फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Ground Report from Nauraiyakheda Kanpur

ये कैसा हो गया 'कानपुर का पानी', जीवन भर की पूंजी और विरासत छोड़कर जाने को मजबूर हो रहे लोग

Thu, 03 May 2018 07:25 PM IST
सौमित्रकांत दीक्षित, अमर उजाला, कानपुर
सौमित्रकांत दीक्षित, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 03 May 2018 07:25 PM IST
विज्ञापन
Ground Report from Nauraiyakheda Kanpur
हरा हो गया कानपुर के नौरैयाखेड़ा का पानी

धरती ने हमें क्या नहीं दिया और बदले में हमने क्या लौटाया। इधर पेड़ काटे उधर जमीन खोदी। कहीं पहाड़ काटे तो कहीं नदियां मोड़ीं। इन सबके बाद आज जो हालात पैदा हुए हैं वो किसी से छुपे नहीं हैं। विश्व के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में टॉप आए कानपुर के दामन पर एक दाग तो लग ही चुका है। डब्लूएचओ की रिपोर्ट ने हाल ही में कानपुर को वायु प्रदूषण के मामले में अव्वल पर पाया। इससे भी बुरे हालात पर तो 'कानपुर का पानी' है। शहर के नौरेया खेड़ा इलाके के लोग ऐसे पानी का सेवन करने को मजबूर हैं जिससे कुछ लोग हाथ धोने को भी नहीं तैयार होंगे।

विज्ञापन

पेश है कानपुर के नौरैयाखेड़ा से एक विशेष रिपोर्ट.... 

 

कानपुर के दादानगर इंडस्ट्रियल एरिया के पास नौरेया खेड़ा के इलाके के लोग आज क्रोमियम युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। यहां के पानी की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि हैंडपंप से निकलने वाले पानी का रंग हरा हो चुका है। लोगों के घरों में लगे सबमर्सिबल के पानी का रंग भी बदलकर पीला हो चुका है। इन सब की मुख्य वजह इलाके के औद्योगिक कचरे का सही निस्तारण न होना है। नौरेया खेड़ा के निवासी सुरेंद्र सिंह, नवल किशोर रामचंद्र, कैलाश, अंजू देवी ने बताया कि पानी का स्वाद इतना खारा हो चुका है कि पीने योग्य नहीं बचा। इसके साथ ही लोगों ने बताया कि लगभग तीन बार सरकारी पानी का लाइन डाली जा चुकी है लेकिन पानी आज तक नसीब नहीं हुआ। ऐसे में सभी के सामने पलायन का ही रास्ता बचा हुआ है। लेकिन फिर भी किसी भी विभाग को इनकी चिंता नहीं।

विज्ञापन


नौरेयाखेड़ावासियों ने बताई कुछ गंभीर समस्याएं
- आंत और फेफड़े सड़ने जैसी हो रहीं गंभीर बीमारियां
- आर्थिक रूप से कमजोर लोग क्रोमियम युक्त पानी पीने को हैं मजबूर
- लोगों में दिल का दौरा पड़ना हो चुका है सामान्य
- पेट भारी रहना, एसिडिटी, पेट में जलन, त्वचा रोगों से त्रस्त हैं लोग
- लोगों में बढ़ रहा कोलाइटिस का खतरा

इलाके में हैंडपंपों की मारा-मारी
सीन -1

नौरेया खेड़ा में घुसते से ही जो दूसरा हैंडपंप दिखा उसकी जान निकल चुकी थी। आसपास के लोगों ने बताया कि हैंडपंप लगभग आठ महीनों से खराब पड़ा है। कई बार इसकी शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


सीन-2
आगे बढ़ने पर मुख्य मार्ग पर पहुंचते ही एक हैंडपंप दिखा। यह हैंडपंप कूड़े के ढेर में धंस चुका था। पास केही एक दुकानदार ने बताया कि इस हैंडपंप की सुध लेने वाला कोई नहीं है। कई बार पार्षद से शिकायत की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

सीन-3
नौरेया खेड़ा सामुदायिक इज्जतघर के बाहर लगा हैंडपंप खराब पड़ा था। पास ही साइकिल की दुकान चलाने वाले मो. शमीम ने बताया कि  ये हैंडपंप लगने केकुछ ही समय बाद खराब हो गया था। जिसकी तरफ अभी तक किसी ने ध्यान नहीं दिया।

स्थानीय निवासी सीताराम ठाकुर ने बताया कि पिछले कुछ सालों से स्थिति भयावह होती जा रही है। लोगों को गंभीर बीमारियां हो रहीं हैं। सरकारी अमले के कुछ लोग आए। जो हैंडपंप थे उन पर सरकारी अमले के लोग लाल निशान लगा गए। लेकिन उन हैंडपंप की जगह कोई दूसरा पानी का इंतजाम नहीं किया। मुख्य मार्ग के किनारे फोटो कॉपी की दुकान चलाने वाले रामप्रसाद ने कहा उनकी दुकान के सामने का हैंडपंप सालभर से खराब पड़ा हुआ है। सरकारी पानी की लाइन पड़ी है लेकिन पानी नहीं आता। कई बार दुकान केसामने ट्रक चालक रुक जाते हैं लेकिन हैंडपंप खराब होने केकारण लौट जाते हैं।नौरेया खेड़ा इलाके में ब्रश हैंडल बनाने वाले व्यापारी सोनू सिंह ने बताया कि इलाके से सभी लोग पूरी तरह से आरओ सिस्टम और फिल्टर कंपनियों के पानी पर निर्भर हो चुके हैं। जिन  आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। वो मजबूरन यही पानी पीने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि इलाके में सभी जगह पानी का यही हाल है।

कितना खतरनाक है क्रोमियम युक्त पानी
जीएसवीएम मेडिकल क़ॉलेज के मेडिसिनविभाग के एचओडी डॉ. प्रेम सिंह ने बताया कि क्रोमियम युक्त पानी से पेट में अल्सर बन सकता है। इससे हड्डियों को भी काफी नुकसान पहुंचता है। इसके साथ ही बच्चों का दिमागी और शारीरिक विकास भी रुक जाता है। डॉ. प्रेम सिंह ने बताया कि इससे किडनी भी खराब हो जाती है और व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। इससे कई गंभीर बीमारियां हो जाती हैं।

  
औद्योगिकीकरण से स्थिति बिगड़ी
नौरेया खेड़ा क्षेत्र वार्ड-72 दबौली के पार्षद जेपी पाल ने बताया कि इलाके में यह स्थिति औद्योगिकीकरण के कारण हुई है। उन्होंने बताया कि  क्षेत्र के हैंडपंपों को सही करने के लिए एक टीम गठित की गई है। इसके साथ ही वॉटरलाइन से अप्रैल अंत तक पानी की आपूर्ति शुरू हो जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed