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Kanpur: आईआईटी में विकसित धातु से पानी से ग्रीन हाइड्रोजन होगा अलग, नेचर पत्रिका ने भी प्रदान की है मान्यता

Thu, 11 Jan 2024 01:51 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 11 Jan 2024 01:51 PM IST
सार

Kanpur News: आईआईटी के सामग्री विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. कृशानु बिस्वास ने बताया कि इस उच्च एन्ट्रॉपी मिश्र धातु (एचईए) कहा जाता है। पानी को ऑक्सीजन और हाइड्रोजन में विभाजित करने के लिए कोबाल्ट, आयरन, गैलियम, निकेल और जिंक का उपयोग किया गया है।

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Green hydrogen will be separated from water by the metal developed in IIT, Nature magazine has also given reco
आईआईटी कानपुर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अब ग्रीन हाइड्रोजन को पानी से अलग करने में आईआईटी कानपुर ने बड़ी सफलता अर्जित की है। आईआईटी कानपुर द्वारा विकसित विशेष धातु की मदद से ग्रीन हाइड्रोजन को पानी से अलग किया जा सकेगा। इसे नेचर पत्रिका ने मान्यता भी प्रदान की है।

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आईआईटी कानपुर के प्रो. कृशानु विश्वास, डॉ. निर्मल कुमार कटियार, आईआईटी मंडी के प्रो. अदिति हलदर, डॉ. ललिता शर्मा, आईआईटी खड़गपुर के प्रो. चंद्रशेखर तिवारी, डॉ. राकेश दास, आईआईएससी बेंगलुरू के प्रो. अभिषेक सिंह, डॉ. अर्को पारुई, डॉ. रितेश कुमार ने मिलकर इस धातु की खोज की है।
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आईआईटी के सामग्री विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. कृशानु बिस्वास ने बताया कि इस उच्च एन्ट्रॉपी मिश्र धातु (एचईए) कहा जाता है। पानी को ऑक्सीजन और हाइड्रोजन में विभाजित करने के लिए कोबाल्ट, आयरन, गैलियम, निकेल और जिंक का उपयोग किया गया है।

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इस प्रक्रिया को आसान और अधिक किफायती बना सकते हैं
इलेक्ट्रोलाइजर, ईधन सेल और कैटेलिसिस जैसे कई तकनीकी अनुप्रयोगों में जल विभाजन जरूरी होता है। इसमें यह धातु कारगर है। अभी तक इसके लिए रूथेनियम ऑक्साइड जैसी महंगी सामग्री का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में दो इलेक्ट्रोडों को इलेक्ट्रोलाइट घोल में डुबोने की आवश्यकता होती है। कम लागत वाले उच्च-एन्ट्रॉपी मिश्र धातु का उपयोग करके इस प्रक्रिया को आसान और अधिक किफायती बना सकते हैं।

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