Graduate MLC election: स्नातक में भाजपा का पलड़ा भारी, शिक्षक की राह आसान नहीं
दो फरवरी को पता चलेगा कि शिक्षक एमएलसी चुनाव में भाजपा अपनी प्रतिष्ठा बचा पाती है या सीट निर्दलीय के खाते में जाएगी। मतदाताओं के रुझान से यह बात सामने आई है कि शिक्षक एमएलसी सीट पर तीन प्रमुख दावेदारों के बीच टक्कर है। इसमें निवर्तमान एमएलसी राजबहादुर सिंह चंदेल (निर्दलीय), वेणु रंजन भदौरिया (भाजपा) व हेमराज सिंह गौर (निर्दलीय) का नाम शामिल है।
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कानपुर में स्नातक व शिक्षक एमएलसी पद के लिए सोमवार को पड़े मतदान के रुझान और माहौल से यह बात लगभग स्पष्ट हो गई है कि स्नातक चुनाव में भाजपा का पलड़ा इस बार भी भारी है। इस सीट पर भाजपा पिछले दो से लगातार जीत हासिल कर चुकी है। जबकि शिक्षक एमएलसी चुनाव में पहली बार उतरी भाजपा को दो निर्दलियों से कड़ी टक्कर मिली है।
अब दो फरवरी को पता चलेगा कि शिक्षक एमएलसी चुनाव में भाजपा अपनी प्रतिष्ठा बचा पाती है या सीट निर्दलीय के खाते में जाएगी। मतदाताओं के रुझान से यह बात सामने आई है कि शिक्षक एमएलसी सीट पर तीन प्रमुख दावेदारों के बीच टक्कर है। इसमें निवर्तमान एमएलसी राजबहादुर सिंह चंदेल (निर्दलीय), वेणु रंजन भदौरिया (भाजपा) व हेमराज सिंह गौर (निर्दलीय) का नाम शामिल है। राजबहादुर सिंह चंदेल पिछले पांच बार से शिक्षक एमएलसी चुनाव जीतते आ रहे हैं।
इस बार भाजपा के प्रत्याशी उतारने से इनके वोट बैंक में कमी आने की बात कही जा रही है, क्योंकि अभी तक चंदेल के पक्ष में भाजपा के मतदाता वोट करते रहे हैं। इसी तरह हेमराज सिंह को उनके ही शिक्षक संगठन उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट से जुड़े सहयोगी वीके मिश्रा स्वयं चुनाव मैदान उतर गए हैं। मिश्रा देहात जिले से आते हैं। माना जा रहा है कि उनके आने से हेमराज के वोट बैंक में कमी आई है। इसी तरह भाजपा प्रत्याशी वेणुरंजन भदौरिया पहली बार चुनाव मैदान में उतरे हैं, इनका इस क्षेत्र में कोई राजनीतिक इतिहास नहीं है।