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बुंदेलखंड में घुसी घातक बीमारी, मनुष्यों को भी खतरा
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 26 Jun 2017 04:56 PM IST
सार
पशुओं में तेजी से फैलने वाली इस बीमारी से मनुष्यों को भी खतरा
छह गधों में बीमारी का पता चला, इन्हें दी गई दर्दरहित मौत
पशुपालन विभाग ने मंडल में जारी किया अलर्ट
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विस्तार
मवेशियों में तेजी से फैलने वाली जानलेवा ‘ग्लैंडर्स फारसी’ बीमारी ने बुंदेलखंड में दस्तक दे दी है। इस रोग के बैक्टीरिया ज्यादातर घोड़ों, गधों और खच्चरों पर हमला करते हैं। संक्रमण से मवेशी पालक भी बीमारी की गिरफ्त में आ जाते हैं। हाल ही बालू ढोने वाले छह गधों के खून व सीरम की जांच में यह रोग पाया गया। इससे चित्रकूटधाम मंडल के पशु पालन विभाग में हड़कंप मच गया। एहतियातन बीमारी से ग्रसित आधा दर्जन गधों को जहरीले इंजेक्शन के जरिये दर्दरहित मौत दे दी गई।
पशुपालन विभाग के अपर निदेशक एके सिंह ने बताया कि इस बीमारी के लक्षण पाए जाने पर छह गधों के ब्लड के नमूने और सीरम जांच के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार (हरियाणा) भेज गए थे, जहां बीमारी की पुष्टि हुई। इसके बाद बेंदाघाट (यमुना नदी) में बालू ढोने वाले इन पशुओं को मरवा दिया गया। बीमारी का पता लगते ही पशु चिकित्सकों को अलर्ट जारी कर दिया गया। साथ ही अन्य खच्चरों व गधों के ब्लड के नमूने और सीरम जांच के लिए हिसार भेजने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोगों के खून की भी जांच की जाएगी।
जिलाधिकारी डा. सरोज कुमार ने पशु चिकित्सकों के साथ पंचायतों के सचिवों को भी इस काम में लगाया है। ये चिकित्सकों के साथ गांवों में जाकर ब्लड के नमूने लेने में उनका सहयोग करेंगे। ‘ग्लैंडर्स फारसी’ कुछ महीनों पहले प्रदेश के तराई क्षेत्र लखीमपुर खीरी के गधों में पाई गई थी। वहां गधों और घोड़ों के ब्लड सैंपल की पाजिटिव रिपोर्ट आने पर उन्हें भी मार दिया गया था। चित्रकूटधाम मंडल के पशुपालन विभाग ने मई में गधों, खच्चरों आदि के 39 ब्लड सैंपल जांच को हिसार प्रयोगशाला भेजे थे। छह सैंपल में ग्लैंडर्स फारसी पाजिटिव निकला है।
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अपर निदेशक ने बताया कि बीमारी से ग्रसित जिन छह गधों को मारा गया है, शासन उनके मालिकों को 16-16 हजार रुपये मुआवजा देगा। मवेशियों का इलाज कर रहे डाक्टर व कर्मचारियों के ब्लड सैंपल भी जांच के लिए भेजे जाएंगे।
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पशुपालन विभाग के अपर निदेशक एके सिंह ने बताया कि इस बीमारी के लक्षण पाए जाने पर छह गधों के ब्लड के नमूने और सीरम जांच के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार (हरियाणा) भेज गए थे, जहां बीमारी की पुष्टि हुई। इसके बाद बेंदाघाट (यमुना नदी) में बालू ढोने वाले इन पशुओं को मरवा दिया गया। बीमारी का पता लगते ही पशु चिकित्सकों को अलर्ट जारी कर दिया गया। साथ ही अन्य खच्चरों व गधों के ब्लड के नमूने और सीरम जांच के लिए हिसार भेजने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोगों के खून की भी जांच की जाएगी।
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जिलाधिकारी डा. सरोज कुमार ने पशु चिकित्सकों के साथ पंचायतों के सचिवों को भी इस काम में लगाया है। ये चिकित्सकों के साथ गांवों में जाकर ब्लड के नमूने लेने में उनका सहयोग करेंगे। ‘ग्लैंडर्स फारसी’ कुछ महीनों पहले प्रदेश के तराई क्षेत्र लखीमपुर खीरी के गधों में पाई गई थी। वहां गधों और घोड़ों के ब्लड सैंपल की पाजिटिव रिपोर्ट आने पर उन्हें भी मार दिया गया था। चित्रकूटधाम मंडल के पशुपालन विभाग ने मई में गधों, खच्चरों आदि के 39 ब्लड सैंपल जांच को हिसार प्रयोगशाला भेजे थे। छह सैंपल में ग्लैंडर्स फारसी पाजिटिव निकला है।
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अपर निदेशक ने बताया कि बीमारी से ग्रसित जिन छह गधों को मारा गया है, शासन उनके मालिकों को 16-16 हजार रुपये मुआवजा देगा। मवेशियों का इलाज कर रहे डाक्टर व कर्मचारियों के ब्लड सैंपल भी जांच के लिए भेजे जाएंगे।