और योगा की जानकारी देगा। इसकी कीमत 15 हजार है।
पराली और खरपतवार से बनेंगे डिस्पोजेबल
आईआईटी बीएचयू से इंक्यूबेटेड स्टार्टअप वसुंधरा के स्टार्टअप बॉयोफाइबर की मदद से अब थर्माकोल और प्लास्टिक के डिस्पोजेबल से राहत मिलेगी। फाउंडर प्रीति सिंह ने पराली और खरपतवार की मदद से न केवल डिस्पोजेबल बल्कि कार्डबोर्ड और पैकेजिंग प्लास्टिक भी तैयार किया है। किया है। इन डिस्पोजेबेल से पानी की भी बचत होगी। लकड़ी के डिस्पोजेबल बनाने में 70 फीसदी अधिक पानी का इस्तेमाल होता है। पराली से बनने वाले डिस्पोजेबल की कीमत भी अन्य के मुकाबले 40 फीसदी तक कम होगी।
आईआईटी के एसआईआईसी से इंक्यूबेटेड मेदांत्रिक मेडटेक ने ऑक्सीसेंस को लांच किया है। कंपनी के फाउंडर परीक्षित हुड्डा और बलिया के प्रियरंजन आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र भी रहे हैं। 25 हजार कीमत की इस डिवाइस को ऑक्सीजन सिलिंडर, लाइन या प्लांट में ऑक्सीजन फ्लो के पास लगाने पर ऑक्सीजन की शुद्धता का पता लगाया जा सकता है।
60 सेकेंड में पता चल जाएगी आपकी सेहत
काजल श्रीवास्तव की कंपनी नाड़ी प्लस प्राइवेट लिमिटेड ने एन पल्स को लांच किया है। यह एक ऐसा रिस्ड बैंड है जो कि हाथ में बांधने पर 60 सेकेंड में शरीर के अनुसार वात, पित्त और कफ की मात्रा बता देता है। यह सारा डाटा मोबाइल एप पर आएगा। बीमारी के अलावा आपकी सेहत के लिए सही डाइट और योगा की जानकारी देगा। इसकी कीमत 15 हजार है।
पराली और खरपतवार से बनेंगे डिस्पोजेबल
आईआईटी बीएचयू से इंक्यूबेटेड स्टार्टअप वसुंधरा के स्टार्टअप बॉयोफाइबर की मदद से अब थर्माकोल और प्लास्टिक के डिस्पोजेबल से राहत मिलेगी। फाउंडर प्रीति सिंह ने पराली और खरपतवार की मदद से न केवल डिस्पोजेबल बल्कि कार्डबोर्ड और पैकेजिंग प्लास्टिक भी तैयार किया है। किया है। इन डिस्पोजेबेल से पानी की भी बचत होगी। लकड़ी के डिस्पोजेबल बनाने में 70 फीसदी अधिक पानी का इस्तेमाल होता है। पराली से बनने वाले डिस्पोजेबल की कीमत भी अन्य के मुकाबले 40 फीसदी तक कम होगी।