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Hamirpur: ज्ञानवापी विवाद पर नारायणानंद बोले- मुस्लिम पक्ष अपना दावा छोड़कर भाईचारे की मिशाल पेश करे

Sun, 16 Oct 2022 08:23 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 16 Oct 2022 08:23 PM IST
सार

हमीरपुर जनपद के इंगोहटा गांव में आयोजित सहस्त्रचंडी महायज्ञ में काशी पीठाधीश्वर के शंकराचार्य नारायणानंद तीर्थ शामिल हुए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष को ज्ञानवापी से दावा छोड़कर गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करनी चाहिए।

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Gyanvapi dispute, Kashi Peethadheeshwar Narayananand said that the Muslim side should leave its claim
काशी पीठाधीश्वर के शंकराचार्य स्वामी नारायणानंद महाराज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बुंदेलखंड में गोवंश दुर्दशा का शिकार हैं। सरकार को इन गोवंश पर विशेष ध्यान देना चाहिए। सरकार को गोचर क्षेत्र विकसित करके गोवंशों को संरक्षित करना चाहिए। ये बात हमीरपुर जिले में काशी पीठाधीश्वर के शंकराचार्य स्वामी नारायणानंद तीर्थ जी महाराज ने पत्रकार वार्ता में कही।

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इंगोहटा में चल रही सहस्त्रचंडी महायज्ञ में शामिल होने आए नारायणानंद तीर्थ जी ने राघवेंद्र सिंह राजावत के आवास पर पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि भारत धर्म प्रधान देश है। काशी, मथुरा और अयोध्या देश के हृदय हैं। मौजूदा सरकारें पहले की गई गलतियों को ठीक करने के लिए न्यायालय का सहारा ले रही हैं।
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गलतियों के लिए मौजूदा मुस्लिम जिम्मेदार नहीं हैं। उन्हें विवाद पैदा करने के बजाए गलतियां सुधारने में सहयोग करना चाहिए। काशी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद मूलत: शिवालय है। मुस्लिम पक्ष को बेहिचक अपना दावा छोड़कर प्रेम, सद्भाव, एकता, हिंदू मुस्लिम भाईचारे की मिशाल पेश करनी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि वेद, पुराण, रामायण, गीता, कुरान में लोक कल्याण की बातें कही गई हैं। संत-महात्मा सभी के लोक कल्याण की कामना करते हैं। मनुष्यता सबसे बड़ी चीज है। सब कुछ मिट्टी से निर्मित है और मिट्टी में ही समाहित हो जाता है।

सभी को आत्मा का ज्ञान होना चाहिए और यह तभी संभव होता है, जब मनुष्य भक्तिभाव से जुड़ता है। शंकराचार्य ने कहा कि विश्व में बढ़ रहे युद्धों के कारण प्रकृति का संतुलन गड़बड़ा गया है। प्रकृति को बचाने के लिए युद्धों को रोकना बेहद जरूरी है।

सभी को मर्यादा में रहकर निष्ठा के साथ सामाजिक संस्कृति का निर्वहन करना चाहिए। इससे ही सद्भाव उत्पन्न होगा और खुशहाली आएगी। उन्होंने कहा कि इंगोहटा में हो रहे सहस्त्र चंडी महायज्ञ से जनकल्याण होगा और भविष्य में इसके परिणाम क्षेत्रवासियों को अवश्य प्राप्त होंगे।

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