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अस्पताल फुल, सड़क पर मरो
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Sun, 20 Sep 2015 01:50 AM IST
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संवेदनाएं मर गईं और इंसानियत ने दम तोड़ दिया। लगातार दूसरे दिन ‘धरती के भगवानों’ यानी डॉक्टरों ने संवेदनहीनता दिखाई और एक गरीब की जान चली गई। मामला है लक्ष्मीपत सिंहानिया हृदय रोग संस्थान (कॉर्डियोलॉजी) के डॉक्टरों की घोर लापरवाही का।
दिल में छेद की वजह से दर्द से छटपटाती मध्य प्रदेश की गुलाब बाई (45) पांच दिन तक संस्थान के परिसर में पड़ी रही। उसका पति डॉक्टरों से भर्ती करने की गुहार लगाता रहा, लेकिन कोई नहीं पसीजा।
आखिरकार महिला ने शनिवार को संस्थान के परिसर में दम तोड़ दिया। इस पर संस्थान के डायरेक्टर ने हास्यास्पद बयान दिया कि उनके यहां मरीजों को भर्ती करने की जगह नहीं है। अस्पताल फुल है।
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मध्य प्रदेश के सागर जिले के तिगोड़ा मंगलपुर निवासी सिंटोला की पत्नी गुलाब बाई के दिल में छेद था। झांसी में दिखाया तो डॉक्टरों ने बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी। 15 सितंबर को पत्नी को लेकर यहां कॉर्डियोलॉजी आए और डॉ. आरके बंसल को दिखाया। डॉ. बंसल ने दवा लिख दी पर भर्ती नहीं किया।
वह पत्नी को लेकर परिसर में ही पड़ा रहा। हालत बिगड़ी तो बुधवार को फिर ओपीडी में दिखाया। बीपीएल कार्ड दिखाकर बार बार भर्ती करने की गुहार लगाता रहा पर डॉक्टरों ने अस्पताल में जगह न होने की बात कहकर भर्ती नहीं किया। गंभीर हालत में वह रोज पत्नी को ओपीडी में ही दिखाता रहा और भर्ती कराने की डॉक्टरों से मिन्नतें करता रहा।
शनिवार को गुलाब बाई को डॉ. रमेश ठाकुर व डॉ. एमएम रजी की ओपीडी में दिखाया गया तो उन्होंने इसे इमरजेंसी केस बताया। इसके बाद भी गुलाब बाई को भर्ती नहीं किया गया। आखिरकार महिला ने तड़प तड़पकर दम तोड़ दिया।
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दिल में छेद की वजह से दर्द से छटपटाती मध्य प्रदेश की गुलाब बाई (45) पांच दिन तक संस्थान के परिसर में पड़ी रही। उसका पति डॉक्टरों से भर्ती करने की गुहार लगाता रहा, लेकिन कोई नहीं पसीजा।
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आखिरकार महिला ने शनिवार को संस्थान के परिसर में दम तोड़ दिया। इस पर संस्थान के डायरेक्टर ने हास्यास्पद बयान दिया कि उनके यहां मरीजों को भर्ती करने की जगह नहीं है। अस्पताल फुल है।
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मध्य प्रदेश के सागर जिले के तिगोड़ा मंगलपुर निवासी सिंटोला की पत्नी गुलाब बाई के दिल में छेद था। झांसी में दिखाया तो डॉक्टरों ने बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी। 15 सितंबर को पत्नी को लेकर यहां कॉर्डियोलॉजी आए और डॉ. आरके बंसल को दिखाया। डॉ. बंसल ने दवा लिख दी पर भर्ती नहीं किया।
वह पत्नी को लेकर परिसर में ही पड़ा रहा। हालत बिगड़ी तो बुधवार को फिर ओपीडी में दिखाया। बीपीएल कार्ड दिखाकर बार बार भर्ती करने की गुहार लगाता रहा पर डॉक्टरों ने अस्पताल में जगह न होने की बात कहकर भर्ती नहीं किया। गंभीर हालत में वह रोज पत्नी को ओपीडी में ही दिखाता रहा और भर्ती कराने की डॉक्टरों से मिन्नतें करता रहा।
शनिवार को गुलाब बाई को डॉ. रमेश ठाकुर व डॉ. एमएम रजी की ओपीडी में दिखाया गया तो उन्होंने इसे इमरजेंसी केस बताया। इसके बाद भी गुलाब बाई को भर्ती नहीं किया गया। आखिरकार महिला ने तड़प तड़पकर दम तोड़ दिया।