फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   If corona deteriorates then new lung will be transplanted, Cardiology has prepared a proposal

कोरोना खराब करेगा तो ट्रांसप्लांट हो जाएगा नया फेफड़ा, कार्डियोलॉजी ने तैयार किया है प्रस्ताव

Fri, 18 Sep 2020 03:40 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 18 Sep 2020 03:40 PM IST
विज्ञापन
If corona deteriorates then new lung will be transplanted, Cardiology has prepared a proposal
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala
कोरोना फेफड़ों में ऐसी खराबी पैदा कर दे रहा है, जिसके सुधरने की गुंजाइश पर अभी कुछ तय नहीं है। कोरोना संक्रमण से रोगी के निगेटिव हो जाने के बाद फेफड़ों में फाइब्रोसिस हो जाती है। इससे रोगी को बाद में भी उतनी तकलीफ हो रही है। ऐसे में फेफड़ों के ट्रांसप्लांट की राह बचती है।
विज्ञापन


एलपीएस कार्डियोलॉजी संस्थान में फेफड़ों और हृदय ट्रांसप्लांट का प्रस्ताव बन चुका है। कोरोना काल की वजह से इसका काम अभी रुका है लेकिन यह स्थिति गुजरने के बाद संस्थान प्रबंधन अंग प्रत्यारोपण के लाइसेंस के लिए आवेदन देगा। एसजीपीजीआई चंडीगढ़ पहले ही फेफड़ा ट्रांसप्लांट शुरू कर चुका है।
विज्ञापन


 

प्रदेश के सरकारी चिकित्सा संस्थानों में कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट ने लंग्स और हार्ट ट्रांसप्लांट का खाका तैयार कर लिया है। कार्डियोलॉजी के प्रस्तावित नए भवन में लंग्स, किडनी और लिवर सेंटर भी है। प्रस्ताव के अलावा अंग प्रत्यारोरण के लिए अलग से विभिन्न संस्थाओं से लाइसेंस और अनुमति लेनी पड़ती है। 

इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर विनय कृष्णा का कहना है कि कोरोना काल के कारण बहुत से प्रस्तावों की प्रक्रिया रुक गई है। इस वक्त सिर्फ कोरोना की स्थिति से निपटने का काम हो रहा है। अगर यह इमरजेंसी न आती तो इसी पुराने भवन में लंग्स-हार्ट ट्रांसप्लांट का काम शुरू हो गया होता। कोरोना काल निकलने के बाद इस दिशा में प्रयास तेज कर दिए जाएंगे।

फेफड़ों की हालत बिगाड़ दे रहा कोरोना
डॉ. मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि कोरोना रोगियों के फेफड़ों की जांच की जा रही है तो कुछ फाइब्रोसिस मिल रही है। फेफड़े सिकुड़ने के बाद फिर ठीक होंगे कि नहीं यह अभी नहीं बताया जा सकता है। इससे रोगियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा फेफड़ों की झिल्ली कमजोर पड़ जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed