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एसआईटी की जांच में इफ्तिखारुद्दीन दोषी: सीएम तक पहुंची एसआईटी की रिपोर्ट, 48 घंटे में फैसले की संभावना
Fri, 22 Oct 2021 11:55 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 22 Oct 2021 11:55 AM IST
सार
एसआईटी जांच में आईएएस मो. इफ्तिखारुद्दीन प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं। एसआईटी ने तमाम साक्ष्यों के साथ मंगलवार को जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। 550 पेज की जांच रिपोर्ट में साहित्य व वीडियो के आपत्तिजनक कन्टेंट को साक्ष्य के तौर पर शामिल किया है।
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मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन का वायरल वीडियो
- फोटो : amar ujala
विस्तार
सरकारी आवास पर तकरीरें और धर्मांतरण संबंधी किस्सों के वीडियो वायरल होने के मामले में फंसे वरिष्ठ आईएएस मो. इफ्तिखारुद्दीन पर शासन का फैसला 48 घंटे में आ सकता है। एसआईटी की जांच रिपोर्ट पर सीएम के विशेष सचिव ने प्रमुख बिंदु तैयार कर फाइल सीएम तक पहुंचा दी है।
वहीं, एसआईटी ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए विशेष एजेंसी से भी जांच कराने की सिफारिश की है। कानपुर में मंडलायुक्त के पद पर रहने के दौरान मो. इफ्तिखारुद्दीन पर कट्टरता फैलाते हुए धर्म विशेष का प्रचार प्रसार करने का आरोप लगा था। शासन ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया।
एसआईटी ने करीब 20 दिनों में अपनी जांच पूरी करने केबाद रिपोर्ट सीएम कार्यालय तक पहुंचा दी। सूत्रों के अनुसार जांच में तमाम ऐसे तथ्यों का जिक्र किया गया है, जिससे आईएएस द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए लोगों को धर्म परिवर्तन केलिए प्रोत्साहित करने की पुष्टि होती है।
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हालांकि, एक भी गवाह एसआईटी की जांच में सामने नहीं आया। जांच रिपोर्ट सीएम के विशेष सचिव के पास पहुंचने पर उन्होंने महत्वपूर्ण बिंदुओं का अलग से नोट बनाकर रिपोर्ट के साथ संलग्न कर फाइल सीएम तक पहुंचा दी है।
एसआईटी की रिपोर्ट में सीनियर आईएएस के खिलाफ विधिक और विभागीय कार्रवाई की भी संस्तुति की गई है। ऐसे में अब 48 घंटों के अंदर आईएएस पर शासन की ओर से बड़ा फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।
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वहीं, एसआईटी ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए विशेष एजेंसी से भी जांच कराने की सिफारिश की है। कानपुर में मंडलायुक्त के पद पर रहने के दौरान मो. इफ्तिखारुद्दीन पर कट्टरता फैलाते हुए धर्म विशेष का प्रचार प्रसार करने का आरोप लगा था। शासन ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया।
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एसआईटी ने करीब 20 दिनों में अपनी जांच पूरी करने केबाद रिपोर्ट सीएम कार्यालय तक पहुंचा दी। सूत्रों के अनुसार जांच में तमाम ऐसे तथ्यों का जिक्र किया गया है, जिससे आईएएस द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए लोगों को धर्म परिवर्तन केलिए प्रोत्साहित करने की पुष्टि होती है।
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हालांकि, एक भी गवाह एसआईटी की जांच में सामने नहीं आया। जांच रिपोर्ट सीएम के विशेष सचिव के पास पहुंचने पर उन्होंने महत्वपूर्ण बिंदुओं का अलग से नोट बनाकर रिपोर्ट के साथ संलग्न कर फाइल सीएम तक पहुंचा दी है।
एसआईटी की रिपोर्ट में सीनियर आईएएस के खिलाफ विधिक और विभागीय कार्रवाई की भी संस्तुति की गई है। ऐसे में अब 48 घंटों के अंदर आईएएस पर शासन की ओर से बड़ा फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।