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ठंड में ब्रेन स्ट्रोक चार की जान गई
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Tue, 19 Jan 2016 01:35 AM IST
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मौसम में आए बदलाव के कारण ब्रेन स्ट्रोक से चौबीस घंटे के अंदर चार लोगों की मौत हो गई। इनमें से दो शहर, एक औरैया और महिला कानपुर देहात के निवासी हैं।
यशोदा नगर निवासी राम सबल कटियार (72) रविवार रात बाजार सब्जी खरीदने गए थे। घर लौटने पर अचानक उनकी हालत बिगड़ने लगी। परिजन उन्हें लेकर प्राइवेट अस्पताल पहुंचे। यहां से उन्हें हैलट के लिए रेफर किया गया। बीच रास्ते में रामसबल ने दम तोड़ दिया। डाक्टरों ने मौत का कारण ब्रेन स्ट्रोक बताया है।
रामादेवी के मो. नसीम (65) का सोमवार सुबह शरीर का दाहिना हिस्सा अचानक सुन्न हो गया। सूचना पर पहुंचे घर वाले उन्हें लेकर एक प्राइवेट अस्पताल आए। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। नसीम रिक्शा चलाते थे। उधर औरैया के रामआधार (85) और कानपुर देहात की शफीकुन्निशा (63) की भी ब्रेन स्ट्रोक से मौत हो गई।
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शीतः लहर सुख-दुख की
दो दिन से मौसम की चाल काफी कुछ बदल रही है। शीत लहर से ठंड की सुरसुरी बढ़ी तो दिन और रात का तापमान और गिर गया है। ठंडी और बूंदाबांदी के आसार ने किसानों को मुस्कुराने का मौका दिया है तो बिजली और मरीजों की मुसीबत भी खड़ी हो गई है।
लगातार चल रही पछुआ हवाओं के कारण बढ़ी गलन से रात का पारा फिर से गिर गया। हालांकि बदरी होने से दिन का तापमान चढ़ा है। पर, मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि मंगलवार से तापमान में बढ़ोतरी होगी। बदरी अधिक होने से कहीं-कहीं बूंदाबांदी भी हो सकती है। यह जानकारी सीएसए के मौसम विज्ञानी डॉ. अनिरुद्ध दुबे ने दी।
फसलों के लिए अच्छी है लौटी ठंड
सीएसए के मौसम विज्ञानी डॉ. सीबी के मुताबिक तीन-चार दिनों से पड़ रही ठंड फसलों के लिए फायदेमंद है। इस मौसम से गेहूं, चना, जौ और मटर की फसल को फायदा मिलेगा। मौसम में बदलाव के बाद तापमान फिर से बढ़ा तो इन फसलों को नुकसान होगा।
यह होता है ब्रेन स्ट्रोक
हृदय से दिमाग की नसों को खून की सप्लाई होती है। इसमें रुकावट के कारण दिमाग की नसें मरने लगती हैं। इसकी वजह से ब्रेन स्ट्रोक होता है। मोटापा, टेंशन, डायबिटीज, स्मोकिंग, बढ़ा कोलेस्ट्राल और हृदय की बीमारी ब्रेन स्ट्रोक की वजह भी हो सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार ठंड के मौसम में शरीर को गर्म रखने के लिए ब्लड प्रेशर अपने-आप बढ़ने लगता है। दरअसल, नहाने और घर से बाहर निकलने के वक्त शरीर को ज्यादा गर्मी की जरूरत होती है। इस लिए ब्लड प्रेशर अचानक काफी बढ़ जाता है। इससे ब्रेन में खून की सप्लाई बाधित होने लगती है। पहले से ही बीमार लोगों पर अटैक का खतरा ज्यादा रहता है
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यशोदा नगर निवासी राम सबल कटियार (72) रविवार रात बाजार सब्जी खरीदने गए थे। घर लौटने पर अचानक उनकी हालत बिगड़ने लगी। परिजन उन्हें लेकर प्राइवेट अस्पताल पहुंचे। यहां से उन्हें हैलट के लिए रेफर किया गया। बीच रास्ते में रामसबल ने दम तोड़ दिया। डाक्टरों ने मौत का कारण ब्रेन स्ट्रोक बताया है।
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रामादेवी के मो. नसीम (65) का सोमवार सुबह शरीर का दाहिना हिस्सा अचानक सुन्न हो गया। सूचना पर पहुंचे घर वाले उन्हें लेकर एक प्राइवेट अस्पताल आए। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। नसीम रिक्शा चलाते थे। उधर औरैया के रामआधार (85) और कानपुर देहात की शफीकुन्निशा (63) की भी ब्रेन स्ट्रोक से मौत हो गई।
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शीतः लहर सुख-दुख की
दो दिन से मौसम की चाल काफी कुछ बदल रही है। शीत लहर से ठंड की सुरसुरी बढ़ी तो दिन और रात का तापमान और गिर गया है। ठंडी और बूंदाबांदी के आसार ने किसानों को मुस्कुराने का मौका दिया है तो बिजली और मरीजों की मुसीबत भी खड़ी हो गई है।
लगातार चल रही पछुआ हवाओं के कारण बढ़ी गलन से रात का पारा फिर से गिर गया। हालांकि बदरी होने से दिन का तापमान चढ़ा है। पर, मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि मंगलवार से तापमान में बढ़ोतरी होगी। बदरी अधिक होने से कहीं-कहीं बूंदाबांदी भी हो सकती है। यह जानकारी सीएसए के मौसम विज्ञानी डॉ. अनिरुद्ध दुबे ने दी।
फसलों के लिए अच्छी है लौटी ठंड
सीएसए के मौसम विज्ञानी डॉ. सीबी के मुताबिक तीन-चार दिनों से पड़ रही ठंड फसलों के लिए फायदेमंद है। इस मौसम से गेहूं, चना, जौ और मटर की फसल को फायदा मिलेगा। मौसम में बदलाव के बाद तापमान फिर से बढ़ा तो इन फसलों को नुकसान होगा।
यह होता है ब्रेन स्ट्रोक
हृदय से दिमाग की नसों को खून की सप्लाई होती है। इसमें रुकावट के कारण दिमाग की नसें मरने लगती हैं। इसकी वजह से ब्रेन स्ट्रोक होता है। मोटापा, टेंशन, डायबिटीज, स्मोकिंग, बढ़ा कोलेस्ट्राल और हृदय की बीमारी ब्रेन स्ट्रोक की वजह भी हो सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार ठंड के मौसम में शरीर को गर्म रखने के लिए ब्लड प्रेशर अपने-आप बढ़ने लगता है। दरअसल, नहाने और घर से बाहर निकलने के वक्त शरीर को ज्यादा गर्मी की जरूरत होती है। इस लिए ब्लड प्रेशर अचानक काफी बढ़ जाता है। इससे ब्रेन में खून की सप्लाई बाधित होने लगती है। पहले से ही बीमार लोगों पर अटैक का खतरा ज्यादा रहता है