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खुद की रिसर्च किट तैयार करेंगे हरकोर्टियंस, दो कॉलेजों के बीच हुआ ये अहम समझौता
Thu, 05 Sep 2019 01:30 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 05 Sep 2019 01:30 PM IST
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कानपुर स्थित हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) के छात्र अब विभिन्न शोध के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली रिसर्च किट (एनालॉग और डिजिटल ट्रेनर किट) खुद तैयार करेंगे। इसके लिए बुधवार को विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग और थयागराजर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, मदुरै ने समझौता किया है। दोनों संस्थानों के विशेषज्ञ मिलकर इसके लिए छात्रों को गाइडेंस प्रदान करेंगे।
इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष प्रो. कृष्णराज ने बताया कि यह किट इलेक्ट्रॉनिक्स के हर उत्पाद के ट्रायल में प्रयोग होती है। बाजार में इसकी कीमत करीब 50 हजार रुपये है। विवि में तैयार करने में महज पांच हजार रुपये खर्च होंगे। बताया कि जल्द ही दोनों संस्थान मिलकर मदुरै में एक हैकाथॉन का आयोजन करने वाले हैं।
इसमें दोनों संस्थानों के छात्रों को सॉलिड वेस्ट मैटेरियल पर समस्या खोजने और फिर उसके समाधान पर काम करने का टास्क दिया जाएगा। बेस्ट आइडिया देने वाली टीम को पुरस्कृत करेंगे और उन्हें एआईसीटीई के नेशनल हैकाथॉन में भेजा जाएगा। प्रो. रघुराज सिंह, प्रो. के हरिहरन आदि मौजूद रहे।
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रिवर्स इंजीनियरिंग की तरफ बढ़ा कदम
प्रो. कृष्णराज ने बताया कि अब उनका विभाग रिवर्स इंजीनियरिंग की तरफ बढ़ रहा है। मतलब हम उन मशीनों, उत्पाद को अपने यहां खुद तैयार करेंगे जो अभी तक विदेशों से खरीदे जाते रहे हैं। इसके लिए पहले हम उन मशीनों को लाकर उस पर अध्ययन करेंगे। और फिर पार्ट्स का अपने यहां ही निर्माण करेंगे।
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इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष प्रो. कृष्णराज ने बताया कि यह किट इलेक्ट्रॉनिक्स के हर उत्पाद के ट्रायल में प्रयोग होती है। बाजार में इसकी कीमत करीब 50 हजार रुपये है। विवि में तैयार करने में महज पांच हजार रुपये खर्च होंगे। बताया कि जल्द ही दोनों संस्थान मिलकर मदुरै में एक हैकाथॉन का आयोजन करने वाले हैं।
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इसमें दोनों संस्थानों के छात्रों को सॉलिड वेस्ट मैटेरियल पर समस्या खोजने और फिर उसके समाधान पर काम करने का टास्क दिया जाएगा। बेस्ट आइडिया देने वाली टीम को पुरस्कृत करेंगे और उन्हें एआईसीटीई के नेशनल हैकाथॉन में भेजा जाएगा। प्रो. रघुराज सिंह, प्रो. के हरिहरन आदि मौजूद रहे।
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रिवर्स इंजीनियरिंग की तरफ बढ़ा कदम
प्रो. कृष्णराज ने बताया कि अब उनका विभाग रिवर्स इंजीनियरिंग की तरफ बढ़ रहा है। मतलब हम उन मशीनों, उत्पाद को अपने यहां खुद तैयार करेंगे जो अभी तक विदेशों से खरीदे जाते रहे हैं। इसके लिए पहले हम उन मशीनों को लाकर उस पर अध्ययन करेंगे। और फिर पार्ट्स का अपने यहां ही निर्माण करेंगे।