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भूकंप का केंद्र पता लगाने में जुटा आईआईटी कानपुर, हिमालय के उत्तरी क्षेत्रों में अब तक बने 14 जीपीएस स्टेशन

Mon, 08 Jun 2020 03:52 PM IST
शिखा पांडेय शैली भल्ला, अमर उजाला, कानपुर
शैली भल्ला, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 08 Jun 2020 03:52 PM IST
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IIT kanpur engaged in tracking the earthquake
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : गूगल
कानपुर आईआईटी ने भूकंप का केंद्र पता लगाने की कवायद शुरू कर दी है। इसी क्रम में धरती की हलचल की जानकारी के लिए हिमालय के उत्तरी क्षेत्र में 14 जीपीएस स्टेशन बनाए जा चुके हैं। छह और बनाए जाने हैं पर लॉकडाउन की वजह से काम रुका हुआ है।
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आईआईटी के अर्थ साइंस विभाग के प्रोफेसर जावेद एन मलिक और उनकी टीम इतिहास और अवशेषों के आधार पर भूकंप का सर्वे कर रही है। प्रो. मलिक ने बताया कि पता लगाया जा रहा है कि धरती कितनी अपनी जगह से खिसकी है, किस जगह पर ज्यादा दबाव पड़ रहा है। किन स्थानों पर भूकंप आने की संभावना अधिक है।
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किसी जगह पर भूकंप आने की संभावना ज्यादा है। जीपीएस सिस्टम से इन चीजों का पता लगाने में आसानी होगी। 14 स्टेशनों की रिपोर्ट मार्च में एकत्र करनी थी पर लॉकडाउन की वजह से काम अटका है। चंडीगढ़ से लेकर शिमला और कांगड़ा से लेकर पठानकोट तक के क्षेत्र में स्टेशन लगाए गए हैं।
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उत्तराखंड में आना है ज्यादा तीव्रता का भूकंप
प्रो. जावेद का दावा है कि उत्तराखंड में अधिक तीव्रता (7.5 से लेकर 8 रिएक्टर स्केल) के भूकंप का खतरा मंडरा रहा है। इस भूकंप से झटका कानपुर में भी महसूस होगा। बताया कि अभी तीव्रता का आकलन तो कर सकते हैं पर समय का आकलन नहीं कर सकते। बताया कि दिल्ली में लगातार आ रहे भूकंप से कानपुर को कोई खतरा नहीं है। प्रो. जावेद ने कहा कि धरती के अंदर घर्षण होता है, इस वजह से झटके लग रहे। 
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