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होटल-रेस्टोरेंट कारोबार, कोरोना से गया हार ,संचालक बोले अब बंद करने की आ जाएगी नौबत 

Wed, 12 Jan 2022 05:16 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Wed, 12 Jan 2022 05:16 PM IST
सार

ग्राहकों की क्षमता 50 फीसदी करने के निर्देश के बाद होटल-रेस्टोरेंट कारोबार संचालक बोले, पहले से चल रहा था सन्नाटा, अब बंद करने की आ जाएगी नौबत। कोरोना ने बीते तीन साल में होटल-गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट कारोबार को करोड़ों की चपत लगाई है। 
 

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Hotel-restaurant business lost to Corona, the operator said, we are obligated to close the buisness
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में कोरोना के चलते तीन साल से आर्थिक संकट सह रहे होटल-रेस्टोरेंट कारोबार को कोरोना की तीसरी लहर ने भी तगड़ी आर्थिक चोट देना शुरू कर दी है। शहर में कोरोना के केस एक हजार होने के बाद होटल-रेस्टोरेंट में ग्राहकों की क्षमता 50 फीसदी करने के निर्देश हो गए हैं।
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होटल-रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि कोरोना के चलते पहले से ही परेशानी थी। अब तो होटल-रेस्टोरेंट बंद करने की नौबत आ जाएगी। शहर में तीन सौ से ज्यादा होटल और अलग-अलग क्षेत्रों में तीन हजार से ज्यादा रेस्टोरेंट हैं। गाइडलाइन के मुताबिक, होटल-रेस्टोरेंट में नो मास्क नो एंट्री का पालन करना होगा। सोशल डिस्टेंसिंग हर हाल में रखनी होगी।
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जिला प्रशासन की टीमों ने मंगलवार देर शाम घंटाघर, स्वरूप नगर, पांडु नगर क्षेत्र के होटल-रेस्टोरेंट में जाकर गाइडलाइन के पालन के निर्देश दिए। कानपुर होटल-गेस्ट हाउस स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुखवीर सिंह मलिक का कहना है कि एसोसिएशन के सभी पदाधिकारियों-सदस्यों को नई गाइडलाइन की जानकारी दे दी गई है। सर्कुलर भी जारी कर दिया गया है। कोरोना ने होटल-गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट कारोबार को करोड़ों की चपत लगाई है। 
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"कोरोना के चलते बीते तीन साल से होटल, रेस्टोरेंट कारोबार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। शहर के रेस्टोरेंट दोपहर बाद ही खुलते हैं। 50 फीसदी ग्राहकों को ही बैठाने की व्यवस्था से तो हर दिन का खर्च ही नहीं निकलेगा। ऐसे में रेस्टोरेंट बंद हो जाएंगे।"  
राजकुमार भगतानी, रेस्टोरेंट संचालक

"इस कारोबार में ही सबसे ज्यादा नुकसान देखने को मिल रहा है। नाइट कर्फ्यू के असर से उबर नहीं पाए थे कि नई व्यवस्था में कम ग्राहक आने से परेशानी बढ़ेगी। इस उद्योग को बचाने के लिए सरकार कुछ नहीं कर रही है।"  

मयंक कोहली, रेस्टोरेंट संचालक 

"शहर के रेस्टोरेंटों में लंच लोकप्रिय नहीं है। ज्यादातर लोग परिवार के साथ रात में डिनर के लिए ही आते हैं। नाइट कर्फ्यू पहले से ही चल रहा था। अब नई पाबंदी से कारोबारियों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।"   
पंकज खत्री, रेस्टोरेंट संचालक
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