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Kanpur News: दिमाग की तरंगों में छिपे तनाव पर शोध कर रहा आईआईटी
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कानपुर। आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक तनाव और दिमाग के बीच के संबंध को समझने के लिए गहन शोध कर रहे हैं। इस अध्ययन का मुख्य केंद्र बिंदु यह है कि तनाव मस्तिष्क के कामकाज को किस प्रकार प्रभावित करता है। इसके लिए वे मस्तिष्क की अल्फा वेव्स का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं।
आईआईटी कानपुर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर तुषार संधन इस शोध का नेतृत्व कर रहे हैं। शोध का एक प्रमुख उद्देश्य यह जानना है कि विभिन्न व्यक्ति तनाव पर अलग-अलग प्रतिक्रिया क्यों देते हैं।
वैज्ञानिक यह भी समझ रहे हैं कि तनाव का असर ध्यान और कार्यशील स्मृति जैसी संज्ञानात्मक क्षमताओं पर कैसे पड़ता है। जोखिम-निर्णय जैसी महत्वपूर्ण क्षमताओं पर तनाव के प्रभाव का भी विश्लेषण किया जा रहा है। शोध में इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (ईईजी) जैसी गैर-आक्रामक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यह तकनीक दिमाग की गतिविधियों को सटीक रूप से मापने में सहायक है। इस डेटा के आधार पर स्वचालित मॉडल विकसित करने की योजना बनाई गई है। ये मॉडल तनाव के विभिन्न स्तरों को पहचानने में सक्षम होंगे। इसमें व्यक्ति की असहायता, नियंत्रण की कमी और चिंता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को भी शामिल किया जा रहा है।
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वैज्ञानिकों के अनुसार, अल्फा वेव्स की खोज लगभग 100 साल पहले हुई थी। ये वेव्स आमतौर पर 8-12 हर्ट्ज की आवृत्ति पर कार्य करती हैं। अल्फा वेव्स तब अधिक सक्रिय होती हैं जब व्यक्ति शांत या ध्यान की स्थिति में होता है। आंखें बंद करके आराम करने की स्थिति में भी इनकी सक्रियता बढ़ जाती है। हाल के अध्ययनों से पता चला है कि ‘बाइनॉरल बीट्स’ से अल्फा वेव्स को बढ़ाया जा सकता है।
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आईआईटी कानपुर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर तुषार संधन इस शोध का नेतृत्व कर रहे हैं। शोध का एक प्रमुख उद्देश्य यह जानना है कि विभिन्न व्यक्ति तनाव पर अलग-अलग प्रतिक्रिया क्यों देते हैं।
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वैज्ञानिक यह भी समझ रहे हैं कि तनाव का असर ध्यान और कार्यशील स्मृति जैसी संज्ञानात्मक क्षमताओं पर कैसे पड़ता है। जोखिम-निर्णय जैसी महत्वपूर्ण क्षमताओं पर तनाव के प्रभाव का भी विश्लेषण किया जा रहा है। शोध में इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (ईईजी) जैसी गैर-आक्रामक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यह तकनीक दिमाग की गतिविधियों को सटीक रूप से मापने में सहायक है। इस डेटा के आधार पर स्वचालित मॉडल विकसित करने की योजना बनाई गई है। ये मॉडल तनाव के विभिन्न स्तरों को पहचानने में सक्षम होंगे। इसमें व्यक्ति की असहायता, नियंत्रण की कमी और चिंता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को भी शामिल किया जा रहा है।
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वैज्ञानिकों के अनुसार, अल्फा वेव्स की खोज लगभग 100 साल पहले हुई थी। ये वेव्स आमतौर पर 8-12 हर्ट्ज की आवृत्ति पर कार्य करती हैं। अल्फा वेव्स तब अधिक सक्रिय होती हैं जब व्यक्ति शांत या ध्यान की स्थिति में होता है। आंखें बंद करके आराम करने की स्थिति में भी इनकी सक्रियता बढ़ जाती है। हाल के अध्ययनों से पता चला है कि ‘बाइनॉरल बीट्स’ से अल्फा वेव्स को बढ़ाया जा सकता है।