{"_id":"5d3602868ebc3e6cd405ff17","slug":"iit-kanpur-celebrate-after-chandrayaan-2-launch","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"चंद्रयान-2 लांच होते ही झूम उठा आईआईटी, प्रो. आशीष दत्ता-प्रो. केएस वेंकटेश ने बताया कैसे चलेगा रोवर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंद्रयान-2 लांच होते ही झूम उठा आईआईटी, प्रो. आशीष दत्ता-प्रो. केएस वेंकटेश ने बताया कैसे चलेगा रोवर
Tue, 23 Jul 2019 12:30 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 23 Jul 2019 12:30 AM IST
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आईआईटी कानपुर
चंद्रयान-2 लांच होते ही पूरे देश के साथ आईआईटी में खुशी की लहर दौड़ गई। सभी एक-दूसरे को बधाई देने लगे। चंद्रयान-2 के रोवर के मोशन प्लानिंग सिस्टम को आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है।
आईआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. आशीष दत्ता ने बताया कि चंद्रमा पर साफ्ट लैंडिंग के समय ही असली परीक्षा होगी। सोमवार दोपहर 2.43 बजे। यह पल पूरे देश के लिए यादगार हो गया, जब चंद्रयान-2 को लांच हुआ।
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आईआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. आशीष दत्ता ने बताया कि चंद्रमा पर साफ्ट लैंडिंग के समय ही असली परीक्षा होगी। सोमवार दोपहर 2.43 बजे। यह पल पूरे देश के लिए यादगार हो गया, जब चंद्रयान-2 को लांच हुआ।
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इस सफलता पर पूरे आईआईटी की प्रसन्नता का ठिकाना न रहा। चंद्रयान-2 में मुख्य रूप से तीन मॉड्यूल हैं, आर्बिटल, लैंडर और रोवर। लूनर रोवर के मोशनल प्लानिंग सिस्टम को आईआईटी के वैज्ञानिक प्रो. आशीष दत्ता और प्रो. केएस वेंकटेश ने दो साल की कड़ी मेहनत से तैयार किया है।
प्रो. दत्ता ने बताया कि 15 जुलाई को चंद्रयान-2 लांच होना था। किसी कारणवश ऐसा न हो सका। सोमवार को चंद्रयान-2 की सफल लांचिंग की गई। इससे पूरा देश खुश है। करीब दस साल की मशक्कत के बाद यह दिन आया है।
प्रो. दत्ता ने बताया कि 15 जुलाई को चंद्रयान-2 लांच होना था। किसी कारणवश ऐसा न हो सका। सोमवार को चंद्रयान-2 की सफल लांचिंग की गई। इससे पूरा देश खुश है। करीब दस साल की मशक्कत के बाद यह दिन आया है।
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कैसे चलेगा रोवर
आईआईटी का तैयार सॉफ्टवेयर यह तय करेगा कि रोवर को कब कैसे मूव करना है। क्या-क्या करना है। रोवर का प्रोटोटाइप आईआईटी में है, इसके माध्यम से सॉफ्टवेयर की सफलता का आंकलन किया गया है। इसमें छह ड्राइव मोटर और चार स्टीयरिंग मोटर हैं। लाइट बेस्ड मैप जनरेशन का काम भी आईआईटी ने किया है। यह बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। साथ ही सुरक्षित, स्थाई और कम से कम ऊर्जा का उपयोग इसे चलाने में होगा।
क्या काम करेगा
इसके माध्यम से लूनर टोपोग्राफी (आकार-प्रकार), मिनरोलॉजी, एलीमेंटल एबंडेंस और पानी के बारे में जानकारी करेगा। यदि सामान्य भाषा में कहा जाए तो यह चंद्रमा के पहाड़ों, समान सतह, खनिज और पानी जैसी संभावनाओं को देखा जाएगा।
आईआईटी का तैयार सॉफ्टवेयर यह तय करेगा कि रोवर को कब कैसे मूव करना है। क्या-क्या करना है। रोवर का प्रोटोटाइप आईआईटी में है, इसके माध्यम से सॉफ्टवेयर की सफलता का आंकलन किया गया है। इसमें छह ड्राइव मोटर और चार स्टीयरिंग मोटर हैं। लाइट बेस्ड मैप जनरेशन का काम भी आईआईटी ने किया है। यह बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। साथ ही सुरक्षित, स्थाई और कम से कम ऊर्जा का उपयोग इसे चलाने में होगा।
क्या काम करेगा
इसके माध्यम से लूनर टोपोग्राफी (आकार-प्रकार), मिनरोलॉजी, एलीमेंटल एबंडेंस और पानी के बारे में जानकारी करेगा। यदि सामान्य भाषा में कहा जाए तो यह चंद्रमा के पहाड़ों, समान सतह, खनिज और पानी जैसी संभावनाओं को देखा जाएगा।