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पहिया टूटने से पलट सकती थी ट्रेन, गरम हो गया था एक्सेल, हादसे से बची गरबा एक्सप्रेस
Thu, 20 Dec 2018 08:47 AM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 20 Dec 2018 08:47 AM IST
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हावड़ा से गांधीधाम (गुजरात) जा रही गरबा एक्सप्रेस हॉट बॉक्स डिटेक्टर (एचबीडी) की वजह से दुर्घटनाग्रस्त होने से बची। चुनार (मिर्जापुर) स्टेशन पर लगी इस डिवाइस भांप लिया कि पहिये में लगा एक्सेल गर्म हो रहा है। इसके बाद ट्रेन को धीमी गति से कानपुर सेंट्रल लाकर संबंधित कोच को बदला गया। ऐसा न किया जाता तो पहिया टूट सकता था। सेंट्रल आने के करीब सवा दो घंटे बाद ट्रेन को 12 बजे रवाना किया गया।
चुनार में एक्सेल गरम होने की जानकारी के बाद मेकैनिकल विभाग के एक सुपरवाइजर के साथ ट्रेन को रवाना किया गया। इलाहाबाद में कुंभ की तैयारियों के चलते ट्रेन को रोकना उचित नहीं समझा गया। धीमी गति से ट्रेन को सेंट्रल स्टेशन पर लाया गया। मंगलवार रात 9:43 बजे ट्रेन प्लेटफार्म नंबर एक पर आई। यहां मैकेनिकल विभाग के इंजीनियरों ने जांच की। तय हुआ कि इस कोच को बदल देना बेहतर होगा। इस पर कोच बदलकर ट्रेन को रात 12 बजे रवाना किया गया। करीब सवा दो घंटे तक प्लेटफार्म नंबर पर एक पर ट्रेन खड़ी रहने की वजह से श्रमशक्ति एक्सप्रेस को चार नंबर से चलाया गया।
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चुनार में एक्सेल गरम होने की जानकारी के बाद मेकैनिकल विभाग के एक सुपरवाइजर के साथ ट्रेन को रवाना किया गया। इलाहाबाद में कुंभ की तैयारियों के चलते ट्रेन को रोकना उचित नहीं समझा गया। धीमी गति से ट्रेन को सेंट्रल स्टेशन पर लाया गया। मंगलवार रात 9:43 बजे ट्रेन प्लेटफार्म नंबर एक पर आई। यहां मैकेनिकल विभाग के इंजीनियरों ने जांच की। तय हुआ कि इस कोच को बदल देना बेहतर होगा। इस पर कोच बदलकर ट्रेन को रात 12 बजे रवाना किया गया। करीब सवा दो घंटे तक प्लेटफार्म नंबर पर एक पर ट्रेन खड़ी रहने की वजह से श्रमशक्ति एक्सप्रेस को चार नंबर से चलाया गया।
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हॉट बॉक्स डिटेक्टर पटरी पर लगता है
जानकारों के मुताबिक अगर कोच न बदला जाता तो पहिया टूट सकता था। इससे बोगी बेपटरी होने पर ट्रेन के पलटने का भी खतरा था। मेकैनिकल विभाग के डिपो प्रभारी राहुल चौधरी ने बताया कि दूसरी बोगी लगाकर यात्रियों को रवाना किया गया। ट्रेन का कानपुर से जाने का समय 2:15 है। पहले से ही लेट चल रही ट्रेन धीमी गति से लाई जाने के कारण और लेट हो गई।
हॉट बॉक्स डिटेक्टर पटरी पर लगता है। इसमें तापमान मापक यंत्र के अलावा केबल लगा होता है। यह पूरा सिस्टम इंफ्रारेड (गर्मी से निकलने वाली किरणें) किरणों से चलता है। इनकी ऑनलाइन मॉनीटरिंग होती है। ट्रेन के गुजरने पर पहिये का एक्सेल (धुरा) अगर गर्म हुआ तो उससे निकलने वाली इंफ्रारेड किरणें बॉक्स पर पड़ेंगी और तापमान कितना है यह पता चल जाता है। अत्याधिक गर्म होने पर बॉक्स तुरंत तापमान अधिक होने की जनकारी दे देता है और इसकी सूचना रेलवे कंट्रोल में जाती है। इससे खराबी पता चल जाती है और मरम्मत कराई जाती है।
हॉट बॉक्स डिटेक्टर पटरी पर लगता है। इसमें तापमान मापक यंत्र के अलावा केबल लगा होता है। यह पूरा सिस्टम इंफ्रारेड (गर्मी से निकलने वाली किरणें) किरणों से चलता है। इनकी ऑनलाइन मॉनीटरिंग होती है। ट्रेन के गुजरने पर पहिये का एक्सेल (धुरा) अगर गर्म हुआ तो उससे निकलने वाली इंफ्रारेड किरणें बॉक्स पर पड़ेंगी और तापमान कितना है यह पता चल जाता है। अत्याधिक गर्म होने पर बॉक्स तुरंत तापमान अधिक होने की जनकारी दे देता है और इसकी सूचना रेलवे कंट्रोल में जाती है। इससे खराबी पता चल जाती है और मरम्मत कराई जाती है।