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Hardoi: किशोरी का अपहरण कर दुष्कर्म करने वाले को 10 साल की सजा, सात साल पुराने मामले में कोर्ट ने सुनाया फैसला
Wed, 09 Oct 2024 09:40 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 09 Oct 2024 09:40 PM IST
सार
Hardoi News: किशोरी का अपहरण कर दुष्कर्म के मामले में कोर्ट ने आरोपी को 10 साल की सजा सुनाई है। साथ ही अर्थदंड भी लगाया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
किशोरी का अपहरण कर दुष्कर्म करने के सात साल पुराने मामले में कोर्ट ने दोषी को 10 साल की सजा सुनाई है, साथ ही 35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की पूरी रकम बतौर क्षतिपूर्ति पीड़िता को देने का आदेश दिया है। अतरौली थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने 25 नवंबर 2017 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 22 नवंबर को दिन में उसकी पुत्री (15) को देवेंद्र घर से बहलाकर कहीं ले गया था।
इसमें पप्पू, महेंद्र व देवेंद्र की मां ने मदद की थी। पुलिस ने अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना के बाद देवेंद्र के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। अन्य लोगों के नाम साक्ष्य के अभाव में निकाल दिए गए थे। सुनवाई के दौरान पता चला कि अभियुक्त ने किशोरी का अपहरण किया। फिर उसे कानपुर ले गया था। एक कमरे में 22-23 दिन बंद रखा और उसके साथ दुष्कर्म किया। पैथोलॉजी रिपोर्ट में गर्भवती होने की भी बात सामने आई थी। चोट लगने के कारण गर्भपात होने का भी पता चला था। अभियोजन पक्ष से आठ गवाहों को पेश किया गया। पूरे मामले की सुनवाई पूरी कर अपर जिला जज अपर जिला जज हेमेंद्र कुमार सिंह (कोर्ट संख्या 16) ने फैसला सुनाया।
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इसमें पप्पू, महेंद्र व देवेंद्र की मां ने मदद की थी। पुलिस ने अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना के बाद देवेंद्र के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। अन्य लोगों के नाम साक्ष्य के अभाव में निकाल दिए गए थे। सुनवाई के दौरान पता चला कि अभियुक्त ने किशोरी का अपहरण किया। फिर उसे कानपुर ले गया था। एक कमरे में 22-23 दिन बंद रखा और उसके साथ दुष्कर्म किया। पैथोलॉजी रिपोर्ट में गर्भवती होने की भी बात सामने आई थी। चोट लगने के कारण गर्भपात होने का भी पता चला था। अभियोजन पक्ष से आठ गवाहों को पेश किया गया। पूरे मामले की सुनवाई पूरी कर अपर जिला जज अपर जिला जज हेमेंद्र कुमार सिंह (कोर्ट संख्या 16) ने फैसला सुनाया।
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