फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Hindi Diwas 2020: Special Story Know About Famous Alha Author Jamadar Shah

80 के दशक के आल्हा रचयिता का परिवार मुफलिसी का शिकार

Mon, 14 Sep 2020 10:06 AM IST
Vikas Kumar ऋषि तिवारी, अमर उजाला, इटावा
ऋषि तिवारी, अमर उजाला, इटावा Published by: Vikas Kumar Updated Mon, 14 Sep 2020 10:06 AM IST
विज्ञापन
Hindi Diwas 2020: Special Story Know About Famous Alha Author Jamadar Shah
इसी झोपड़ी में रहता है जमादार शाह का परिवार - फोटो : amar ujala

हिंदी दिवस 2020: बदलते समय के साथ आए सामाजिक परिवर्तन से लोग अपने रीति-रिवाजों को भूलते जा रहे हैं। ऐसा ही कुछ हमारी राजभाषा हिंदी के साथ भी हुआ। हिंदी के कई लेखक आए, कई शैलियां बदलीं। आज के युवाओं की रुचि हिंदी की पुरानी कहानियों और आल्हा खंडों में नहीं रह गई है। यहां तक कि नवयुवक आल्हा नाम से भी परिचित नहीं हैं। आज हिंदी दिवस पर हम जनपद के गुमनाम हो चुके आल्हा खंड के लेखक जमादार शाह को याद कर रहे हैं। 80 के दशक के मशहूर आल्हा लेखक का परिवार आज घास-फूस की झोपड़ी में रहने को विवश है। आज जमादार शाह तो हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अमर उजाला की विशेष प्रस्तुति में हम उनसे जुड़ीं जानकारियां लेकर आए हैं। 

विज्ञापन


सुमिर देवता जन्म भूमि के कलम चूम के बांघी धीर, जमादार जस साखों लिख हैं हर हैं आय हमारी पीर, शहर इटावा भाग सिकंदर संत खटकटा जमुना तीर नामक छंदों की रचना करने वाले ब्लॉक महेवा के ग्राम उरेंग निवासी जमादार शाह 80 के दशक के एक दिग्गज आल्हा लेखक थे। उन्होंने एक दर्जन से अधिक आल्हा खंडों का लेखन किया था। उन दिनों उनकी पुस्तकों का प्रकाशन इटावा सहित आसपास के कई जिलों में होता था। बुजुर्ग रामसनेही व लक्ष्मण सिंह बताते हैं कि क्षेत्र में जमादार शाह की आल्हा काफी प्रसिद्ध थी, उनकी लय के लोग कायल थे। हालांकि अब तो उनकी किताबों के अवशेष भी नहीं बचे हैं। जानकर बताते हैं कि वे अपनी प्रत्येक आल्हा खंड के प्रकाशित होने के बाद उसकी एक प्रति अपने मित्र जोरावर राठौर को स्वेच्छा से भेंट करते थे। जोरावर राठौर के पुत्र आज तक उन पुस्तकों को संभाल के रखे हुए हैं। यह कहीं न कहीं नई पीढ़ी के लिए हिंदी साहित्य के प्रति लगाव और सद्भावना का प्रबल उदाहरण है। 
विज्ञापन


जमादार शाह की मृत्यु के बाद उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ती गई और पांच लड़कों का पूरा परिवार मजदूरी से अपनी आजीविका चलाने लगा। परिजनों ने बताया कि उन्हें शासन से अभी तक सिर्फ शौचालय प्राप्त हुआ है, इसके अतिरिक्त कोई सरकारी सुविधा नहीं मिली। आज  उनका पूरा परिवार घास-फूस से बनी झोपड़ी में रहने को मजबूर है। बरसात में पानी टपकने से जान का खतरा भी रहता है। क्षेत्र के संभ्रांत लोगों का कहना है कि जमादार शाह क्षेत्र के ही नहीं जनपद के नायाब हीरा थे, उनके परिवार को शासन से सहायता मिलनी चाहिए। 

विज्ञापन
विज्ञापन

दर्जा चार तक पढ़े थे जमादार शाह 

बुजुर्ग बताते हैं कि जमादार कुछ ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे, वे सिर्फ कक्षा चार तक ही पढ़े थे। पुराने जमाने में कक्षा को दर्जा बोला जाता था। उन्होंने दर्जा चार तक की पढ़ाई अलीगढ़ से की थी। कम पढ़े होने के बाद भी उनकी रचनाओं की शैली उत्तम बताई जाती है। 

जमादार के की प्रमुख रचनाएं 

जमादार शाह ने जिन आल्हा खंडों की रचना की उनमें भुजरियों की लड़ाई, धाधू का विवाह, चंद्राबल की चौथी, अभय का विवाह, आल्हा का विवाह, सूरज और धाधू का युद्ध, गढ़वादों की लड़ाई जैसी रचनाएं प्रमुख थीं। 

जमादार से जुड़ी यादें की साझा खेती करते लिख लेते थे रचनाएं 

पिताजी ने एक दर्जन से अधिक आल्हा खंडों की रचना की थी। वे बहुत ही मस्त मौला और अलग किस्म के इंसान थे। बैलों की जोड़ी लेकर खेत की जुताई करते समय आल्हा की लाइनें लिख लेते थे, बाद में उसे प्रकाशित करवाने के लिए अहेरीपुर स्थित भगवान दास की प्रिंटिंग प्रेस पर भेजते थे। वे हिंदू-मुस्लिम एकता के पक्षधर थे, उनकी रचनाओं में दोनों धर्मों का सद्भाव झलकता है। 

- याकूब अली, जमादार शाह के पुत्र। 

आज भी सहेज रखी उनकी रचनाएं 
जमादार शह और मेरे पिता जोरावर की काफी घनिष्ठ मित्रता थी। वे अपनी आल्हा खंड की पुस्तक प्रकाशित होने के बाद एक प्रति मेरे पिता को जरूर भेंट करते थे। मैंने आज भी उन पुस्तकों को सहेज कर रखा है। हालांकि वर्षों पुरानी होने की वजह से पुस्तकें बिल्कुल जीर्णशीर्ण हो गई हैं। 
- नंदराम राठौर। 

क्षेत्र में अलग ही थी पहचान 
मैं आल्हा पढ़ने की काफी शौकीन रही हूं। उरेंग के जमादार शाह की आल्हा बहुत पसंद है। शाह के आल्हा के कई खंडों को मैंने पढ़ा है। 
- टडवा निवासी देवकुंवर।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed