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‘सर! मुझे नहीं चाहिए 740 रुपये’
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Sun, 17 Jan 2016 01:59 AM IST
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व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) घोटाले में पूछताछ के लिए मध्य प्रदेश के सागर गया चाय वाला राजू वापस आ गया है। सीबीआई के पचड़े से जल्द से जल्द निकलने के चक्कर में उसने आने-जाने का 740 रुपये खर्च भी नहीं लिया।
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कोर्ट ने उसे खर्च देने का निर्देश दिया था लेकिन राजू ने कहा कि उसे रुपये नहीं चाहिए, बस घर जाने दिया जाए। सिपाहियों के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया और बोला, ‘साहब! इसके बाद कभी मत बुलाना। दुकान चार दिन से बंद है।
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ऐसे ही दुकान बंद रही तो बच्चों को भूखे पेट सोनापड़ेगा।’व्यापम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई के विशेष न्यायाधीश सागर अजीत सिंह ने हैलट अस्पताल के बाहर चाय की दुकान चलाने वाले राजू को पूछताछ के लिए बुलाया था।
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11 जनवरी को पहुंचे राजू को एसआईटी के किसी दस्तावेज पर उसके दस्तखत दिखाए गए और पूछा गया कि इस व्यक्ति को तुम जानते हो? राजू ने दस्तखत को अपना बताया और कहा कि इस व्यक्ति को नहीं जानता। हैलट चौकी में पुलिस ने बुलाकर दस्तखत करने को कहा तो कर दिया। इसके बाद कोर्ट ने उसे वापस कर दिया।
कोर्ट के आदेश पर राजू को कानपुर से सागर आने-जाने के 740 रुपये देने की प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन राजू ने रुपये लेने से मना कर दिया।
पुलिस की सेवा में फंस गया
हैलट के सामने चाय की दुकान लगाने वाले राजू को चौकी पुलिस कभी-कभार पंचनामा भरते समय गवाही के लिए बुलाती है। पुलिस के आदेश पर उसे जहां कहां जाता, वह दस्तखत कर वापस चला आता। व्यापम घोटाले में सागर से आई एसआईटी के किसी दस्तावेज पर हैलट चौकी पुलिस ने बुलाया तो उसने दस्तखत कर दिया।