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45 टेनरियों को दी नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 08 Apr 2016 01:09 AM IST
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जाजमऊ के डबका नाले से पानी का सैंपल भरते आईआईटी रूड़की टीम के सदस्य।
- फोटो : amarujala
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कानपुर। गंगा में हानिकारक तत्वों का डाटा जुटाने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की टीम के साथ गुरुवार को आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की टीम भी आ गई है। दोनों टीमों के सदस्यों ने दिन भर गंगा में गिरने वाले नाले और टेनरी से निकलने वाले कचरों का जगह-जगह जाकर परीक्षण किया। ऐसी जांच पहली बार की जा रही है। दिन भर में 90 टेनरियों की जांच की गई, जिसमें आधे में वाटर फ्लो मीटर बंद पाया गया। पीसीबी ने बताया कि इन सभी के खिलाफ नोटिस जारी की है। ये फ्लोमीटर टेनरियों से निकलने वाले गंदे पानी की मात्रा की जानकारी देता है।
पीसीबी की टीम का फोकस टेनरियों का कचरा है, तो आईआईटी की टीम का फोकस जो नाले सीधे गंगा में गिर रहे हैं, उनके हानिकारक तत्वों पर है। पीसीबी की टीम यहां पर दो महीने से भी ज्यादा रहकर परीक्षण करेगी। जबकि आईआईटी की टीम का एक ही दिन का शेड्यूल था। कुछ दिनों बाद यह फिर आएगी। आईआईटी की टीम ने एक महीने पहले भी गंगा में गिरने वाले नालों का परीक्षण कर डाटा इकट्ठा किया था। इस बार टीम यह देखने आई है कि पिछली बार से इसमें कितना अंतर आया है। पता चला है कि इस बार भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। इसकी रिपोर्ट जल संसाधन मंत्रालय को सौंपी जाएगी।
पीसीबी की टीम का फोकस टेनरियों का कचरा है, तो आईआईटी की टीम का फोकस जो नाले सीधे गंगा में गिर रहे हैं, उनके हानिकारक तत्वों पर है। पीसीबी की टीम यहां पर दो महीने से भी ज्यादा रहकर परीक्षण करेगी। जबकि आईआईटी की टीम का एक ही दिन का शेड्यूल था। कुछ दिनों बाद यह फिर आएगी। आईआईटी की टीम ने एक महीने पहले भी गंगा में गिरने वाले नालों का परीक्षण कर डाटा इकट्ठा किया था। इस बार टीम यह देखने आई है कि पिछली बार से इसमें कितना अंतर आया है। पता चला है कि इस बार भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। इसकी रिपोर्ट जल संसाधन मंत्रालय को सौंपी जाएगी।
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