दोस्त ने किया दगा: ई-रिक्शा चालक के नाम पर बनाई फर्म, दो माह में छह करोड़ का लेनदेन, ऐसे खुला खेल
यूपी के हरदोई में ई-रिक्शा चालक के अभिलेखों का इस्तेमाल कर दिल्ली की एक कंपनी ने दो माह में ही छह करोड़ 67 लाख रुपये का लेनदेन कर डाला। मामला खुलते ही हर कोई दंग रह गया।
विस्तार
हरदोई जिले में कछौना कस्बे के एक ई-रिक्शा चालक के अभिलेखों का इस्तेमाल कर दिल्ली की एक कंपनी ने दो माह में ही छह करोड़ 67 लाख रुपये का लेनदेन कर डाला। इसका पता तब चला जब ई-रिक्शे की बैटरी बदलवाने के लिए चालक को बैंक से लोन की जरूरत पड़ी। लोन के लिए उसने जब आईटीआर निकलवाया तो खेल का खुलासा हुआ।
कछौना के तिलक नगर निवासी अमन कुमार राठौर ई-रिक्शा चलाता है। कुछ दिनों से उसके ई-रिक्शा की बैटरी खराब थी। इसे बदलवाने के लिए उसके पास रुपये नहीं थे। कुछ लोगों की राय पर उसने बैंक से 50 हजार रुपये लोन लेने की कवायद शुरू की। बैंक में संपर्क किया, तो कर्मचारियों ने उससे इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) मांगा। आईटीआर न होने पर उसने कस्बे के ही एक जनसेवा केंद्र संचालक से संपर्क कर आईटीआर दाखिल करने के लिए कहा।
जनसेवा केंद्र संचालक ने जब उसका आईटीआर भरने के लिए आवेदन किया तो उसके नाम से पहले से ही छह करोड़ 67 लाख रुपये का टर्नओवर महज दो माह में ही दिखा रहा था। जब इसका और ब्योरा खंगाला गया, तो पता चला कि दिल्ली में राठौर ट्रेडर्स के नाम से फर्म रजिस्टर्ड है। यह फर्म कॉपर वायर और स्क्रैप का काम करती है। कंपनी का संचालक का नाम अमन कुमार राठौर है। उसी का आधार और पैनकार्ड भी इस कंपनी में लगा है। अमन ने बताया कि पूरे मामले की शिकायत दिल्ली जाकर पुलिस से करेगा।
दोस्त ने किया दगा
अमन कुमार राठौर को जब पूरी बात पता चली, तो उसे एक साल पहले की घटना याद आ गई। अमन के मुताबिक कस्बे का ही लखनऊ रोड निवासी युवक एक साल पहले उसे मिला था। रोजगार दिलाने के नाम पर आधार और पैनकार्ड ले लिया था। अमन को लगता है कि उसी ने आधार और पैन का दुरुपयोग किया है।