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जीएसटी इंटेलिजेंस ने पकड़ा 200 करोड़ की सुपारी का अवैध कारोबार, दिल्ली और कोलकाता में भी छापेमारी
Tue, 25 Dec 2018 09:18 PM IST
दुष्यंत शर्मा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Tue, 25 Dec 2018 09:18 PM IST
सार
- कानपुर, दिल्ली, गुवाहाटी और कोलकाता में दो दर्जन ठिकानों पर छापामारी
- 20 से ज्यादा फर्जी फर्में भी पकड़ीं, फर्जी कारोबार के कई आरोपी भी पकड़े
- माल का परिवहन हुआ लेकिन कहां से आया कहां गया पता नहीं, एक साल में 10 करोड़ की टैक्स चोरी
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विस्तार
जीएसटी इंटेलिजेंस कानपुर की टीम ने 200 करोड़ रुपये से अधिक की सुपारी का अवैध कारोबार पकड़ा है। यह कारोबार कई राज्यों में फैला था। अधिकारियों ने कानपुर, दिल्ली, गुवाहाटी और कोलकाता में दो दर्जन से अधिक ठिकानों पर छापामार कर इस कारोबार का पर्दाफाश किया।
तीन दिन तक चली जांच के बाद जीएसटी इंटेलिजेंस ने कोलकाता के कुछ कारोबारियों को भी पकड़ा है। उनसे पूछताछ में कानपुर के पान मसाला कारोबारियों, सुपारी व्यापारियों और एजेंटों के गठजोड़ की परतें खुल रही हैं।
जीएसटी इंटेलिजेंस के अपर निदेशक दिनेश कुमार को लगातार सूचनाएं मिल रही थीं कि कोलकाता और गुवाहाटी से कानपुर, लखनऊ और दिल्ली के लिए बड़े पैमाने पर सुपारी का परिवहन हो रहा है। ई-वे बिल के जरिये सुपारी के परिवहन का होना तो पता चल रहा था, लेकिन सुपारी कहां जा रही है इस बात की जानकारी नहीं मिल पा रही थी।
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इसके खुलासे की जिम्मेदारी उप निदेशक शलभ कटियार और उनकी टीम को सौंपी गई। शलभ कटियार ने रेकी शुरू की और 22 दिसंबर को बजरंग ट्रेडिंग कंपनी ट्रांसपोर्ट नगर कानपुर, बजरंग सेल्स कारपोरेशन लखनऊ, अंकिता सेल्स कारपोरेशन दिल्ली, मारुति ट्रेडर्स गुवाहाटी, आदित्य कारपोरेशन कोलकाता के प्रतिष्ठानों पर छापा मारा।
कानपुर, लखनऊ और दिल्ली की फर्में फर्जी पाई गईं। अफसरों ने इन प्रतिष्ठानों को सील कर दिया। इन फर्मों के लिंक में 10 से ज्यादा ठिकानों पर और छापा मारी हुई। नतीजा ये निकला कि कोलकाता में 15 से ऐसी फर्जी फर्मों का पता चला जिनके जरिये कई राज्यों में सुपारी का अवैध कारोबार फैला था। इन फर्मों से मिले दस्तावेजों के आधार पर अफसरों ने पाया कि बीते एक साल में करीब 200 करोड़ रुपये की सुपारी का परिवहन बिना टैक्स दिए हुआ।
सिर्फ सुपारी कारोबार पर टैक्स माना जाए तो पांच फीसदी के हिसाब से 10 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी हुई। यदि पान मसाला कारोबार के लिहाज से माने तो टैक्स चोरी कई गुना अधिक होगी। छापे के बाद अफसरों के हाथ लगे दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।
माना जा रहा है कि शहर के अलावा अन्य राज्यों का पान मसाला कारोबार अवैध सुपारी के बल पर चल रहा है। इससे जीएसटी की भारी भरकम टैक्स चोरी हो रही है। अफसर अब ये पता लगाने में जुटे हैं कि इस सुपारी की आपूर्ति किन किन कारोबारियों के यहां हुई।
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तीन दिन तक चली जांच के बाद जीएसटी इंटेलिजेंस ने कोलकाता के कुछ कारोबारियों को भी पकड़ा है। उनसे पूछताछ में कानपुर के पान मसाला कारोबारियों, सुपारी व्यापारियों और एजेंटों के गठजोड़ की परतें खुल रही हैं।
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जीएसटी इंटेलिजेंस के अपर निदेशक दिनेश कुमार को लगातार सूचनाएं मिल रही थीं कि कोलकाता और गुवाहाटी से कानपुर, लखनऊ और दिल्ली के लिए बड़े पैमाने पर सुपारी का परिवहन हो रहा है। ई-वे बिल के जरिये सुपारी के परिवहन का होना तो पता चल रहा था, लेकिन सुपारी कहां जा रही है इस बात की जानकारी नहीं मिल पा रही थी।
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इसके खुलासे की जिम्मेदारी उप निदेशक शलभ कटियार और उनकी टीम को सौंपी गई। शलभ कटियार ने रेकी शुरू की और 22 दिसंबर को बजरंग ट्रेडिंग कंपनी ट्रांसपोर्ट नगर कानपुर, बजरंग सेल्स कारपोरेशन लखनऊ, अंकिता सेल्स कारपोरेशन दिल्ली, मारुति ट्रेडर्स गुवाहाटी, आदित्य कारपोरेशन कोलकाता के प्रतिष्ठानों पर छापा मारा।
कानपुर, लखनऊ और दिल्ली की फर्में फर्जी पाई गईं। अफसरों ने इन प्रतिष्ठानों को सील कर दिया। इन फर्मों के लिंक में 10 से ज्यादा ठिकानों पर और छापा मारी हुई। नतीजा ये निकला कि कोलकाता में 15 से ऐसी फर्जी फर्मों का पता चला जिनके जरिये कई राज्यों में सुपारी का अवैध कारोबार फैला था। इन फर्मों से मिले दस्तावेजों के आधार पर अफसरों ने पाया कि बीते एक साल में करीब 200 करोड़ रुपये की सुपारी का परिवहन बिना टैक्स दिए हुआ।
सिर्फ सुपारी कारोबार पर टैक्स माना जाए तो पांच फीसदी के हिसाब से 10 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी हुई। यदि पान मसाला कारोबार के लिहाज से माने तो टैक्स चोरी कई गुना अधिक होगी। छापे के बाद अफसरों के हाथ लगे दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।
माना जा रहा है कि शहर के अलावा अन्य राज्यों का पान मसाला कारोबार अवैध सुपारी के बल पर चल रहा है। इससे जीएसटी की भारी भरकम टैक्स चोरी हो रही है। अफसर अब ये पता लगाने में जुटे हैं कि इस सुपारी की आपूर्ति किन किन कारोबारियों के यहां हुई।