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ICAI CA Result 2025: सिटी टॉपर बने वंश गुप्ता, 600 में मिले 369 अंक, इन होनहारों ने भी लहराया परचम

Sun, 06 Jul 2025 10:33 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 06 Jul 2025 10:33 PM IST
सार

ICAI CA Result 2025: द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ने सीए फाइनल के परिणाम घोषित कर दिए हैं।  

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ICAI CA Result 2025: Vansh Gupta became the city topper, got 369 marks out of 600
वंश गुप्ता अपने माता-पिता के साथ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने रविवार को सीए फाइनल का परिणाम जारी कर दिया। नौबस्ता पशुपतिनगर निवासी वंश गुप्ता ने 600 में 369 अंक लाकर शहर में टॉप किया। उन्हें म्यूजिक सुनना बहुत पसंद था। परीक्षा के दौरान उन्होंने म्यूजिक से पूरी तरह दूरी बना ली। यही कारण है कि वह शहर के टॉपर बने।
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गोविंदनगर निवासी गीतिका अग्रवाल व स्वरूपनगर निवासी लावण्या माहेश्वरी ने 366 अंक लाकर शहर में दूसरा स्थान पाया। अंबरीश निगम 365 ने तीसरा और संस्कार सिंह 351 ने चौथा स्थान हासिल किया। सीए फाइनल परीक्षा मई 2025 में आयोजित की गई थी जिसमें दोनों ग्रुपों में 170 छात्रों ने प्रतिभाग किया। 32 छात्रों ने परीक्षा दोनों ग्रुपों में सफलता पाई। ग्रुप 1 में 20 छात्र और ग्रुप 2 में 17 छात्रों ने परीक्षा पास की। कुल 538 छात्रों ने प्रतिभाग किया, जिसमें 141 छात्र पास हुए। वहीं, सीए इंटरमीडिएट का भी रिजल्ट जारी हो गया जिसमें छात्रों का अच्छा रिजल्ट रहा।
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वंश गुप्ता ने बताया कि सीए करना मुझे कठिन नहीं लगा, लेकिन इसे करने के लिए मैंने खुद से अपनी पसंदीदा चीज यानी म्यूजिक को दूर किया और सफलता आसान हो गई। वंश ने बताया कि परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने पारिवारिक आयोजनों में जाना बंद कर दिया। वंश के परिवार में कोई भी सीए नहीं है। मां निशा गुप्ता शिक्षिका और पिता दीपक गुप्ता कारोबारी हैं।
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ICAI CA Result 2025: Vansh Gupta became the city topper, got 369 marks out of 600
गीतिका अग्रवाल परिवार के साथ - फोटो : अमर उजाला
डेढ़ साल से सोशल मीडिया से हैं दूर
गोविंदनगर निवासी गीतिका अग्रवाल ने शहर में दूूसरा स्थान पाया है। गीतिका ने सफलता के लिए डेेढ़ साल से सोशल मीडिया का प्रयोग नहीं किया। रोजाना पढ़ाई को छह घंटे दिए। मोबाइल को पूरी तरह त्यागा और जरूरत के लिए कीपैड वाला फोन रखा ताकि कहीं से भी भटकाव वाली स्थिति न हो। नींद के साथ समझौता किया। आठ घंटे के बजाय कभी पांच तो कभी चार घंटे सोई लेकिन पढ़ाई समय पर पूरी की। उन्होंने कहा कि मेरे परिवार में भी कोई सीए नहीं था। पापा बिजनेसमैन संजय अग्रवाल और मां शालिनी गृहिणी हैं।

 

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केक काटती लावण्या अपने परिवार के साथ - फोटो : अमर उजाला
सीए बनने के लिए छोड़ दी नौकरी
स्वरूपनगर निवासी लावण्या माहेश्वरी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम ऑनर्स किया और उसके बाद उन्हें वहीं से अच्छा प्लेसमेंट भी मिल गया। इसके बाद उन्होंने सीए करने का सोचा और नौकरी छोड़ दी। लावण्या ने फिर से पढ़ाई की और छह से सात घंटे का समय दिया। लावण्या ने बताया कि इसमें परिवार और दोस्तों का भी खूब सहयोग मिला है। लावण्या के पिता सौरभ माहेश्वरी बिजनेसमैन और मां पूजा गृहिणी हैं।

 

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अंबरीष निगम अपने परिवार के साथ - फोटो : अमर उजाला
बहन से मिली सीए बनने की प्रेरणा
गोविंदनगर निवासी अंबरीष निगम ने बताया कि सीए की तैयारी के दौरान पारिवारिक आयोजन, पिकनिक या त्योहार पर सभी लोग इकट्ठा होतेे थे पर मैं कमरे में खुद को बंद कर पढ़ाई करता था। ऐसे में उनको भी समय नहीं दे पाया। अंबरीष की बड़ी बहन धृतिका निगम सीएस हैं और उन्हीं से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने सीए बनने का फैसला लिया। पिता विकास निगम एलआईसी में एडिशनल सेक्रेटरी और मां शशि गृहिणी हैं।

 

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संस्कार सिंह - फोटो : अमर उजाला
परिवार के पहले सीए बने संस्कार
रावतपुर निवासी संस्कार सिंह सीए में 351 अंक लाकर अपने परिवार के पहले सीए बने हैं। संस्कार ने बताया कि परिवार में कोई सीए नहीं था। उन्हें शुरू से ही कॉमर्स पसंद थी तो आगे चलकर उन्होंने सीए करने की सोची। संस्कार की मां बबिता सिंह शिक्षिका और पिता सुनील सिंह प्राइवेट नौकरी करते हैं। बड़ा भाई वीरेंद्र बीटेक करने के बाद लखनऊ में नौकरी कर रहा है। संस्कार ने बताया कि उन्हें गेम खेलना पसंद थे। जब से उन्होंने सोचा सीए की सोची तबसे गेम से दूरी बना ली थी। सात से आठ घंटे पढ़ाई कर उन्होंने सफलता हासिल की है।
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