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HBTU KANPUR: एकेडमिक काउंसिल की बैठक में कई अहम फैसलों पर सहमति, पीएचडी छात्रों को चौथे साल से देनी होगी कम फीस

Sun, 22 May 2022 11:04 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 22 May 2022 11:04 AM IST
सार

एचबीटीयू की एकेडमिक काउंसिल की बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लग गई। इसके तहत पीएचडी छात्रों को चौथे साल से कम फीस देनी होगी। साथ ही, बीबीए समेत कई कोर्सों के संचालन पर बनी सहमति बनी।

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HBTU KANPUR, PhD students will have to pay less fees from the fourth year
एचबीटीयू - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) में पीएचडी करने वाले छात्रों को शुल्क में राहत दी गई है। तीन साल की पढ़ाई के बाद चौथे साल से पीएचडी पूरी होने तक छात्र से कम शुल्क लिया जाएगा। शनिवार को हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक में यह फैसला लिया गया है। वर्तमान में पीएचडी छात्रों को हर साल 65 हजार रुपये फीस देनी होती है। अब छात्रों को चौथे साल से 19 हजार रुपये ही सालाना देने होंगे।

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इसके अलावा पीएचडी करने वाले कुछ छात्र ऐसे भी हैं, जो पुरानी फीस 55 हजार रुपये सालाना दे रहे हैं। इन छात्रों को 11,500 रुपये सालाना फीस देनी होगी। डीन एकेडमिक डॉ. आनंद कुमार ने बताया कि बैठक में सत्र 2023-24 से संस्थान में बीबीए कोर्स चलाने पर मुहर लगाई गई है। 
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2022-23 से संस्थान में एमएससी केमिकल साइंस और एमएससी फिजिक्स कोर्स के संचालन पर सहमति बनी है। इन सभी मामलों को 24 मई को होने वाली एग्जिक्यूटिव काउंसिल की बैठक में रखा जाएगा। बैठक में कुलपति प्रो. शमशेर समेत एकेडमिक काउंसिल के सदस्य मौजूद रहे। 

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कोविड संक्रमित होने की रिपोर्ट नहीं तो पदक भी नहीं
एचबीटीयू में जनवरी में विषम सेमेस्टर की परीक्षा का बहिष्कार करने वाले बीटेक छात्रों को विवि प्रशासन ने सहूलियत और सजा दोनों एक साथ दी है। इन छात्रों की छूटी हुई परीक्षा सम सेमेस्टर की परीक्षा खत्म होने के बाद कराई जाएगी। 

विवि प्रशासन ने निर्देश ये दिए हैं कि जो छात्र परीक्षा काल में कोविड संक्रमित होने की रिपोर्ट पेश नहीं कर पाएंगे, उनको बेहतर अंक लाने पर भी दीक्षांत समारोह में पदक नहीं दिया जाएगा। डीन एकेडमिक ने बताया कि दोबारा होने वाली परीक्षा में वह छात्र भी दोबारा से परीक्षा दे सकते हैं, जिन्होंने जनवरी में परीक्षा दी थी। बता दें कि जनवरी में कोविड संक्रमण के चलते 95 प्रतिशत छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार कर दिया था।

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