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आईआईटी का बजट घटा, एफडी तोड़कर दिया वेतन
अमर उजाला कानपुर
Updated Sun, 07 Jun 2015 02:29 AM IST
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सालाना बजट कम किए जाने से आईआईटी का आर्थिक संकट इतना विकराल हो गया है कि बांड और फिक्स डिपॉजिट (एफडी) तोड़कर शिक्षक और कर्मचारियों को वेतन देना पड़ा है। बजट कम होने से इंटरनेशनल हॉस्टल, क्लास रूम, लैब और लाइब्रेरी के निर्माण कार्य रोक दिए गए हैं। तमाम रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम नहीं हो पा रहे हैं। आईआईटी प्रशासन का कहना है कि बजट नहीं बढ़ा तो स्थिति और खराब होगी। शिक्षक, कर्मचारियों को प्रतिमाह वेतन तक देने में दिक्कत होगी। स्टूडेंट के पठन-पाठन और रिसर्च के काम भी बंद हो जाएंगे।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय और वित्त विभाग ने एक बार फिर आईआईटी के बजट पर कैंची चलाई है। 2013-14 में 280 करोड़ रुपये का बजट था, 2014-15 में इसे कम करके 205 करोड़ किया गया और अब 2015-16 में और कम करके 155 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है। इसमें से भी अभी सिर्फ 25 करोड़ रुपये मिले हैं। इतने धन से शिक्षक, कर्मचारियों का पूरे साल का वेतन तक नहीं दिया जा सकता है। इससे आईआईटी की आर्थिक सेहत खराब हो गई है। यही वजह है कि शिक्षक, कर्मचारियों के अप्रैल और मई माह के वेतन बांड, एफडी तोड़कर देने पड़े हैं। ये एफडी, बांड रिसर्च प्रोजेक्ट और एलमनाइ मीट से एकत्रित फंड से संबंधित हैं, जिसका इस्तेमाल रिसर्च प्रोजेक्ट, स्टूडेंट स्कालरशिप के लिए होता रहा है। अब इसे वेतन पर खर्च किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि यह पहला मौका है, जब आईआईटी में ऐसा आर्थिक संकट हुआ है। इस चिंता से मानव संसाधन विकास मंत्रालय और वित्त विभाग को अवगत कराया जा चुका है। इस मामले में आईआईटी का कोई भी प्रशासनिक अधिकारी आधिकारिक बयान देने को तैयार नहीं है।
हिसाब-किताब गड़बड़ाने से दिक्कत
बजट खर्च और उसके हिसाब-किताब में दिक्कत से आईआईटी की परेशानी बढ़ी है। पिछले दिनों फाइनेंस कमेटी की मीटिंग हुई थी, जिसमें अब तक मिले बजट और उसके खर्च का हिसाब मांगा गया था। हिसाब ठीक से नहीं मिल रहा है, इसी वजह से बजट में कटौती कर दी गई है।
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कानपुर-लखनऊ हेलीकॉप्टर सेवा भी बंद
आईआईटी से सीधे लखनऊ की हेलीकॉप्टर सेवा भी बंद हो गई है। पवन हंस का एक हेलीकॉप्टर कानपुर से लखनऊ चल रहा था। रोजाना सुबह 7:20 बजे हेलीकॉप्टर यहां से उड़ता था और 30 मिनट बाद लखनऊ पहुंच जाता था। अमौसी एयरपोर्ट से सुबह 8 बजे उड़ान भरकर सुबह 8:30 बजे कानपुर आ जाता था। एक ट्रिप शाम को लगती थी। हेलीकॉप्टर में पायलट सहित सात लोगों के बैठने की सुविधा थी। पहले प्रति व्यक्ति किराया 3800 रुपये था, जिसे बाद में बढ़ाकर 5000 रुपये कर दिया गया था। फाइनेंस कमेटी की आपत्ति के बाद यह सेवा बंद कर दी गई।
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय और वित्त विभाग ने एक बार फिर आईआईटी के बजट पर कैंची चलाई है। 2013-14 में 280 करोड़ रुपये का बजट था, 2014-15 में इसे कम करके 205 करोड़ किया गया और अब 2015-16 में और कम करके 155 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है। इसमें से भी अभी सिर्फ 25 करोड़ रुपये मिले हैं। इतने धन से शिक्षक, कर्मचारियों का पूरे साल का वेतन तक नहीं दिया जा सकता है। इससे आईआईटी की आर्थिक सेहत खराब हो गई है। यही वजह है कि शिक्षक, कर्मचारियों के अप्रैल और मई माह के वेतन बांड, एफडी तोड़कर देने पड़े हैं। ये एफडी, बांड रिसर्च प्रोजेक्ट और एलमनाइ मीट से एकत्रित फंड से संबंधित हैं, जिसका इस्तेमाल रिसर्च प्रोजेक्ट, स्टूडेंट स्कालरशिप के लिए होता रहा है। अब इसे वेतन पर खर्च किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि यह पहला मौका है, जब आईआईटी में ऐसा आर्थिक संकट हुआ है। इस चिंता से मानव संसाधन विकास मंत्रालय और वित्त विभाग को अवगत कराया जा चुका है। इस मामले में आईआईटी का कोई भी प्रशासनिक अधिकारी आधिकारिक बयान देने को तैयार नहीं है।
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हिसाब-किताब गड़बड़ाने से दिक्कत
बजट खर्च और उसके हिसाब-किताब में दिक्कत से आईआईटी की परेशानी बढ़ी है। पिछले दिनों फाइनेंस कमेटी की मीटिंग हुई थी, जिसमें अब तक मिले बजट और उसके खर्च का हिसाब मांगा गया था। हिसाब ठीक से नहीं मिल रहा है, इसी वजह से बजट में कटौती कर दी गई है।
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कानपुर-लखनऊ हेलीकॉप्टर सेवा भी बंद
आईआईटी से सीधे लखनऊ की हेलीकॉप्टर सेवा भी बंद हो गई है। पवन हंस का एक हेलीकॉप्टर कानपुर से लखनऊ चल रहा था। रोजाना सुबह 7:20 बजे हेलीकॉप्टर यहां से उड़ता था और 30 मिनट बाद लखनऊ पहुंच जाता था। अमौसी एयरपोर्ट से सुबह 8 बजे उड़ान भरकर सुबह 8:30 बजे कानपुर आ जाता था। एक ट्रिप शाम को लगती थी। हेलीकॉप्टर में पायलट सहित सात लोगों के बैठने की सुविधा थी। पहले प्रति व्यक्ति किराया 3800 रुपये था, जिसे बाद में बढ़ाकर 5000 रुपये कर दिया गया था। फाइनेंस कमेटी की आपत्ति के बाद यह सेवा बंद कर दी गई।