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आईआईटी का ‘ड्रोन’ परीक्षण में ही क्रैश
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sat, 28 Mar 2015 03:07 AM IST
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आईआईटी कानपुर की एयर ट्रिप पर शुक्रवार को परीक्षण के लिए उड़ान भरने वाले अनमैंड एयर व्हीकल (यूएवी) में से फिक्स विंग यूएवी ‘ड्राेन’ क्रैश हो गया। नीचे आते समय संतुलन बिगड़ने पर वह गिर गया। हालांकि इन यूएवी की अमेरिकी ‘ड्रोन’ से तुलना करने वाला आईआईटी प्रशासन इसे सामान्य घटना बता रहा है।
आईआईटी प्रशासन का दावा है कि इन यूएवी की मदद से सीमा की निगरानी की जा सकती है। इसमें नाइट विजन कैमरा लगा है, जो अंधेरे में फोटो खींचकर भेज सकता है। इसमें लगा सेंसर घुसपैठ और तस्करी रोकने में मददगार साबित हो सकता है। भविष्य में यूएवी का इस्तेमाल सर्च ऑपरेशन के लिए अमेरिकी ‘ड्रोन’ की तरह किया जा सकेगा।
आईआईटी कानपुर के एयर स्ट्रिप पर डॉयरेक्टर प्रो. इंद्रनील मन्ना, डिप्टी डॉयरेक्टर प्रो. एके चतुर्वेदी और प्रो. एके घोष की मौजूदगी में रेडियो कंट्रोल्ड यूएवी के फिक्स विंग, फ्लैपिंग विंग और क्वाड्रोटर ने उड़ान भरी। एक घंटे तक उड़ान भरने वाले यूएवी प्रति सेकेंड 8-10 मीटर की दूरी तय करते हैं। इनका वजन एक किलोग्राम है।
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पीएचडी स्कॉलर जयदीप भौमिक ने बताया कि आईआईटियन प्रभु गोपाल फाउंडेशन ने जो प्रोजेक्ट दिया था, उससे यूएवी के तीन मॉडल बनाए गए हैं। फ्लैपिंग विंग चिड़िया के आकार का है, जो किसी भी सूरत में उड़ान भर सकता है। क्वाड्रोटर छत पर से उड़ान भरने में सक्षम है। इसकी मदद से घर में घुसे आतंकियों को ढूंढा जा सकता है।
डायरेक्टर ने बताया कि चिड़िया के आकार वाले फ्लैपिंग विंग को आटोनॉमस का रूप दिया जा रहा है। यह काम पूरा हुआ तो यूएवी का फ्लैपिंग विंग अमेरिकी ‘ड्रोन’ की तरह काम करेगा। डिप्टी डॉयरेक्टर ने कहा कि आईआईटी देश का पहला शैक्षिक संस्थान है, जिसने मानव रहित वाहन बनाने में सफलता हासिल की है।
शुक्रवार को एयर स्ट्रिप पर डेमोस्ट्रेशन करके इसकी क्षमता का नए सिरे से आकलन किया गया। जल्द ही इसे अपग्रेड करने का काम शुरू होगा।
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आईआईटी प्रशासन का दावा है कि इन यूएवी की मदद से सीमा की निगरानी की जा सकती है। इसमें नाइट विजन कैमरा लगा है, जो अंधेरे में फोटो खींचकर भेज सकता है। इसमें लगा सेंसर घुसपैठ और तस्करी रोकने में मददगार साबित हो सकता है। भविष्य में यूएवी का इस्तेमाल सर्च ऑपरेशन के लिए अमेरिकी ‘ड्रोन’ की तरह किया जा सकेगा।
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आईआईटी कानपुर के एयर स्ट्रिप पर डॉयरेक्टर प्रो. इंद्रनील मन्ना, डिप्टी डॉयरेक्टर प्रो. एके चतुर्वेदी और प्रो. एके घोष की मौजूदगी में रेडियो कंट्रोल्ड यूएवी के फिक्स विंग, फ्लैपिंग विंग और क्वाड्रोटर ने उड़ान भरी। एक घंटे तक उड़ान भरने वाले यूएवी प्रति सेकेंड 8-10 मीटर की दूरी तय करते हैं। इनका वजन एक किलोग्राम है।
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पीएचडी स्कॉलर जयदीप भौमिक ने बताया कि आईआईटियन प्रभु गोपाल फाउंडेशन ने जो प्रोजेक्ट दिया था, उससे यूएवी के तीन मॉडल बनाए गए हैं। फ्लैपिंग विंग चिड़िया के आकार का है, जो किसी भी सूरत में उड़ान भर सकता है। क्वाड्रोटर छत पर से उड़ान भरने में सक्षम है। इसकी मदद से घर में घुसे आतंकियों को ढूंढा जा सकता है।
डायरेक्टर ने बताया कि चिड़िया के आकार वाले फ्लैपिंग विंग को आटोनॉमस का रूप दिया जा रहा है। यह काम पूरा हुआ तो यूएवी का फ्लैपिंग विंग अमेरिकी ‘ड्रोन’ की तरह काम करेगा। डिप्टी डॉयरेक्टर ने कहा कि आईआईटी देश का पहला शैक्षिक संस्थान है, जिसने मानव रहित वाहन बनाने में सफलता हासिल की है।
शुक्रवार को एयर स्ट्रिप पर डेमोस्ट्रेशन करके इसकी क्षमता का नए सिरे से आकलन किया गया। जल्द ही इसे अपग्रेड करने का काम शुरू होगा।