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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Four-year-old child not getting treatment in Ursala, Deputy CM reprimanded

इंसानियत शर्मसार मामला: उर्सला में चार साल के बच्चे को नहीं मिला था इलाज, अस्पातल की अंधेरगर्दी पर डिप्टी सीएम आग बबूला

Sat, 07 May 2022 06:34 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sat, 07 May 2022 06:34 AM IST
सार

कानपुर के उर्सला अस्पताल में चार साल के बच्चे को इलाज न मिलने के मामले में डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने लापरहवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं, डीएम ने जांच कमेटी गठित कर दी है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

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Four-year-old child not getting treatment in Ursala, Deputy CM reprimanded
उर्सला अस्पताल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

उर्सला में गुरुवार को चार साल के मासूम को इलाज न देने और मां को घंटों भटकाने का मामला डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने संज्ञान लिया है। उन्होंने ट्वीट कर उर्सला के निदेशक को लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही उर्सला में दोबारा ऐसा न हो इसके लिए अस्पताल प्रशासन को सजग रहने के निर्देश दिए हैं।

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वहीं शुक्रवार को डीएम नेहा शर्मा ने मामले में जांच कमेटी गठित कर दी। कमेटी ने उर्सला पहुंचकर सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। इस मामले में उर्सला के निदेशक दो वार्ड ब्वाय को पहले ही निलंबित कर चुके हैं। लापरवाही बरतने पर ड्यूटी डॉक्टर डॉ. केएन कटियार, डॉ. प्रवीण कुमार सक्सेना और फार्मासिस्ट सत्येंद्र सिंह और संजय यादव के खिलाफ कार्रवाई के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक को भी लिखा है।
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बता दें, गुरुवार को दादानगर निवासी विधवा महिला अपने चार साल के बेटे अनुभव का इलाज कराने उर्सला इमरजेंसी आई थी। बच्चे पर अल्मारी गिरने से वह बेसुध हो गया था। यहां तैनात डॉक्टर ने बच्चे को भर्ती करने के बजाय एक्सरे कराने को भेज दिया था। जब महिला एक्सरे करवा कर लाई तो डॉक्टर चले गए। बड़ी मुश्किल से दूसरे डॉक्टर मिले, तो उन्होंने बच्चे को देखते ही हैलट ले जाने को कह दिया था।

कार्रवाई के बाद सुधरे हालात
कार्रवाई के बाद शुक्रवार को उर्सला इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के इलाज की व्यवस्था में सुधार नजर आया। मरीजों के स्वास्थ्य परीक्षण, इलाज के साथ ही गंभीर मरीजों को हैलट रिफर करते समय रिफर लेटर में ट्रीटमेंट का उल्लेख भी किया गया, जबकि पहले आमतौर पर इमरजेंसी के डॉक्टर गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार देना तो दूर बिना छूए ही कागज में रिफर टू एलएलआर (हैलट रिफर) लिखकर टरका देते थे। हालांकि, यह सख्ती कुछ दिनों की ही है। लगातार निगरानी न होने से डॉक्टर लापरवाही बरतते हैं।

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