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Hamirpur: जमीन के गलत अभिलेख तैयार करने में तत्कालीन एसडीएम समेत 13 पर रिपोर्ट
Tue, 29 Apr 2025 10:06 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 29 Apr 2025 10:06 PM IST
सार
Hamirpur News: जमीन के गलत अभिलेख तैयार करने में 13 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। सदर एसडीएम ने कोतवाली में तहरीर दी।
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जिलाधिकारी कार्यालय
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिलाधिकारी आवास और उससे जुड़ी करीब 58.14 एकड़ भूमि के अभिलेखों में फर्जीवाड़ा करने के मामले में सदर एसडीएम सुक्रमा प्रसाद ने तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार व सदर लेखपाल समेत कुल 13 लोगों के खिलाफ सदर कोतवाली में गलत अभिलेख तैयार करने, बेईमानी व धोखाधड़ी समेत सात धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है। मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इसको लेकर वर्षों से कानूनी लड़ाई जारी है। जमीन विवाद यह प्रकरण करीब एक हजार करोड़ की संपत्ति का है।
एसडीएम ने दी तहरीर में बताया कि जिलाधिकारी आवास और उससे सटी मेरापुर डांडा की 51.89 एकड़ और भिलावां डांडा की 6.25 एकड़ खेतिहर जमीन को लेकर कपटपूर्ण कृत्य किया गया। प्रकरण में वर्ष 2004 से लेकर 2007 तक सदर तहसील में कार्यरत रहे एसडीएम विजय कुमार गुप्ता, तत्कालीन तहसीलदार, तत्कालीन नायब तहसीलदार जैनेंद्र सिंह और सदर लेखपाल की भूमिका पर सवाल उठे हैं।
एसडीएम सदर सुक्रमा प्रसाद विश्वकर्मा ने बताया कि तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और सदर लेखपाल के साथ ही मुकदमे में पैरवी करने वाले नौ लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोप है कि उक्त अधिकारियों व कर्मचारियों ने षड्यंत्र कर विपक्षीगण को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से छल व बेईमानी पूर्वक अवैध लाभ प्राप्त कर कूटरचित अभिलेख तैयार किए तथा सही अभिलेखों को न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया।
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एसडीएम ने दी तहरीर में बताया कि जिलाधिकारी आवास और उससे सटी मेरापुर डांडा की 51.89 एकड़ और भिलावां डांडा की 6.25 एकड़ खेतिहर जमीन को लेकर कपटपूर्ण कृत्य किया गया। प्रकरण में वर्ष 2004 से लेकर 2007 तक सदर तहसील में कार्यरत रहे एसडीएम विजय कुमार गुप्ता, तत्कालीन तहसीलदार, तत्कालीन नायब तहसीलदार जैनेंद्र सिंह और सदर लेखपाल की भूमिका पर सवाल उठे हैं।
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एसडीएम सदर सुक्रमा प्रसाद विश्वकर्मा ने बताया कि तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और सदर लेखपाल के साथ ही मुकदमे में पैरवी करने वाले नौ लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोप है कि उक्त अधिकारियों व कर्मचारियों ने षड्यंत्र कर विपक्षीगण को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से छल व बेईमानी पूर्वक अवैध लाभ प्राप्त कर कूटरचित अभिलेख तैयार किए तथा सही अभिलेखों को न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया।
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लोकसेवक होते हुए सरकारी संपत्ति को बेईमानी से विपक्षीगण को लाभ पहुंचाया गया है। इनके द्वारा करोड़ों की सरकारी भूमि को विपक्षीगण के नाम कराने के लिए भ्रष्टाचार किया गया। एफआइआर में जनपद कानपुर के स्वरूप नगर निवासी रमेश कुमार सिंघल, जानकीशरण सिंघल, राधारमण सिंघल , तिलकनगर पूर्वी कानपुर निवासी प्रकाश मोहन सिंघल, वाराणसी निवासी सूर्यनारायण, लखनऊ निवासी विवेक कुमार, शहर के रमेड़ी निवासी विशाल सिंघल, हिमांशु सिंघल, आनंदेश्वर अग्रवाल को भी नामजद किया गया है।
जिलाधिकारी घनश्याम मीना ने बताया कि तत्कालीन उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार व लेखपाल द्वारा सरकारी जमीन के अभिलेख गलत तरीके से तैयार कर विपक्षीगणों को लाभ पहुंचाने के मामले में आरोपियों के खिलाफ सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। मामले की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करेंगे। पूर्व में हुई लचर पैरवी का विपक्षी गण फायदा उठा रहे थे।
जिलाधिकारी घनश्याम मीना ने बताया कि तत्कालीन उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार व लेखपाल द्वारा सरकारी जमीन के अभिलेख गलत तरीके से तैयार कर विपक्षीगणों को लाभ पहुंचाने के मामले में आरोपियों के खिलाफ सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। मामले की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करेंगे। पूर्व में हुई लचर पैरवी का विपक्षी गण फायदा उठा रहे थे।