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अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं ः आईजी
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Tue, 30 Dec 2014 02:27 AM IST
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‘शिक्षा के माध्यम से ही महिलाओं की दशा सुधारी जा सकती है। अगर बेटियां स्वयं जागरूक और निडर होकर अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं तो अवश्य ही अपराध को जड़ से खत्म किया जा सकता है। आज हम सभी मॉडल सोसाइटी की ओर बढ़ रहे हैं।
सभी बेटियों के सुनहरे भविष्य के लिए संरक्षकों को भी सशक्त और जागरूक होकर कार्य करना चाहिए।’ आईजी आशुतोष पांडे ने बेटियों का उत्साहवर्धन करते हुए सोमवार को ये बातें कहीं।
वे अर्मापुर पीजी कालेज में महिला जागृति संस्था की ओर से ‘बालिकाओं की सुरक्षा दशा एवं दिशा’ विषय पर आधारित कार्यशाला में बोल रहे थे।
उन्होंने बेटियों को भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए समाज को और अभिभावकों को जागरूक रहने का संदेश दिया।
प्रधानाचार्य जीएल श्रीवास्तव ने कहा कि कालेज में अस्सी प्रतिशत छात्राएं अध्ययन करती हैं। मार्ग में आते-जाते उन्हें कहीं न कहीं असुरक्षा का डर सताता रहता है। ऐसी स्थिति में बालिकाओं को स्वयं सुरक्षा की दृष्टि से सशक्त बनाना आवश्यक है।
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प्रदेश सरकार और संसद में छात्राओं की सुरक्षा के लिए समय- समय पर कई नियम लागू किए जाते हैं लेकिन इनका असर सीमित रहता है। इस प्रकार की कार्यशालाओें के माध्यम से छात्राओं को जागरूक करना ही हमारा उद्देश्य है।
अपर महाप्रबंधक जीसी राउत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने महिलाओं की असुरक्षा की दृष्टि से भारत को विश्व में चौथे स्थान पर बताया है। इस कलंक को मिटाने के लिए हमें सम्मिलित प्रयास करने की जरूरत है।
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सभी बेटियों के सुनहरे भविष्य के लिए संरक्षकों को भी सशक्त और जागरूक होकर कार्य करना चाहिए।’ आईजी आशुतोष पांडे ने बेटियों का उत्साहवर्धन करते हुए सोमवार को ये बातें कहीं।
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वे अर्मापुर पीजी कालेज में महिला जागृति संस्था की ओर से ‘बालिकाओं की सुरक्षा दशा एवं दिशा’ विषय पर आधारित कार्यशाला में बोल रहे थे।
उन्होंने बेटियों को भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए समाज को और अभिभावकों को जागरूक रहने का संदेश दिया।
प्रधानाचार्य जीएल श्रीवास्तव ने कहा कि कालेज में अस्सी प्रतिशत छात्राएं अध्ययन करती हैं। मार्ग में आते-जाते उन्हें कहीं न कहीं असुरक्षा का डर सताता रहता है। ऐसी स्थिति में बालिकाओं को स्वयं सुरक्षा की दृष्टि से सशक्त बनाना आवश्यक है।
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प्रदेश सरकार और संसद में छात्राओं की सुरक्षा के लिए समय- समय पर कई नियम लागू किए जाते हैं लेकिन इनका असर सीमित रहता है। इस प्रकार की कार्यशालाओें के माध्यम से छात्राओं को जागरूक करना ही हमारा उद्देश्य है।
अपर महाप्रबंधक जीसी राउत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने महिलाओं की असुरक्षा की दृष्टि से भारत को विश्व में चौथे स्थान पर बताया है। इस कलंक को मिटाने के लिए हमें सम्मिलित प्रयास करने की जरूरत है।