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UP: कन्या विवाह सहायता योजना में करोड़ों का फर्जीवाड़ा, अफसर की आईडी से पहुंचाया अपात्रों को लाभ, पढ़ें मामला

Fri, 02 Feb 2024 01:11 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 02 Feb 2024 01:11 PM IST
सार

Kanpur News: उप्र भवन एवं सन्निर्माण बोर्ड की कन्या विवाह सहायता योजना में करोड़ों का फर्जीवाड़ा सामने आया है। इसमें अफसर की आईडी से वेबपोर्टल पर लॉगिन कर अपात्रों को लाभ पहुंचाया गया है। मामले में अपर श्रमायुक्त ने साइबर सेल में एफआईआर की तहरीर दी है।

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Fraud worth crores in Girl Marriage Assistance Scheme, benefits were given to ineligible people through office
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में उप्र भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ओर से निर्माण श्रमिकों के लिए चलाई जा रही कन्या विवाह सहायता योजना में 11 करोड़ से ज्यादा का फर्जीवाड़ा सामने आया है। पात्रता पूरी न होने के बावजूद योजना के तहत मिलने वाली धनराशि का एक नहीं दो बार भुगतान कर दिया गया। यह भुगतान अपर श्रमायुक्त की लॉगइन आइडी से उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के वेब पोर्टल के जरिए किया गया है।

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मामला सामने आने के बाद बोर्ड की सचिव किरन मिश्रा ने बोर्ड के वेबपोर्टल पर अनाधिकृत गतिविधियों को लेकर अपर श्रमायुक्त को स्थित स्पष्ट करने, श्रम प्रवर्तन अधिकारी का स्पष्टीकरण देने, मामले में एफआइआर दर्ज कराने और श्रमिकों की जांच कराते हुए धनराशि की वसूली किए जाने के निर्देश दिए हैं। वहीं अपर श्रमायुक्त ने साइबर क्राइम थाना रेलबाजार में एफआईआर कराने के लिए तहरीर दी है।
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दरअसल श्रमिकों के लिए चलाई जा रही कन्या विवाह सहायता योजना के तहत आवेदन के लिए एक साल पुराने पंजीयन का होना अनिवार्य है। इस योजना में 55 हजार रुपये मिलते हैं। अपर सचिव बोर्ड किरन मिश्रा की ओर से 31 जनवरी को भेजे पत्र में बताया गया है कि 27 जनवरी की शाम को बोर्ड के वेबपोर्टल का परीक्षण करने पर पता चला कि कन्या विवाह सहायता योजना के तहत कुल 463 आवेदन ऐसे श्रमिकों के किए गए हैं।

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30 जनवरी को फिर से परीक्षण किया गया
उन्होंने योजना के तहत एक साल पुराने पंजीयन की अनिवार्य पात्रता को पूरा नहीं किया गया। इसके बाद इन आवेदनों को दोबारा परीक्षण की प्रक्रिया में डाल दिया गया। इसके बाद 30 जनवरी को फिर से परीक्षण किया गया, तो 463 में से 201 श्रमिकों को भुगतान कर दिया गया है। करीब 11 करोड़ 55 हजार का भुगतान किया गया।

लॉग-इन के दौरान ओटीपी भेजी गई
पत्र में बताया गया कि अपर श्रमायुक्त कानपुर कल्पना श्रीवास्तव की आईडी डीएलसी तीन केएनपी से बोर्ड के वेबपोर्टल पर लॉग-इन किया गया। लॉग-इन के दौरान ओटीपी भेजी गई। इसकी पुष्टि बीएसएनएल के रिकॉर्ड से हो रही है। इसके अलावा आधार अपडेट के पेज के माध्यम से पुराने पंजीकरण पर आधार और मोबाइल नंबर भी अपडेट किए गए।

छह दिन में किए गए 259 आवेदन
योजना आवेदन के पेज पर जनपद सहारनपुर की सीएससी आईडी 442656670013 (रोहित कुमार) के माध्यम से बिना मोबाइल नंबर, बिना नवीनीकरण और बिना फैमिली आईडी के कन्या विवाह अनुदान योजना के तहत 25 जनवरी को 1:41 बजे से 30 जनवरी 5:35 बजे तक कुल 259 आवेदन किए गए। योजना में आवेदन अपर/उप/सहायक श्रमायुक्त के स्तर से श्रम प्रवर्तन अधिकारियों को आवंटित किए जाने के प्रावधान हैं।

आवेदनों पर श्रम प्रवर्तन अधिकारी की रिपोर्ट लगाई गई
लेकिन इसमें श्रम प्रवर्तन अधिकारी कानपुर देहात अरविंद सोनकर की आईडी एलईओ09केएनपीडी के जरिए आवेदनों को श्रम प्रवर्तन अफसरों को आवंटित कर दिया गया। आवेदनों पर श्रम प्रवर्तन अधिकारी की रिपोर्ट लगाई गई। आवेदनों पर सहायक श्रमायुक्त की रिपोर्ट को स्किप हटाया किया गया। हालांकि अपर श्रमायुक्त कानपुर की आईडी से लॉग-इन होने पुष्टि बीएसएनएल के रिकॉर्ड में प्रदर्शित हो रहे हैं।

बिना मैप डिजिटल साइन
बताया गया कि बिना मैप की हुई फर्जी डीएससी से डिजिटल सिग्नेचर कर पोर्टल पर परिवर्तन कर आवेदन स्वीकृत किए गए। इसी तरह वित्त एवं लेखाधिकारी / कोषाधिकारी की आईडी को स्किप हटाते हुए अपर श्रमायुक्त की आईडी से ही भुगतान किया गया।

पंजीकरण नंबर अलग, नाम-पता एक
जिन अपात्रों को भुगतान किया गया है। इसमें सभी के पंजीकरण नंबर अलग-अलग दिख रहे हैं लेकिन तमाम के नाम और पता एक ही है। जो बड़े फर्जीवाड़ा की ओर इशारा कर रहे हैं।

मामला जानकारी में आया है। बोर्ड से और संबंधित अफसर से डिटेल रिपोर्ट ली जाएगी। योजना का संचालन उप्र भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार बोर्ड की ओर से किया जाता है।  -मार्कंडेय शाही, श्रमायुक्त उप्र

मामले की उच्च स्तरीय जांच हो। बोर्ड की वेबसाइट के जरिए अपात्रों को भुगतान किया गया है। रेलबाजार साइबर थाना में एफआईआर दर्ज करने का पत्र दिया गया है।  -अपर श्रमायुक्त कल्पना श्रीवास्तव

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