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कानपुर: पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव बोले- ओवैसी का भाजपा-सपा के खिलाफ बोलना हिंदू विरोधी नहीं
Sun, 21 Nov 2021 10:36 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 21 Nov 2021 10:36 PM IST
सार
मौलाना खालिद और बोर्ड के अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि उन्हें तो आज तक कभी असदउद्दीन ओवैसी हिंदू या किसी अन्य धर्म के खिलाफ बोलते नहीं दिखे। भाजपा, सपा या किसी सियासी दल के नेता के खिलाफ बोलना उनकी राजनीतिक सोच है। इसे किसी धर्म के खिलाफ बोलना नहीं कहा जा सकता।
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असदउद्दीन ओवैसी
- फोटो : ANI
विस्तार
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा है कि एआईएमआईएम प्रमुख असदउद्दीन ओवैसी का भाजपा-सपा या किसी सियासी दल और नेता के खिलाफ बोलना हिंदू धर्म के खिलाफ नहीं है।
उनसे पूछा गया था कि बोर्ड चाहता है कि किसी भी धर्म के खिलाफ टिप्पणी करने वालों पर कार्रवाई के लिए कानून बने, जबकि ओवैसी कई बार अपशब्द बोलते हैं। इस पर मौलाना खालिद और बोर्ड के अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि उन्हें तो आज तक कभी असदउद्दीन ओवैसी हिंदू या किसी अन्य धर्म के खिलाफ बोलते नहीं दिखे।
भाजपा, सपा या किसी सियासी दल के नेता के खिलाफ बोलना उनकी राजनीतिक सोच है। इसे किसी धर्म के खिलाफ बोलना नहीं कहा जा सकता। बता दें कि असदउद्दीन ओवैसी शहर में हुए इस अधिवेशन में शामिल होने शनिवार को शहर आए थे। ओवैसी भी बोर्ड के सदस्य हैं।
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उनसे पूछा गया था कि बोर्ड चाहता है कि किसी भी धर्म के खिलाफ टिप्पणी करने वालों पर कार्रवाई के लिए कानून बने, जबकि ओवैसी कई बार अपशब्द बोलते हैं। इस पर मौलाना खालिद और बोर्ड के अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि उन्हें तो आज तक कभी असदउद्दीन ओवैसी हिंदू या किसी अन्य धर्म के खिलाफ बोलते नहीं दिखे।
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भाजपा, सपा या किसी सियासी दल के नेता के खिलाफ बोलना उनकी राजनीतिक सोच है। इसे किसी धर्म के खिलाफ बोलना नहीं कहा जा सकता। बता दें कि असदउद्दीन ओवैसी शहर में हुए इस अधिवेशन में शामिल होने शनिवार को शहर आए थे। ओवैसी भी बोर्ड के सदस्य हैं।
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जबरदस्ती किसी से निकाह नहीं किया जा सकता
बोर्ड के पदाधिकारियों ने बताया कि बिना लड़की की अनुमति के निकाह मान्य नहीं है, जो लोग बहला-फुसलाकर हिंदू लड़कियों से शादी कराने की बात कह रहे हैं, इस तरह के अब तक कोई सुबूत नहीं हैं। यह बात अलग है कि लड़का-लड़की ने पहले आपसी सहमति से शादी की।
कुछ दिन साथ में रहने के बाद मनमुटाव होने पर जब वे अलग होते हैं, तो अक्सर किसी एक पक्ष की तरफ से इस तरह की बात सामने आती है। इस पर यह नहीं कहना चाहिए कि निकाह के लिए लड़की का धर्म बदला गया। इस्लाम में महिलाओं को बड़े अधिकार दिए गए हैं।
अन्य समाज ने भी तलाक और संपत्ति में लड़कियों का हिस्सा इस्लाम से लिया है। वैवाहिक जीवन सफल न होने पर महिलाओं का पति से अलग होकर जिंदगी गुजारना एक अधिकार है। तलाक का अधिकार न होने पर न लड़की मायके और ससुराल के बीच पिसती थी। न स्वीकार की जाती थी और न ही छोड़ी जाती। बोर्ड की 251 सदस्यों में 32 महिलाएं हैं, जबकि 40 सदस्यीय कार्यकारिणी में पांच महिलाएं हैं।
बोर्ड के पदाधिकारियों ने बताया कि बिना लड़की की अनुमति के निकाह मान्य नहीं है, जो लोग बहला-फुसलाकर हिंदू लड़कियों से शादी कराने की बात कह रहे हैं, इस तरह के अब तक कोई सुबूत नहीं हैं। यह बात अलग है कि लड़का-लड़की ने पहले आपसी सहमति से शादी की।
कुछ दिन साथ में रहने के बाद मनमुटाव होने पर जब वे अलग होते हैं, तो अक्सर किसी एक पक्ष की तरफ से इस तरह की बात सामने आती है। इस पर यह नहीं कहना चाहिए कि निकाह के लिए लड़की का धर्म बदला गया। इस्लाम में महिलाओं को बड़े अधिकार दिए गए हैं।
अन्य समाज ने भी तलाक और संपत्ति में लड़कियों का हिस्सा इस्लाम से लिया है। वैवाहिक जीवन सफल न होने पर महिलाओं का पति से अलग होकर जिंदगी गुजारना एक अधिकार है। तलाक का अधिकार न होने पर न लड़की मायके और ससुराल के बीच पिसती थी। न स्वीकार की जाती थी और न ही छोड़ी जाती। बोर्ड की 251 सदस्यों में 32 महिलाएं हैं, जबकि 40 सदस्यीय कार्यकारिणी में पांच महिलाएं हैं।
भारत समेत एशिया में अल्पसंख्यकों के साथ हिंसा
कानपुर। बोर्ड में भारत समेत आसपास के देशों में अल्पसंख्यकों पर हुए अत्याचारों के खिलाफ भी चर्चा हुई। इसमें कहा गया कि बांग्लादेश में दुर्गा पंडाल में अल्पसंख्यक समाज को निशाना बनाना निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। बोर्ड इसकी कड़ी निंदा कर चुका है।
वहां की सरकार ने इसके खिलाफ एक्शन लिया। त्रिपुरा में मुसलमानों पर जुल्म हो रहे हैं। इस बात की रिपोर्टिंग करने पर पत्रकारों पर मुकदमा हो रहा है और इसे सरकार छिपा रही है, जबकि उसे दंगों को रोकने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि बोर्ड के प्रस्ताव में शामिल है कि न सिर्फ भारत में मुसलमान, बल्कि सिख, बौद्ध समेत अन्य अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति और जनजातियों पर हो रहे जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।
संवैधानिक, लोकतांत्रिक और कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। एक सवाल के जवाब में कहा कि अयोध्या में विवादित ढांचे की पूरी लड़ाई बोर्ड ने लड़ी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके खिलाफ आया है, जिसे हम गलत समझते हैं। फैसले के बाद भी देश में शांति बनी रही और कोई भी प्रतिक्रिया मुस्लिम समाज की तरफ से नहीं दी गई।
कानपुर। बोर्ड में भारत समेत आसपास के देशों में अल्पसंख्यकों पर हुए अत्याचारों के खिलाफ भी चर्चा हुई। इसमें कहा गया कि बांग्लादेश में दुर्गा पंडाल में अल्पसंख्यक समाज को निशाना बनाना निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। बोर्ड इसकी कड़ी निंदा कर चुका है।
वहां की सरकार ने इसके खिलाफ एक्शन लिया। त्रिपुरा में मुसलमानों पर जुल्म हो रहे हैं। इस बात की रिपोर्टिंग करने पर पत्रकारों पर मुकदमा हो रहा है और इसे सरकार छिपा रही है, जबकि उसे दंगों को रोकने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि बोर्ड के प्रस्ताव में शामिल है कि न सिर्फ भारत में मुसलमान, बल्कि सिख, बौद्ध समेत अन्य अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति और जनजातियों पर हो रहे जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।
संवैधानिक, लोकतांत्रिक और कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। एक सवाल के जवाब में कहा कि अयोध्या में विवादित ढांचे की पूरी लड़ाई बोर्ड ने लड़ी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके खिलाफ आया है, जिसे हम गलत समझते हैं। फैसले के बाद भी देश में शांति बनी रही और कोई भी प्रतिक्रिया मुस्लिम समाज की तरफ से नहीं दी गई।